- विजय की अन्य छोटी पार्टियों जैसे पीएमके, सीपीआई, सीपीएम और वीसीके से समर्थन के संदर्भ में बातचीत चल रही है.
- कम्यूनिस्ट पार्टियों के पास कुल 4 विधायक हैं. उनकी तरफ से समर्थन को लेकर शुक्रवार को मीटिंग होने वाली है.
- वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक PMK ने उप-मुख्यमंत्री और विजय की दूसरी सीट से अपने उम्मीदवार उतारने की शर्त रखी है.
तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें हासिल करने के बावजूद बहुमत के जादुई आंकड़े से 10 कदम दूर रह गए. एक्टर से राजनेता बने विजय के लिए जीत के साथ ही बहुमत जुटाना अब सरकार बनाने के लिए अग्निपरीक्षा जैसा बना हुआ है. यही वजह है कि तमिलनाडु के राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद विजय की पार्टी को सरकार बनाने के लिए अब तक आमंत्रण नहीं दिया है. आखिर क्या कारण है कि केवल 10 और विधायक विजय नहीं जुटा पा रहे हैं? और जादुई अंक तक पहुंचने के लिए विजय क्या कर रहे हैं?
तमिलनाडु में चुनाव के नतीजे आने के बाद से राजनीति अपने चरम पर है. विजय ने अपने जीते हुए दो विधानसभा सीटों में से एक से इस्तीफा दे दिया है. ऐसे में विजय के विधायकों की कुल संख्या अब 107 रह गई है. चुनाव में जीत के बाद विजय पहले बुधवार (6 मई) को और फिर गुरुवार (7 मई) की सुबह दूसरी बार राज्यपाल से मिले.
दो दिनों में यह विजय की राज्यपाल से दूसरी मुलाकात हुई. इसके बावजूद तमिलनाडु में सरकार के गठन पर अनिश्चितता बनी हुई है. माना जाता है कि विजय को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 118 विधायकों के समर्थन का पत्र लाकर दिखाने का सुझाव दिया है.
हालांकि न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक विजय ने राज्यपाल को आश्वासन दिया है कि वो सदन में अपना बहुमत साबित कर देंगे.

कांग्रेस ने दिया समर्थन, जादुई अंक से अब भी पांच की दूरी
इधर, विजय को कांग्रेस पार्टी ने अपना समर्थन दे दिया है. कांग्रेस के तमिनलाडु में पांच विधायक हैं. ऐसे में विजय को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या 112 पर पहुंच गई है. यानी फिलहाल उन्हें 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने के लिए छह और विधायक जुटाने हैं. यहां अन्य छोटी पार्टियों की निर्णायक भूमिका बन जाती है.
विजय की अन्य छोटी पार्टियों जैसे पीएमके, सीपीआई, सीपीएम और वीसीके से इस संदर्भ में बातचीत भी चल रही है. लेकिन उनकी ओर से समर्थन का आश्वासन अभी पक्के तौर पर नहीं दिया गया है.
शुरुआती खबरें थीं कि AIADMK गठबंधन टीवीके को अपना समर्थन देगी पर उसने भी स्पष्ट कर दिया है कि वो विजय की पार्टी का समर्थन नहीं करेगी.
इधर टीवीके के नेता वीएस बाबू से जब संवाददाताओं ने यह पूछा कि क्या केंद्र की ओर से राज्यपाल पर दबाव है कि वो टीवीके को शपथग्रहण के लिए न बुलाएं तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है इसलिए इस पर वो कोई कमेंट नहीं करेंगे.
बता दें कि तमिलनाडु में विजय की पार्टी के पास 107 विधायक, डीएमके के पास 59, एआईएडीएमके के पास 47, कांग्रेस के पास 5, पीएमके के पास 4, मुस्लिम लीग के पास 2, सीपीआई 2, वीसीके 2, सीपीएएम 2, बीजेपी 1, डीएमडीके 1 और अम्मा मक्कल मुनेत्र कजगम के पास 1 सीटें हैं.

