- नए अपडेट में कहा जा रहा है कि अल नीनो के कारण भारत में 12 राज्यों के 300 जिले प्रभावित हो सकते हैं.
- UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी देते हुए कहा अल नीनो गर्म होती दुनिया में आग में घी का काम करेगी.
- WMO के अनुसार अल नीनो के कारण गर्मी इस बार जून-अगस्त ही नहीं नवंबर तक अपने तेवर दिखाएगी.
दुनिया भर में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित है. फ्रांस में गर्मी से 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में ऐसी गर्मी पड़ रही है कि सड़कें पिघल जा रही है. लोगों का कहना है कि इस बार जैसी गर्मी पड़ रही है, वैसी आज तक नहीं देखी. भारत के कई हिस्से भी भीषण गर्मी की जद में है. राजधानी दिल्ली, यूपी, बिहार, पंजाब, राजस्थान जैसे राज्यों में अभी तक ढ़ग से बारिश नहीं हुई है. रिकॉड तोड़ पड़ रही इस भीषण गर्मी के पीछे सबसे बड़ा कारण अल नीनो को बताया जा रहा है. अब अल नीनो को लेकर जो नया अपडेट आया है, वह और चिंता बढ़ाने वाला है.
अल नीनो की जद में आएंगे भारत के 300 जिले
अल नीनो के कारण क्लाइमेट वार्मिंग के गहराते संकट के बीच भारत के लिए पहले यह अपडेट आया था कि देश के 111 जिलों में अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. अब नए अपडेट में कहा जा रहा है कि अल नीनो के कारण भारत में 12 राज्यों के 300 जिले प्रभावित हो सकते हैं.

एंटोनियो गुटेरेस
ये चेतावनी संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के सन्दर्भ में आयी है. WMO की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रॉपिकल पैसिफिक में समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म होने की वजह से 'अल नीनो' की स्थिति बन रही है.
दैनिक मौसम परिचर्चा (28.06.2026)
— India Meteorological Department (@Indiametdept) June 28, 2026
अगले 5 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी वर्षा (7-20 सेमी) होने की संभावना है। साथ ही, 28 से 29 जून के बीच उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में और 28 जून, 2026 को असम और मेघालय में… pic.twitter.com/aLwewx2Uyu
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जून-अगस्त ही नहीं नवंबर तक दिखेगा अल नीनो का असर
WMO के आंकलन के मुताबिक, जून-अगस्त 2026 के दौरान अल नीनो इवेंट होने की संभावना 80% है. इसके कम से कम नवंबर तक बने रहने की संभावना 90% या उससे ज़्यादा है. ज़्यादातर फोरकास्ट मॉडल बताते हैं कि अल नीनो कम से कम मध्यम स्तर का होगा, लेकिन यह बहुत स्ट्रांग भी हो सकता है.
इससे दुनिया भर में तापमान और बारिश के पैटर्न पर असर पड़ने और आने वाले महीनों में आपदा का खतरा बढ़ सकता है. जाहिर है अल नीनो का संकट गहरा रहा है, और इसका भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता और तनाव बढ़ता जा रहा है.

भारत में अल नीनो से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही, कृषि मंत्री ने बताया?
इसके असर से निपटने के लिए ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर शुरू कर दी है. NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, "हमने उन 111 ज़िलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहाँ कौन-कौन से ज़िले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले ज़िलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी "जी राम जी" कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा".
ICAR ने 315 जिलों में सूखे की आशंका
कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मानसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है. इनमें से 111 ज़िले ऐसे हैं जहाँ सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से कम है, जबकि 76 ज़िलों में 25–50 प्रतिशत तक सिंचाई की व्यवस्था है.
भारत में 1-27 जून तक 43 फीसदी कम हुई बारिश
भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने 1 से 27 जून के बीच बारिश औसत से 43% कम हुई है. आमतौर पर 01 जून से 27 जून के बीच देश में औसतन 141.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की जाती है, लेकिन इस साल जून महीने में 27 तारीख तक सिर्फ 80.4 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई है.

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उत्तर पश्चिम भारत में तो औसत से 27 फीसदी कम बारिश
सेंट्रल इंडिया में 1 जून से 27 जून के बीच औसत से 57% कम बारिश दर्ज की गई है. दूसरी सबसे ज़्यादा बारिश की कमी पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में देखी जा रही है, जहां इन 27 दिनों के दौरान औसत से 44% कम बारिश हुई है. इस दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 30% रही है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी बढ़कर 27% हो गयी है.
इसमें आगे भी कमी की संभावना है. इसकी एक बड़ी वजह मानसून का सामान्य से काफी लेट आगे बढ़ना है. इसका सीधा मतलब है कि खरीफ की फसलों पर प्रभाव पड़ सकता है– खासकर उन क्षेत्रों में, जहां खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है.
जी राम जी कानून के तहत तालाब, जलाशय कराए जा रहे दुरुस्त
इस आशंका को देखते हुए कृषि मंत्री ने इन राज्यों के कृषि मंत्रियों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि प्रभावित होने वाले ज़िलों में तालाब, जलाशय, नाले, खेत‑तालाब और चेक डैम को तत्काल दुरुस्त और मजबूत करने के लिए पहल शुरू किया जाए. इसके लिए 1 जुलाई से लांच होने वाले "जी राम जी" कानून के तहत आवंटित किये गए फंड्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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पीने के पानी की नहीं हो कमी, की जा रही कवायद
NDTV से बातचीत में कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने रविवार को कहा, 'हमने निर्देश दिए हैं कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. जितनी नयी वॉटर बॉडीज बन सकती हैं, बनाईं जाएं... छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं और जल के संरक्षण के जितने भी प्रकार के काम हैं उनको "जी राम जी" कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर पानी कम भी गिरे तो हम बारिश के पानी को संग्रहित कर सकें और इसका उपयोग खेती के लिए और पीने के पानी के लिए भी हम सही उपयोग कर सकें".
संवेदनशील जिलों में पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की तैयारी है, और जरूरत पड़ने पर सरप्लस पानी वाले क्षेत्रों से पानी की किल्लत वाले इलाकों में पानी की सप्लाई के लिए भी निर्देश दिए गए हैं.
इंसान तो इंसान जानवर भी परेशान, चारे का संकट भी गहराएगा
कमजोर मॉनसून से जानवरों के लिए चारे का संकट भी पैदा होने की संभावना है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, इस आशंका को देखते हुए जिन जिलों या राज्यों में चारे की पर्याप्त उपलब्धता है, वहाँ से कमी वाले क्षेत्रों में चारा की सप्लाई की योजना बनाई जा रही है. चारा स्टॉकिंग, वैकल्पिक चारा स्रोत और सप्लाई चेन पहले से प्लान की जा रही है, ताकि पशुपालकों को अचानक दिक्कत न हो.
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