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हिमालय में कुदरत का ये कैसा संकेत! ॐ पर्वत से 'ॐ' ही हो गया गायब

उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने 16 जनवरी तक राज्य में बारिश के न होने की संभावना जताई है. हालांकि मौसम विज्ञान केंद्र ने 17 और 18 जनवरी को उत्तराखंड के उत्तरकाशी चमोली पिथौरागढ़ में हल्की बारिश संभावना जताई है.

हिमालय में कुदरत का ये कैसा संकेत! ॐ पर्वत से 'ॐ' ही हो गया गायब
उत्तराखंड के कई बर्फबारी के इंतजार में सूने पड़े हैं
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  • उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस बार बर्फबारी और बारिश बहुत कम होने के कारण पहाड़ खाली दिख रहे हैं
  • कम बर्फबारी के चलते कृषि क्षेत्र में 15 से 20 प्रतिशत तक फसलों की पैदावार में गिरावट होने की संभावना है
  • बारिश और बर्फबारी न होने से जंगलों में आग लगने, पानी की कमी और ग्लेशियरों की सेहत खराब होने का खतरा बढ़ गया है
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देहरादून:

साल की शुरुआत में एक समय पर जहां उत्तराखंड के ज्यादातर पहाड़ बर्फबारी से ढके होते थे, वहीं इस बार बर्फबारी तो दूर ज्यादातर इलाकों में बारिश तक नहीं हुई है. नतीजा ये हुआ कि बर्फबारी के अद्भुत दृश्यों से पटे रहने वाले पहाड़ आज खाली और विरान पड़े हैं. उत्तराखंड के ॐ पर्वत, पंचाचुली और कैलाश पर्वत इन दिनों बगैर बर्फबारी या यूं कहें बेहद कम बर्फबारी के कारण खाली दिख रहे हैं. इन इलाकों में पिछले साल नवंबर और दिसंबर बर्फबारी हुई थी लेकिन वो इतनी कम थी कि उससे पूरा पहाड़ भी बर्फ की सफेद चादर से नहीं ढक सका था. जानकारों की मानें तो इस साल इलाके में कम बर्फबारी और बारिश का असर यहां होने वाली फसलों पर पड़ना तय माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि इस बार इसकी वजह से पैदावार में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. 

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ये तस्वीर पिछले साल नवंबर-दिसंबर की है, इस समय भी बर्फबारी कम ही हुई थी. 

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्र खासकर जो समुद्रतल से 3000 मीटर से भी ज्यादा ऊपर हैं, वहां इस बार बेहद कम बर्फबारी हुई है. 29 दिसम्बर 2025 की तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि आदिकैलाश और ॐ पर्वत में बर्फ ना के बराबर दिख रहा है. 10 जनवरी को कुछ पर्यटक पिथौरागढ़ जिले के ही पंचाचुली आदि कैलाश क्षेत्र में घूमने गए थे. पर्यटकों ने पाया कि आदि कैलाश पंचाचुली और उतनी ऊंचाई पर मौजूद ऊँ पर्वत में इस बार बर्फ नहीं है. हालांकि पंचाचुली क्षेत्र में जाने वाले रास्तों में पानी पूरी तरह से जम चुका है. यहां आने जाने वाहनों को भी खासी दिक्कतें हो रही हैं. 

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कम बर्फबारी के कारण पूरी पहाड़ी भी नहीं ढक पाई थी.  

उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश नहीं होने से व्यापक तौर पर कृषि पर्यटन पर इसका सीधा असर पड़ा है. अगर आने वाले एक-दो महीने में बारिश और बर्फबारी नहीं होती है तो इसका खामियाजा पहाड़ों को चुकाना पड़ सकता है. माना जा रहा है कि इस बार कम बारिश और बर्फबारी के कारण जहां एक तरफ आने वाले समय में जंगलों की आग भड़क सकती है, वहीं दूसरा पानी की कमी भी हो सकती है.  साथ ही ग्लेशियर की सेहत भी खराब होने की पूरी संभावना बनी हुई है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि 12 जनवरी हो चुकी है और अभी तक उत्तराखंड के 13 जिलों में बारिश नहीं हुई है. सामान्य तौर पर अब तक 13.2. बारिश हो जाती थी लेकिन अब तक सबको बारिश का इंतजार है. 

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उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने 16 जनवरी तक राज्य में बारिश के न होने की संभावना जताई है. हालांकि मौसम विज्ञान केंद्र ने 17 और 18 जनवरी को उत्तराखंड के उत्तरकाशी चमोली पिथौरागढ़ में हल्की बारिश संभावना जताई है, तो वहीं 3400 मीटर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी की भी संभावना जताई गई है. इसके अलावा राज्य के अन्य 10 जिलों में मौसम शुष्क रहेगा पहाड़ी क्षेत्रों में पाला तो मैदानी क्षेत्रों में कोहरा रह सकता है.

बारिश और बर्फबारी ना होने से उत्तराखंड में कृषि क्षेत्र को भी नुकसान 

उत्तराखंड कृषि निदेशक दिनेश कुमार ने एनडीटीवी से बातचीत में जानकारी दिखाई राज्य में बारिश और बर्फबारी नहीं होने से कृषि और बागवानी की फसल पर असर पड़ा है जिसमें 15 से 20% तक कई जगह पर गेहूं, मटर,मसूर ,सरसों, चना, जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है कृषि निदेशक दिनेश कुमार ने जानकारी दी की अभी 10 जिलों की रिपोर्ट मिल चुकी है जिसमें फसलों को कोई नुकसान की जानकारी मिली है. कृषि विभाग के आंकड़े देखे तो उत्तरकाशी में 15 से 20%, चमोली में 10 से 15%, अल्मोड़ा में 5 से 10% ,पिथौरागढ़ में 8 से 10%, बागेश्वर में 10 से 15%, चंपावत में 10 से 15% ,देहरादून में 15 से 20%, रुद्रप्रयाग में 5 से 10%, नैनीताल में 5 से 15%, टिहरी में 15 से 20% ,फसलों को नुकसान हुआ है. वहीं, चकराता में गेहूं और मटर की फसल को 15 से 20% नुकसान हुआ कालसी में गेहूं और मटर को 15 से 20% रायपुर के पर्वतीय क्षेत्र में 5 से 10% फसल को नुकसान हुआ है भटवाड़ी में गेहूं की फसल 25% नुकसान हुआ है डुंडा में गेहूं की फसल 25% चिन्यालीसौड़ में 15% तक, नौगांव में 20% पुरोला में 15% और मोरी क्षेत्र में गेहूं और मसूर की फसल को 10% नुकसान हुआ है. 

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