- अमित शाह ने बंगाल में 15 दिनों तक संगठन की बैठकों और प्रचार रैलियों के माध्यम से चुनावी रणनीति तैयार की थी.
- अमित शाह ने कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू करने और गुंडों व घुसपैठियों से सख्ती का वादा किया था
- भूपेंद्र यादव ने माइक्रो-मैनेजमेंट और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों में बीजेपी की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे पार्टी के चाणक्य और कई ऐतिहासिक विजय के शिल्पकार गृह मंत्री अमित शाह की कुशल रणनीति और अनुभव माना जा रहा है. अमित शाह पंद्रह दिनों तक पश्चिम बंगाल में डेरा डाले रहे. उन्होंने समन्वय किया और आवश्यक निर्देश दिए. रणनीति को ज़मीन पर उतारने के लिए लगातार संगठन की बैठकें कीं. वे देर रात तक पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर उन्हें गाइड करते थे और दिन में रैलियों और रोड शो के माध्यम से प्रचार करते थे. उन्होंने प बंगाल में पचास से भी अधिक रैलियां और रोड शो किए.
उन्होंने इस दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं जिनमें सरकार बनने के बाद कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू करना, गुंडों और घुसपैठियों से सख्ती से निपटना शामिल है. पहले चरण के मतदान के बाद उन्होंने कहा कि इस चरण में बीजेपी ने 110 से अधिक सीटें जीत लीं हैं और दूसरे चरण में प्रचंड बहुमत का रास्ता साफ हो जाएगा. इससे बीजेपी के लिए मुश्किल माने जाने वाले दूसरे चरण में लोगों को बीजेपी के आने का भरोसा हुआ. जिसके बाद बीजेपी ने ममता का यह क़िला तोड़ दिया.अमित शाह के साथ पांच केंद्रीय नेताओं की रणनीतिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है. संगठन से लेकर सोशल मीडिया तक, इन्होंने टीम की तरह काम किया.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने पूरे चुनाव अभियान के मुख्य रणनीतिकार के रूप में काम किया. उन्होंने विभिन्न समुदायों और सामाजिक वर्गों के बीच समन्वय बिठाने का काम किया. उनकी भूमिका मुख्य रूप से केंद्र और राज्य इकाई के बीच एक पुल की तरह थी, जिससे संसाधनों और केंद्रीय नेतृत्व के दौरों का सही प्रबंधन हो सका.
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
संगठनात्मक कौशल में माहिर भूपेंद्र यादव ने माइक्रो-मैनेजमेंट पर ध्यान दिया. उन्होंने बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी कानूनी पेचीदगियों को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई. बिहार और अन्य राज्यों का उनका अनुभव बंगाल के चुनौतीपूर्ण चुनावी माहौल में काफी काम आया.
राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल
सुनील बंसल ने बीजेपी को उत्तर प्रदेश में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था. बंगाल में उन्होंने जमीनी स्तर पर 'पन्ना प्रमुखों' की फौज खड़ी की. उनका मुख्य ध्यान टीएमसी के 'कैडर-आधारित' तंत्र का मुकाबला करने के लिए बीजेपी का अपना एक मजबूत और अनुशासित संगठन तैयार करने पर था.
पूर्व सीएम बिप्लब देब
त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब को वामपंथी शासन के खिलाफ लड़ने और उसे उखाड़ फेंकने का सीधा अनुभव था. बंगाल में उन्होंने विशेष रूप से उन क्षेत्रों में काम किया जहाँ की संस्कृति और भाषा त्रिपुरा से मिलती-जुलती है. उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं में जोश भरने और आक्रामक प्रचार शैली को अपनाने में मदद की.
अमित मालवीय (आईटी सेल प्रमुख)
अमित मालवीय ने डिजिटल मोर्चे पर 'नैरेटिव' की लड़ाई का नेतृत्व किया. संदेशखाली से लेकर आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने और सरकार विरोधी माहौल बनाने में उनकी भूमिका निर्णायक रही. उन्होंने टीएमसी के प्रचार तंत्र का डिजिटल माध्यमों से कड़ा मुकाबला किया.इन नेताओं के सामूहिक प्रयासों ने ही बीजेपी को बंगाल के दुर्ग में इस स्तर तक पहुंचाने में सफलता दिलाई है.
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