उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. राजनीतिक दलों ने इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी है. पेपर लीक और युवाओं जुलाई में हुए युवाओं के प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. इसे युवाओं की जीत माना गया था. इस प्रदर्शन के बाद हर राजनीतिक दल की कोशिश युवाओं को लुभाने की है. राजनीतिक दल युवाओं को ध्यान में रखकर अपनी प्रचार की रणनीति बना रहे हैं, युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने पर काम कर रहे हैं और युवाओं को ध्यान में रखकर चुनावी घोषणाएं कर रहे हैं. आइए देखते हैं कि उत्तर प्रदेश में किस राजनीतिक दल ने युवाओं के लिए क्या घोषणा की है.
युवाओं के लिए बीजेपी के पिटारे में क्या है
सबसे पहले बात करते हैं प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों युवाओं के साथ दिखने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं. वो युवाओं के साथ सेल्फी लेते भी देखे जा रहे हैं. योगी सरकार ने अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी का नियुक्ति पत्र देने की घोषणा की है. सरकार ने घोषणा की है कि अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले पांच सौ खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे. सरकार इस बात को जोर-शोर से बता रही है कि सत्ता में आने के बाद से अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को नौकरी दी गई है. योगी सरकार विधानसभा चुनाव में जाने से पहले शिक्षकों की भर्ती भी लेकर आ सकती है.
नौजवानों के लिए नौकरी का खजाना निकलने वाला है... pic.twitter.com/2G0r8F0RYL
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 29, 2026
योगी सरकार युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रही है. सरकार युवाओं के लिए सीएम उद्यमी योजना चला रही है. सरकार न्याय पंचायत स्तर पर युवाओं को डिजिटल इंटरप्रेन्योर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है.इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने 'स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना' के तहत युवाओं को 25 लाख टैबलेट मुफ्त में बांटने की योजना को मंजूरी दी है.यह योजना 24 हजार करोड़ रुपये की है. ये टैबलेट ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, टेक्निकल एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले छात्रों को वितरित किए जाएंगे.
क्या सरकार बनने पर छात्रों को फिर लैपटॉप देगी सपा
समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की सत्ता से 2017 से बाहर है. वह एक बार फिर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जो लगा रही है. यही वजह है कि सपा ने जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन को हर तरह से समर्थन दिया. सपा के युवा सांसद छात्रों के बीच भी गए. संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों पर पुलिस ने जब लाठीचार्ज किया तो सपा सांसद डिंपल यादव घायल छात्रों की मदद करते हुए नजर आई थीं. इस मुद्दे को सपा ने संसद के अंदर और बाहर जोर-शोर से उठाया था. अखिलेश यादव जब प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो उनकी सरकार ने 12वीं पास युवाओं को बड़ी संख्या में टैपटॉप बांटे थे. सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सोमवार को जब यह पूछा गया कि सरकार बनने पर युवाओं को लैपटॉप मिलेगा या आईपैड. इस सवाल पर उन्होंने कोई सीधा जवाब तो नहीं दिया. लेकिन कहा कि बच्चों से पूछंगा कि उन्हें क्या चाहिए लैपटॉप या आईपैड. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि पढ़ने वाले बच्चों को लैपटॉप की जरूरत अधिक होती है. उन्होंने कहा कि जो भी पढ़ाई को टेक्नोलॉजी से जोड़ेगा, वह फैसला समाजवादी सरकार लेगी.इसके अलावा सपा सरकार ने हर तहसील में कॉलेज और लड़कियों के लिए हॉस्टल खोलने की भी घोषणा की है.
इसके साथ ही सपा युवाओं में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए पारंपरिक उपायों को छोड़कर नई तरकीब अपना रही है. वह केवल रैलियों और जनसभाओं की जगह उसने युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म पर अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बनाई है. इसके लिए पार्टी ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और इनफ्लुएंसर्स के साथ बैठक भी की है. वह बेरोजगारी, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे उठा रही है, क्योंकि इनका संबंध युवाओं से है.

अपने मिलेनियल्स नेता के भरोसे है बसपा
उत्तर प्रदेश में चार बार अपनी सरकार बना चुकी बहुजन समाज पार्टी ने युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया था. बसपा अपनी डिजिटल मौजूदगी बढ़ा रही है. वह अपनी बूथ कमेटियों में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भी जिम्मेदारी दे रही है. बसपा प्रमुख मायावती के 31 साल के भतीजे आकाश आनंद पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर हैं. वह जेन-जेड तो नहीं लेकिन मिलेनियल्स हैं. उत्तर प्रदेश के मिशन-2027 की जिम्मेदारी उन्हें ही सौंपी गई है. आकाश आनंद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अंकल बताकर अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की. इस तरह से उन्होंने जेन-जेड को साधने की कोशिश की. उनका फोकस दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को बसपा से जोड़ने पर हैं.
नगीना की सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी दलित युवाओं के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय है.चंद्रशेखर ने पेपर लीक के खिलाफ युवाओं को आंदोलन का भरपूर समर्थन किया और छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में संसद परिसर में कई दिन तक बारिश में भीगते हुए धरना भी दिया. वह सामाजिक न्याय के साथ-साथ रोजगार और शिक्षा के मुद्दों को लगातार उठाते रहते हैं.
क्या जेन-जेड और जेन अल्फा सुनेगी कांग्रेस की छात्रों की गूंज
कांग्रेस युवाओं के मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय है. पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ कांग्रेस ने देशव्यापी धरना-प्रदर्शन किया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तो प्रधानमंत्री आवास के पास सड़क पर बैठकर धरना भी दिया. कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों को धार देने और उनमें अपनी पैठ बढ़ाने के लिए 'छात्रों की गूंज' नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया. इसका आयोजना उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था. कांग्रेस की कोशिश है कि युवाओं को जाति-धर्म से ऊपर उठकर रोजगार, शिक्षा और उनके भविष्य के मुद्दों पर एकजुट करना है.हालांकि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए अभी कोई वादा नहीं किया है. कांग्रेस ने 2022 के चुनाव में युवाओं के लिए एक अलग घोषणा पत्र जारी किया था. इसमें 20 लाख सरकारी नौकरियां देने और परीक्षा की तारीख, रिजल्ट जारी करने की तारीख और नियुक्ति की तारीख वाला जॉब कैलेंडर बनाने का वादा किया था.
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