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देश के मिडिल क्लास और छोटे व्यापारियों को भी मिले बजट में राहत... CTI के चेयरमैन ने क्यों कहा ऐसा, पढ़ें

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल केंद्र सरकार को व्यापारियों और उद्यमियों के लिए ट्रेड एंड इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड का गठन करना चाहिए. इनकम टैक्स का नाम बदलकर राष्ट्र निर्माण सहयोग निधि रखा जाए जिससे कि लोगों में ज्यादा से ज्यादा टैक्स देने की भावना जागृत हो.

देश के मिडिल क्लास और छोटे व्यापारियों को भी मिले बजट में राहत... CTI के चेयरमैन ने क्यों कहा ऐसा, पढ़ें
आम बजट से CTI चेयरमैन को है काफी उम्मीद
NDTV

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी एक फरवरी को देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं. इस बजट से मध्यवर्ग से लेकर तमाम उद्योगों को बड़ी उम्मीदें हैं. जानकारों को मानना है कि आगामी  बजट आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित हो सकता है. आगामी बजट को लेकर NDTV ने चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल से खास बातचीत की. इस बातचीत के दौरान बृजेश गोयल ने कहा कि देश के 7 करोड़ MSME  व्यापारियों की नजर आम बजट पर टिकी हुई हैं. मुझे लगता है कि आगामी बजट में घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को चाहिए कि वो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रोत्साहित करे.

बृजेश गोयल ने आगे कहा कि केंद्र सरकार को आगामी बजट में दिल्ली के बजारों और औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए 1000 करोड़ का ऐलान करना चाहिए. सरकार को चाहिए कि वो बजट में इनकम टैक्स का नाम बदलकर राष्ट्र निर्माण सहयोग निधि कर दे. हमने अपने सुझावों को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भी लिखा है. 

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने वित्त मंत्री को लिखे अपने  पत्र में कहा है कि आगामी बजट आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित होना चाहिए.घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाना चाहिए. अमेरिकी टैरिफ और जियोपॉलिटिकल टकरावों से बने हालात के बीच लगभग 7 करोड़ इकाइयों वाले MSME सेक्टर को सस्ती ब्याज दरों पर लोन की व्यवस्था की जाए.  इसके साथ ही MSME को आधुनिक और इको फ्रेंडली टेक्नोलॉजी अपनाने में आसानी हो इसके लिए क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम से जुड़ी इन्वेस्टमेंट की सीमा 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए करनी चाहिए क्योंकि टेक्नोलॉजी की कॉस्ट बढ़ चुकी है.

इसके अलावा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत शिशु कैटेगरी में 50 हजार रुपए तक, किशोर कैटेगरी में 50 हजार रुपए से 5 लाख रुपए तक, तरूण कैटेगरी में 5 लाख रुपए से 10 लाख रुपए से और तरूण प्लस कैटेगरी में 10 लाख रुपए से 20 लाख रुपए तक का लोन दिया जाता है. ये लोन मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग एवं व्यापार, सर्विस सेक्टर आदि से जुड़ी गतिविधियों के लिए दिए जाते हैं. साथ ही सीटीआई की मांग है कि PM मुद्रा योजना में लोन की सीमा बढ़ानी चाहिए. इनकम टैक्स के लिए अनिवार्य ऑडिट लिमिट की सीमा 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए की जानी  चाहिए.

इसके साथ ही वृद्ध टैक्सपेयर को उनके टैक्स के आधार पर  ओल्ड ऐज बेनीफिट मिलना चाहिए,  टैक्सपेयर की वृद्धावस्था में पिछले सालों में दिये गये इनकम टैक्स के हिसाब से उसे पेंशन,  सोशल सिक्योरिटी और रिटायरमेंट बेनिफिट दिये जाएं.कार्पोरेट्स एवं बड़ी कंपनियों को बैंक लोन सस्ती ब्याज दर से मिल जाता है, लेकिन मीडिल क्लास और छोटे व्यापारियों के लिए केन्द्र सरकार की जो मुद्रा योजना है. उसमें उनको कहीं ज्यादा ब्याज देना पड़ता है, इसलिए हमारी मांग है कि मिडिल क्लास को सस्ती ब्याज दरों पर लोन मिलना चाहिए.जीएसटी की नयी  एमनेस्टी स्कीम का लाभ उन व्यापारियों को भी मिलना चाहिए जो पहले ही टैक्स,ब्याज और पैनल्टी जमा करा चुके हैं.

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केन्द्र सरकार को व्यापारियों और उद्यमियों के लिए ट्रेड एंड इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड का गठन करना चाहिए. इनकम टैक्स का नाम बदलकर राष्ट्र निर्माण सहयोग निधि रखा जाए जिससे कि लोगों में ज्यादा से ज्यादा टैक्स देने की भावना जागृत हो.दिल्ली के बाजारों और औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए अलग से 1000 करोड़ रुपए के फंड की घोषणा करे केन्द्र सरकार. साथ ही वन नेशन –वन लाइसेंस –वन रजिस्ट्रेशन की अवधारणा को लागू करने, सभी व्यापारिक लाइसेंसों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जारी करने के साथ साथ ऑटो-रिन्यूअल की व्यवस्था की जाए.व्यापारियों और उनके कर्मचारियों के लिए नेशनल ट्रेडर्स स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया जाना चाहिए, जिसमें डिजिटल स्किल्स, अकाउंटिंग, साइबर सिक्योरिटी और कस्टमर मैनेजमेंट शामिल हों.

पेट्रोल डीजल की कीमतों में 6 अप्रैल 2022 के बाद से कमी नहीं की गई है जबकि कच्चे तेल की कीमतों में 35 - 40% की गिरावट आई है , केन्द्र सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाकर या पेट्रोलियम कंपनियों पर दवाब बनाकर पेट्रोल डीजल की दरों में कटौती करनी चाहिए.केन्द्रीय स्तर और राज्यों के स्तर पर ज्यादा टैक्स देने वाले व्यापारियों को सरकार की ओर से पुरस्कृत और सम्मानित किया जाना चाहिए.

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