"आज वो सत्ता में हैं तो वो तमाम तरह की पाबंदियां लगा रहे हैं": शब्दों पर रोक से BJP पर भड़के संजय सिंह

संजय सिंह ने सवाल उठाया कि शब्दों को रोकने का अर्थ क्या है? उन्होंने कहा कि गाली गलौच की भाषा नहीं बोल सकता है, इसे समझा जा सकता है. लेकिन अगर कोई तल्ख टिप्पणी हो गई तो उस पर भी रोक लगा रहे हैं तो संसद की परंपराओं का कोई मतलब नहीं रहेगा.

नई दिल्ली :

विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में धरना प्रदर्शन, अनशन या पूजा पाठ पर रोक लगाने के फैसले का तीखा विरोध किया है. दरअसल, कल जारी संसदीय बुलेटिन में कहा गया है कि सांसद संसद भवन परिसर को किसी धरने, प्रदर्शन, अनशन या पूजा पाठ के लिए प्रयोग में नहीं ला सकते. वहीं इस पूरे मामले पर आम आदमी के नेता और सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. संजय सिंह ने कहा कि जब कंप्यूटरीकरण के खिलाफ स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी सांसद थे और विपक्ष के नेता थे. उन्होंने बैलगाड़ी के जरिये अपना विरोध प्रदर्शन किया था. संजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि आज वो सत्ता में हैं तो तमाम तरह की पाबंदियां लगा रहे हैं. 

उन्होंने कहा, "एक सरकार अहंकार से चलेगी, लेकिन आप उसे अहंकारी नहीं बोल सकते हैं. एक सरकार संवेदनहीनता से चलेगी, लेकिन आप उसे संवेदनहीन नहीं बोल सकते हैं. एक सरकार का आचरण तानाशाहीपूर्ण होगा लेकिन आप उसे तानाशाह नहीं बोल सकते हैं. एक सरकार असत्य और झूठ की बुनियाद पर काम करेगी तो आप असत्य और झूठ जैसे शब्द नहीं बोल सकते हैं. तो हम अपनी बात कैसे कहेंगे."

हालांकि उन्होंने कहा कि हमने कुछ तरीके निकाले हैं. उन्होंने कहा कि तानाशाही की जगह मोदीशाही कहेंगे, कोयला चोर नहीं कह सकते हैं. उन्होंने कहा कि कोयला चोरी करना गलत नहीं है, लेकिन कोयला चोर कहना गलत है. 

सिंह ने कहा कि आप क्या ये कहना चाहते हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिन्होंने अपने अहिंसात्मक लोकतांत्रिक तरीकों से देश को आजाद कराया, उनका तरीका भी गलत था. क्या ये कहना चाहते हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पदचिह्नों पर चलना भी अपराध है. उनका तरीका बिलकुल अहिंसात्मक था.

संजय सिंह ने सवाल उठाया कि शब्दों को रोकने का अर्थ क्या है? इसे क्या सोचकर बनाया गया है? उन्होंने कहा कि गाली गलौच की भाषा नहीं बोल सकता है, इसे समझा जा सकता है. लेकिन अगर अपनी बात कहने में कोई तल्ख टिप्पणी हो गई तो उस पर भी आप रोक लगा रहे हैं तो फिर संसद की परंपराओं का कोई मतलब ही नहीं रहेगा. उन्होंने देश के कई बड़े नेताओं का नाम लिया और कहा कि उनके भाषणों को उठाकर देख लीजिए, अगर उन्होंने कभी वे शब्द न बोलें हों तो आप उन पर रोक लगाइए. 

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