- वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण के लिए पोर्टल पर पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड की समयसीमा पूरी
- उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां हैं, जहां करीब एक लाख से अधिक को आधिकारिक मंजूरी मिली है
- यूपी वक्फ ट्रिब्यूनल ने तकनीकी दिक्कतों के कारण अतिरिक्त समय दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है
वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की ओर से शुरू पोर्टल पर पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड करने की समयसीमा अब पूरी हो चुकी है. 6 महीने की मूल अवधि और उसके बाद ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई अतिरिक्त 6 महीने की मोहलत भी समाप्त हो गई है. इसके बावजूद देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और दस्तावेजों का सत्यापन अभी अधूरा है.
इसी बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। बोर्ड का कहना है कि कई राज्यों में पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.
यूपी में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां
उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां वक्फ संपत्तियों की संख्या सबसे अधिक है. राज्य में करीब 1. 52 लाख वक्फ प्रतिष्ठान दर्ज हैं जिनमें 1.03 लाख को आधिकारिक मंजूरी मिली.जून 2026 की शुरुआत तक इनमें से 1,31,113 प्रतिष्ठानों के दस्तावेज UMEED पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके थे, जबकि करीब 13,522 प्रतिष्ठानों के दस्तावेज अपलोड नहीं हो सके थे. इसके अलावा 31 हजार संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की कमी के कारण रद्द किए गए.
राज्य में तकनीकी दिक्कतों और दस्तावेजों के सत्यापन में देरी को देखते हुए उत्तर प्रदेश वक्फ ट्रिब्यूनल ने पहले 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया था, जिसकी अंतिम तिथि 5 जून 2026 थी। अब यह अवधि भी समाप्त हो चुकी है.
दस्तावेज में सुधार करने का आज आखिरी दिन
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा पोर्टल पर नई प्रविष्टियों और दस्तावेजों में सुधार की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जून तय की गई थी. जिन संपत्तियों के दस्तावेज अधूरे रह गए हैं, उन्हें आधिकारिक यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की वेबसाइट के माध्यम से अपडेट करने की सुविधा प्रदान की गई थी.
समयसीमा बढ़ाने की मांग
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि देशभर में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं. कई संपत्तियों के दस्तावेज दशकों पुराने हैं, जिनका डिजिटलीकरण अभी तक नहीं हो पाया है. ऐसे में पंजीकरण की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए ताकि कोई भी वास्तविक वक्फ संपत्ति रिकॉर्ड से बाहर न रह जाए.
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सामान्य रूप से समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी. अगर किसी मामले में वास्तविक कठिनाई है तो संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष आवेदन किया जा सकता है.
आगे क्या?
समयसीमा समाप्त होने के बाद अब संबंधित वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल ऐसे मामलों पर निर्णय लेंगे, जिनमें दस्तावेज समय पर अपलोड नहीं हो सके हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि UMEED पोर्टल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि विवादों में कमी आए और संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके.
अब निगाहें इस बात पर हैं कि समयसीमा समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार या राज्य वक्फ बोर्डों की ओर से कोई नई व्यवस्था या अतिरिक्त राहत दी जाती है या नहीं.
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