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पश्चिम एशिया के हालात पर केंद्रीय मंत्रियों की बड़ी बैठक, हॉर्मुज खुलने पर गैस और तेल की आपूर्ति को लेकर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने सचिवों से कहा कि वे योजनाओं का लोगों के जीवन पर पड़ने वाले ठोस प्रभाव पर ध्यान दें. पीएम ने भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

पश्चिम एशिया के हालात पर केंद्रीय मंत्रियों की बड़ी बैठक, हॉर्मुज खुलने पर गैस और तेल की आपूर्ति को लेकर हुई चर्चा
  • वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में हॉर्मुज खुलने के बाद गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति पर चर्चा हुई
  • कॉमर्शियल गैस सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल और छोटे सिलेंडर के दामों में हाल ही में कटौती की गई है
  • पीएम मोदी ने इससे पहले सरकारी सचिवों से कारोबार को आसान बनाने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के विषय पर बातचीत की
नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया के हालात को लेकर बुधवार को वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों की बैठक हुई. इसमें हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की गई. हॉर्मुज खुलने के बाद गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति के हालात तथा प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की स्थिति पर मंथन हुआ. बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रहलाद जोशी शामिल थे.

बुधवार को ही कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में कटौती की गई है. एक निजी तेल कंपनी ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती की है. छोटू सिलेंडर के दाम भी घटाए गए हैं. ऐसे में आने वाले समय में और क्या कदम उठाए जा सकते हैं, बैठक में इस पर चर्चा की गई.

प्रधानमंत्री ने की सरकारी सचिवों से बात

इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकारी सचिवों से बातचीत की थी और व्यापार को आसान बनाने एवं लोगों के जीवन-यापन में सुगमता के लिए नियमों में ढील देने तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर चर्चा की थी. अधिकारियों ने बताया कि बातचीत के दौरान, सचिवों ने पीएम को दो मुख्य विषयों के अनुरूप अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए जा रहे अहम कदमों की जानकारी दी.

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उन्होंने बताया कि चर्चा दो मुख्य विषयों पर केंद्रित थी - पहला, 'कारोबार को आसान बनाने के लिए नियमों में ढील देना और अन्य सुधार' तथा दूसरा, 'आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना'.

सचिवों ने प्रधानमंत्री की दृष्टि को ठोस नतीजों में तब्दील करने के लिए की जा रही कोशिशों को रेखांकित किया. उन्होंने क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों पर चर्चा की और शासन व सेवा प्रदान करने को बेहतर बनाने के लिए भविष्य की रणनीतियों की रूपरेखा भी साझा की.

मोदी ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय का दृष्टिकोण अपनाने तथा विभागीय रूढ़ियों को तोड़ने पर जोर दिया. उन्होंने समेकित नियोजन और समन्वय के महत्व पर जोर देते हुए, विभागों के बीच तालमेल और सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने के लिए 'पीएम गतिशक्ति' को एक असरदार प्लेटफॉर्म के तौर पर अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया.
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प्रधानमंत्री मोदी ने सचिवों से कहा कि वे योजनाओं का लोगों के जीवन पर पड़ने वाले ठोस प्रभाव पर ध्यान दें. सूत्रों के मुताबिक, सचिवों ने अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज और अलग-अलग सुधारों व लोगों के हित में उठाए गए अन्य कदमों में हुई प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए प्रजेंटेशन दीं.

पीएम ने भारत को 2047 तक एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जब देश अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा. केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक के लगभग एक महीने बाद सचिवों की ये बैठक हुई थी. मंत्रिपरिषद की बैठक में मोदी ने कहा था कि सरकार को जीवन-यापन को सुगम करने, कारोबार को आसान बनाने और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए.

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