मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों की एंट्री हो गई. इंदौर के मनोज मालपानी और गुना जिले के राघौगढ़ के रहने वाले अनिमेष भार्गव को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है. इसी के साथ मध्य प्रदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के कड़े प्रावधानों को लागू करने वाला पूरे देश का पहला राज्य बन गया. इसके बाद से बोर्ड में शामिल दोनों हिंदू चेहरों को लेकर चर्चा शुरू हो गई. मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव लंबे समय से संघ (आरएसएस), भाजपा और आनुषांगकि संगठनों से जुड़े हुए हैं.
पिता पूर्व सीएम दिग्विजय के गहरे मित्र, भार्गव नौकरी छोड़ संघ से जुड़े
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के सदस्यों में शामिल किए गए अनिमेष भार्गव गुना जिले के राघौगढ़ के रहने वाले हैं. राघौगढ़ कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का गृहनगर है.अनिमेष भार्गव के पिता अशोक भार्गव एक बड़े वकील हैं, वे न केवल दिग्विजय सिंह के बेहद करीबी हैं, बल्कि दोनों के बीच गहरी मित्रता है. हालांकि, अशोक भार्गव का कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है. अनिमेष भार्गव शुरू से राष्ट्रवाद, संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े हुए हैं. करीब एक दशक पहले वे एचडीएफसी बैंक के मैनेजर थे. लेकिन, संघ के लिए काम करने की इच्छा ने उन्हें नौकरी नहीं करने दी. बैंक मैनेजर पद से इस्तीफा देने के बाद भार्गव अपनी पत्नी के साथ भोपाल आ गए. इसके बाद से वे भाजपा प्रदेश कार्यालय में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे.

अनिमेष भार्गव गुना जिले के राघौगढ़ के रहने वाले हैं.
चुनाव लड़ना चाहते थे भार्गव, नहीं मिला टिकट
अनिमेष भार्गव ने एमबीए (फाइनेंस) किया है. करीब 18 साल तक उन्होंने फाइनेंस और कॉर्पोरेट सेक्टर में किया. वर्तमान में वे मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट के रूप में भी पार्टी का पक्ष रखते हैं. करीब एक दशक पहले उन्होंने राघौगढ़ नगर पालिका चुनाव में भाजपा से अध्यक्ष पद के टिकट के लिए दावेदारी पेश की थी. हालांकि, तब उन्हें राजनीतिक समीकरणों के चलते टिकट नहीं मिल सका. इसके बाद भी वे पार्टी के लएि लगातार काम करते रहे. अब भाजपा ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी है.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ अनिमेष भार्गव.
अब जानिए कौन हैं मनोज मालपानी?
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के दूसरे हिंदू सदस्य मनोज मालपानी भी संघ से जुड़े हुए हैं. राजनीति से दूर रहने वाले मनोज, पिछले करीब 30 साल से संघ और आनुषांगकि संगठनों से जुड़े हुए हैं. वे हमेशा से संघ को सेवा का माध्यम मानते आए हैं. छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों से जुड़े रहने वाले मनोज मालपानी वक्फ मामलों में भी लंबे समय का अनुभव रखते हैं.
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की 10 सदस्यीय नई टीम
- सनवर पटेल (इंदौर)- अध्यक्ष
- अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना)- सदस्य (गैर-मुस्लिम)
- मनोज मालपानी (इंदौर)- सदस्य (गैर-मुस्लिम)
- डॉ. नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली)- सदस्य
- आतिफ अकील (विधायक, भोपाल उत्तर)- सदस्य
- फैजान खान (उज्जैन)- सदस्य
- फातेमा चौधरी (इंदौर)- सदस्य
- शाइस्ता सुल्तान (पार्षद, बैरसिया, भोपाल)- सदस्य
- शबाना खान (पार्षद, रतलाम)- सदस्य
- आयुक्त (पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग)- पदेन सदस्य
ऐसा करने वाला मप्र देश भर में पहला राज्य
बता दें कि वक्फ अधिनियम- 1995 के पुराने नियमों के तहत बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के सदस्य ही शामिल हो सकते थे. केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025 में किए गए संशोधन के बाद अब प्रत्येक राज्य के वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का होना अनिवार्य किया गया है. इसी नियम के अंतर्गत मध्य प्रदेश शासन ने अनिमेष भार्गव और मनोज मालपानी को बतौर हिंदू सदस्य वक्फ बोर्ड में शामिल किया है. ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश में पहला राज्य है. इंदौर के सनवर पटेल को फिर से बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
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