विजय को मिल रहा खुला समर्थन, पर अंतिम निर्णय अभी बाकी
दो विधायकों वाले विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) के प्रमुख टी तिरुमावलवन ने गुरुवार को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की और उनसे अनुरोध किया कि वे तमिलगा वेट्री कजगम के प्रमुख विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें और उन्हें सदन के पटल पर अपना बहुमत साबित करने का अवसर दें.
क्षेत्रीय मीडिया से बात करते हुए, VCK प्रमुख ने यह आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य की राजनीति में हस्तक्षेप कर रही है और भ्रम पैदा कर रही है. तिरुमावलवन ने कहा कि विजय से समर्थन मांगने वाला पत्र मिलने के बाद उनकी पार्टी जल्द ही अपना रुख तय करेगी.
वीसीके प्रमुख ने इसके बाद कहा कि विजय समर्थन इसलिए मांग रहे हैं क्योंकि वे राज्य में सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरे हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास पूर्ण बहुमत है या नहीं, यह केवल विधानसभा में ही साबित किया जाना चाहिए. उन्हें वहां इसे साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए.
कम्यूनिस्ट पार्टियों ने विजय की पार्टी को लेकर क्या कहा?
दोनों कम्यूनिस्ट पार्टियों के पास कुल 4 विधायक हैं. उनकी तरफ से भी विजय का शुरुआती समर्थन दिख रहा है.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की तमिलनाडु इकाई ने राज्यपाल से संविधान के अनुसार काम करने का आग्रह किया है, पर साथ ही यह भी कहा है कि विजय से शपथ ग्रहण से पहले अपना बहुमत साबित करने के लिए कहना अनुचित है.
सीपीआई ने अपने बयान में कहा कि, "23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, मतदाताओं ने कोई स्पष्ट जनादेश तो नहीं दिया जिससे किसी एक पार्टी की सरकार बन सके. पर मतदाताओं ने तमिलगा वेट्री कझगम को 108 सीटें दी हैं, जिससे यह विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. इसी आधार पर, टीवीके नेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया."
सीपीआई ने कहा, "ऐसे में राज्यपाल का यह जोर देना उचित नहीं है कि टीवीके शपथ से पहले अपना बहुमत साबित करे. सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, संविधान के अनुसार, राज्यपाल को टीवीके को विधानसभा के पटल पर अपना बहुमत साबित करने का अवसर देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में, जिनमें एसआर बोम्मई मामला भी शामिल है, इसी सिद्धांत की पुष्टि की है. इन बातों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की तमिलनाडु राज्य कार्यकारिणी समिति तमिलनाडु के राज्यपाल से अपील है कि वे टीवीके को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का अवसर दें और इस तरह से काम करें जिससे संविधान की भावना और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का सम्मान हो."
इस बीच, सीपीएम नेता पी शनमुगम ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी को तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के प्रमुख विजय से एक पत्र मिला है, जिस पर पार्टी की राज्य समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी.
उन्होंने कहा, "टीवीके प्रमुख ने हमारी पार्टी को एक पत्र भेजा है. हमारी राज्य समिति की बैठक कल सुबह होगी जहां हम फैसला लेंगे."
बता दें कि राज्य में सीपीआई और सीपीएम को दो-दो सीटें हासिल हैं. ऐसे में बहुत संभव है कि शुक्रवार तक दोनों दल ये फैसला ले लें कि उन्हें विजय को समर्थन करना है या नहीं.

पीएम मोदी के साथ एस रामदौस
Photo Credit: PTI
पीएमके ने रखीं दो शर्तें- मीडिया रिपोर्ट
इसके अलावा विजय की पार्टी की तरफ से अन्य छोटे दलों को भी पत्र गया है. पत्ताली मक्कल काची के पास चार विधायक हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि विजय की पार्टी पीएमके के साथ भी बातचीत कर रही है.
हालांकि यह भी खबरों में है कि पीएमके के संस्थापक और प्रमुख एस रामदौस ने टीवीके सरकार में शामिल होने के लिए शर्तें रखी हैं. उन्होंने धर्मापुरी से विधायक बनीं अपनी पत्नी सौम्या अंबुमणि के लिए उप-मुख्यमंत्री के पद की मांग की है.
इतना ही नहीं, ये भी खबरों में है कि पीएमके ने उस सीट की मांग भी कर दी है जिससे विजय ने इस्तीफा दिया है. हालांकि पीएमके को लेकर खींचतान चल रही है और मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से यह भी लिखा गया है कि बीजेपी नेतृत्व ने एस रामादौस को केंद्र में एक मंत्रिमंडलीय सदस्य का ऑफर दिया है ताकि वो एआईएडीएमके गठबंधन से अलग न हों और विजय की पार्टी को समर्थन न दें.
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