- वित्त मंत्री ने लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया है जो देश की आर्थिक स्थिति का ब्योरा देता है.
- चालू वित्त वर्ष में देश की GDP ग्रोथ 7.4 % जबकि अगले वर्ष यह 6.8 से 7.2 % के बीच रहने की संभावना है
- आर्थिक सर्वेक्षण में महंगाई नियंत्रण और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है ताकि आम जनता पर दबाव कम हो सके.
बजट 2026 से पहले आज का सबसे बड़ा अपडेट आ गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार, 29 जनवरी को संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' (Economic Survey) पेश कर दिया है. यह सरकार का वह आधिकारिक दस्तावेज है जो बताता है कि पिछले एक साल में देश ने कितनी कमाई की, कहां खर्च किया और आने वाले समय के लिए हमारी तैयारी क्या है. यह रिपोर्ट कार्ड मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किया गया है
सरकार का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष (FY27) में भारत की विकास दर (GDP) 6.8% से 7.2% के बीच रहेगी.
चालू वित्त वर्ष में 7.4% की रफ्तार से बढ़ेगी देश की इकोनॉमी
सर्वे के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (FY26) में भारत की विकास दर 7.4% रहने का अनुमान है. हालांकि अगले साल के लिए इसे थोड़ा कम (7.2% तक) आंका गया है, लेकिन दुनिया भर में मची उथल-पुथल को देखते हुए यह आंकड़ा बहुत मजबूत माना जा रहा है.
सरकार का कहना है कि दुनिया में बढ़ते टैक्स (टैरिफ) और राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की बुनियाद मजबूत है. बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो गई है और यह सर्वे 1 फरवरी को आने वाले बजट की दिशा तय करेगा.
क्यों अहम है यह इकोनॉमिक सर्वे?
इकोनॉमिक सर्वे को आप बजट से पहले का 'ट्रेलर' समझ सकते हैं. इसमें खेती, उद्योग और नौकरी जैसे अहम क्षेत्रों का पूरा डेटा होता है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इस रिपोर्ट में साफ किया है कि भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. रिपोर्ट में महंगाई को काबू में रखने और निवेश बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है, ताकि आम आदमी की जेब पर बोझ कम हो और देश की तरक्की जारी रहे.
यूरोप के साथ समझौते से बढ़ेगी भारत की ताकत
इकोनॉमिक सर्वे में यूरोप के साथ होने वाले 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (FTA) पर भी खास जोर दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप के साथ इस व्यापार समझौते से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बहुत मजबूती मिलेगी. इससे न केवल भारत की चीजों को विदेशों में पहचान मिलेगी, बल्कि हमारे निर्यात (एक्सपोर्ट) करने की ताकत भी बढ़ेगी. यह कदम भारत को दुनिया भर की सप्लाई चेन में एक मजबूत प्लेययर बनाने के लिए बेहद जरूरी है.
इस साल भारत - अमेरिका के बीच ट्रेड डील' होने की उम्मीद
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में यह उम्मीद जताई गई है कि अमेरिका के साथ चल रही 'ट्रेड डील' इसी साल के भीतर पूरी हो सकती है. अगर ऐसा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही अनिश्चितता काफी हद तक कम हो जाएगी. सर्वे के मुताबिक, दुनिया भर में चल रहे तनाव से भारत को कोई बहुत बड़ा खतरा तो नहीं है, लेकिन अमेरिका के साथ यह डील होने से एक्सपोर्ट को एक नई जान मिलेगी.
ग्लोबल टेंशन के बीच भारत के पास बड़ा मौका
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, आज पूरी दुनिया कई तरह के संकटों और चुनौतियों से जूझ रही है. लेकिन भारत के लिए यह एक बहुत बड़ा मौका है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में मची इस हलचल के बीच भारत एक अहम रोल निभा सकता है. यानी मुश्किल दौर में भारत पूरी दुनिया को दिशा दिखाने की ताकत रखता है.
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