- वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण के लिए पोर्टल पर पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड की समयसीमा पूरी
- उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां हैं, जहां करीब एक लाख से अधिक को आधिकारिक मंजूरी मिली है
- यूपी वक्फ ट्रिब्यूनल ने तकनीकी दिक्कतों के कारण अतिरिक्त समय दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है
वक्फ कानून लागू होने के एक साल पूरे होने पर वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन अभी पूरा नहीं हुआ है. उत्तर प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक वक्फ संपत्तियों में 1 लाख का रजिस्ट्रेशन है. जबकि 31 हजार प्रॉपर्टी रद्द हुए हैं. बिहार में भी उम्मीद पोर्टल पर 12 हजार संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. हालांकि वक्फ की संपत्तियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ अभियान चुनौती बना हुआ है. वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की ओर से शुरू पोर्टल पर पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड करने की समयसीमा अब पूरी हो चुकी है. 6 महीने की मूल अवधि और उसके बाद ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई अतिरिक्त 6 महीने की मोहलत भी समाप्त हो गई है. इसके बावजूद देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और दस्तावेजों का सत्यापन अभी अधूरा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। बोर्ड का कहना है कि कई राज्यों में पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.
यूपी में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां
उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां वक्फ संपत्तियों की संख्या सबसे अधिक है. राज्य में करीब 1. 52 लाख वक्फ प्रतिष्ठान दर्ज हैं जिनमें 1.03 लाख को आधिकारिक मंजूरी मिली.जून 2026 की शुरुआत तक इनमें से 1,31,113 प्रतिष्ठानों के दस्तावेज UMEED पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके थे, जबकि करीब 13,522 प्रतिष्ठानों के दस्तावेज अपलोड नहीं हो सके थे. इसके अलावा 31 हजार संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की कमी के कारण रद्द किए गए. राज्य में तकनीकी दिक्कतों और दस्तावेजों के सत्यापन में देरी को देखते हुए उत्तर प्रदेश वक्फ ट्रिब्यूनल ने पहले 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया था, जिसकी अंतिम तिथि 5 जून 2026 थी। अब यह अवधि भी समाप्त हो चुकी है.
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दिल्ली में वक्फ प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन
दिल्ली की बात करें तो Umeed portel में वफ्फ प्रापर्टी के तहत 629527 संपत्तियां रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल की गईं लेकिन 287695 प्रापर्टी ही वैध पाई गईं. जबकि 38083 को रिजेक्ट कर दिया गया. जून तक 766470 प्रापर्टी रजिस्टर्ड हुईं हैं., जिनमें 543597 मंजूर हुई हैं.
बिहार में कितनी वक्फ संपत्तियां
वक्फ संपत्तियों को UMEED पोर्टल पर दर्ज कराने की समय सीमा आज समाप्त हो गई है। पहले समय सीमा 5 जून ही तय की गई थी लेकिन इसे बाद में 30 जून तक बढ़ा दिया गया था। इस दौरान बिहार से 12 हजार से अधिक संपत्तियों को UMEED पोर्टल पर दर्ज कराया गया है। वक़्फ़ बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 2819 इस्टेट की 6700 संपत्तियां पंजीकृत हुई हैं। वहीं शिया वक्फ बोर्ड की 307 इस्टेट की 5955 संपत्तियां पंजीकृत हुई हैं। बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो बिहार में शत प्रतिशत वक्फ संपत्तियों को UMEED पोर्टल पर दर्ज करा दिया गया है.
वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा
बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अल्हाज मोहम्मद इराशदुल्लाह बताते हैं, हमने सभी संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन कराया है। पहले ही जिला स्तर पर भी इससे संबंधित निर्देश जारी किए गए थे। अब हमारी प्राथमिकता वक्फ संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण को हटाना है। हमारे पास अक्सर वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतें आती हैं। रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा जाती है। इस आधार पर हम नोटिस जारी करते हैं। हमने सभी जिलों से वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण से जुड़ी जानकारी मांगी है.
वक्फ बोर्ड के पास 2 लाख एकड़ जमीन
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में वक्फ बोर्ड के पास करीब 2 लाख एकड़ जमीन है। इनमें पटना में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां हैं। इसके बाद मुजफ्फरपुर और गया में हैं। इन संपत्तियों में सबसे अधिक दुकानें हैं। इसके बाद खाली जमीन और मस्जिद का नंबर आता है। बिहार में वक्फ की 20% संपत्ति पर दुकानें हैं। 16% खाली जमीन है, 15% घर, 14% मस्जिद और 11% कब्रिस्तान के पास है।
समयसीमा बढ़ाने की मांग
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि देशभर में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं. कई संपत्तियों के दस्तावेज दशकों पुराने हैं, जिनका डिजिटलीकरण अभी तक नहीं हो पाया है. ऐसे में पंजीकरण की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए ताकि कोई भी वास्तविक वक्फ संपत्ति रिकॉर्ड से बाहर न रह जाए. हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सामान्य रूप से समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी. अगर किसी मामले में वास्तविक कठिनाई है तो संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष आवेदन किया जा सकता है.
आगे क्या?
समयसीमा समाप्त होने के बाद अब संबंधित वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल ऐसे मामलों पर निर्णय लेंगे, जिनमें दस्तावेज समय पर अपलोड नहीं हो सके हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि UMEED पोर्टल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि विवादों में कमी आए और संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके.अब निगाहें इस बात पर हैं कि समयसीमा समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार या राज्य वक्फ बोर्डों की ओर से कोई नई व्यवस्था या अतिरिक्त राहत दी जाती है या नहीं.
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