पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव इस साल होना है. राज्य में अभी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनीक्षण (एसआईआर) अभियान चल रहा है. अभी यह पूरा नहीं हुआ है. यह पूरा कब होगा इसकी कोई तारीख भी अभी सामने नहीं आई है. हालांकि एसआईआर के बाद मतदाता सूची का ड्राफ्ट 28 फरवरी को प्रकाशित किया जाना है. इसमें ड्राफ्ट सूची के सभी 7.08 करोड़ नाम शामिल होंगे. इन नामों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा.ये श्रेणियों में होंगी अनुमोदित, हटाए गए और विचाराधीन/निर्णय के अधीन नाम.इन सूचियों में एसआईआर के तहत किए गए बदलाव देखे जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रकाशित की जाने वाली यह सूची अंतिम नहीं होगी. क्योंकि तार्किक विसंगति (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी) के मामलों की जांच और निपटारे की प्रक्रिया जारी रहने के साथ-साथ पूरक सूचियां चरणबद्ध तरीके से जारी की जाती रहेंगी. पश्चिम बंगाल की वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल सात मई को पूरा होना है, यानी की राज्य में विधानसभा का चुनाव इससे पहले हो जाना चाहिए. लेकिन एसआईआर की रफ्तार को देखते हुए राज्य में समय पर चुनाव होने पर आशंका जताई जा रही है.
अदालत में पहुंची एसआईआर पर लड़ाई
कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 22 फरवरी के एक पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि एसआईआर की कवायद में तैनात 250 न्यायिक अधिकारियों को दावों और आपत्तियों का निपटारा करने में करीब 80 दिन का समय लगेगा. इसके बाद 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान आए 80 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए 250 जिला जजों और दीवानी न्यायाधीशों की तैनाती के अलावा झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की इजाजत दी थी. चुनाव आयोग के विशेष सूची पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के लिए पश्चिम बंगाल को झारखंड और ओडिशा से करीब 200 न्यायिक अधिकारी मिलने की संभावना है. दावों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए राज्य में पहले से ही करीब 270 न्यायिक अधिकारी काम कर रहे हैं. झारखंड और ओडिशा से 200 न्यायिक अधिकारियों के मिल जाने के बाद से इन अधिकारियों की संख्या बढ़कर करीब 470 हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैनात न्यायिक अधिकारियों को उन लोगों के दावों और आपत्तियों के संबंध में फैसला लेने के लिए तैनात किया गया है, जिनके नाम तार्किक विसंगतियों की सूची में शामिल हैं. इन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का खतरा है.'तार्किक विसंगति' श्रेणी के तहत वोटर के माता-पिता के नाम का मिलान न होने और उसके और उसके माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से अधिक आयु जैसी बातों को शामिल किया गया है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम "निर्णय प्रक्रियाधीन" के रूप में चिह्नित हैं, उन्हें तब तक मतदान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक उनके मामलों का निपटारा नहीं हो जाता और उन्हें औपचारिक रूप से अनुमोदित नहीं कर दिया जाता है.मंजूरी मिलने और बाद की पूरक सूची में शामिल किए जाने के बाद ही उन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त होगा.
बंगाल एसआईआर में कितने आपत्तियां लंबित हैं
कलकत्ता हाई कोर्ट के मुताबिक अभी 80 लाख से अधिक दावों का निस्तारण किया जाना है. इस तरह अगर एक न्यायिक अधिकारी एक दिन में 200 आपत्तियों और दावों को निपटाए तब भी सभी दावों के निपटाने में 75 दिन से अधिक का समय लगना है. जबकि पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल ही सात मई तक है. राज्य में विधानसभा का चुनाव हर हाल में सात मई से पहले पूरा कर नई विधानसभा का गठन करना होगा.लेकिन यह होना मुश्किल लग रहा है.

पश्चिम बंगाल में 2021 का विधानसभा चुनाव की घोषणा 26 फरवरी 2021 को हुई थी. वह चुनाव कुल आठ चरणों में कराया गया था. पहले चरण का मतदान 27 मार्च और आठवें व अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को कराया गया था. सभी चरणों की मतगणना एक साथ दो मई 2021 को कराई गई थी. राज्य की चुनाव प्रक्रिया चार मई को पूरी हुई थी. इस तरह इस चुनाव की घोषणा से लेकर चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने में कुल 69 दिन का समय लगा था. हालांकि यह चुनाव कोरोना महामारी के दौरान कराया गया था. इस वजह से कई तरह के नए प्रावधान किए गए थे.
कब तक है पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल
पश्चिम बंगाल की विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में अभी 70 दिन का समय बचा हुआ है. लेकिन अभी भी यह साफ नहीं हो पाया है कि राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी. हालांकि कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस काम में 80 दिन का समय लग सकता है.इस तरह एसआईआर का काम पूरा होने में 17 मई तक का समय लग सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर सात मई तक चुनाव नहीं हुआ तो क्या होगा. इसमें दो प्रमुख संभावनाएं सामने आती हैं. पहला यह कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए और एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वहां विधानसभा के चुनाव कराए जाएं. दूसरी संभावना यह हो सकता है कि चुनाव आयोग पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर ही चुनाव कराए.
एसआईआर को लेकर जारी अदालती लड़ाई और तकनीकी दिक्कतों के बीच चुनाव आयोग में भी चुनाव की तारीखों को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है. हालांकि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर राज्य में एक चरण में विधानसभा चुनाव कराने की सिफारिश की है. लेकिन इस पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना है. पश्चिम बंगाल में 2001 का विधानसभा चुनाव एक चरण में कराया गया था. इसके अलावा 2011 का विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराया गया था. विशेषज्ञ इस बात की संभावना जता रहे हैं कि इस बार का विधानसभा चुनाव पिछली बार की तुलना में कम चरण में कराए जाएं. लेकिन यह कितने चरण में होगा इसका फैसला चुनाव आयोग को करना है.
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