- गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत मेरठ के बिजौली गांव से होकर 594 किलोमीटर लंबी यात्रा प्रयागराज पर समाप्त होगी
- यह एक्सप्रेसवे 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है
- निर्माण में लगभग 37 हजार करोड़ रुपए की लागत आई है और इसे 1593 दिन में पूरा किया गया
Ganga Expressway News Today: उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे अब लगभग तैयार हो चुका है.29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदोई में इसका शुभारंभ करेंगे.गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत मेरठ के बिजौली गांव से होगी और 594 किमी की यात्रा तय कर प्रयागराज पर जाकर खत्म होगी.इस एक्सप्रेसवे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इस पर चलने वाले वाहन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकते हैं.एक्सप्रेसवे को बनाने में करीब 37 हजार करोड़ रुपए की लागत आई है.18 दिसंबर 2021 में शाहजहांपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एक्सप्रेस वे की आधारशिला रखी थी.अब करीब 1593 दिन के रिकार्ड वक्त में ये बनकर तैयार हो रहा है.
12 जिले और 519 गांव के तरक्की का रास्ता
अगर आप दिल्ली से चलते हैं तो गंगा एक्सप्रेसवे पर जाने के लिए दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पकड़ना होगा. हापुड़ के परतापुर से करीब 80 KM तय करने के बाद आपको खरखौंदा के बिजौली गांव से गंगा एक्सप्रेस से शुरुआत करनी पड़ेगी.इसके बाद हापुड़ का गढमुक्तेश्वर पड़ेगा, जहां से आप एक्सप्रेसवे पर चढ़ या उतर सकते हैं,फिर बुलंद शहर स्याना होते हुए अमरोहा गजरौला आएगा.संभल के बहजोई,बंदायू का दातागंज, फिर शाहजहांपुर,हरदोई जिले का बिलग्राम,उन्नाव का बंगरामऊ, रायबरेली का ऊंचाहार, लालगंज,प्रतापगढ़ का कुंडा और बाबागंज होते हुए प्रयागराज के सोरांव में उतर सकते हैं.अभी दिल्ली से प्रयागराज पहुंचने में करीब 12-13 घंटे लगते हैं, जो अब घटकर महज 6-7 घंटे ही रह जाएगा.

गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ी से लेकर जहाज तक चल सकेंगे
औद्योगिक विकास के लिहाज से अहम
गंगा एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.राज्य सरकार की योजना बदायूं, हरदोई और उन्नाव जैसे जिलों में बड़े इंडस्ट्रियल हब बनाने की है, जो स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देंगे.एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउस विकसित किए जा रहे हैं. इससे कृषि, वाणिज्य और पर्यटन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
594 km में लगेंगे 18 लाख पौधे
एक्सप्रेसवे के किनारे करीब 18 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा इसमें इंटरचेंज, ओवरपास और अंडरपास की व्यापक व्यवस्था है ताकि स्थानीय यातायात को कोई असुविधा न हो.
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