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यूपी से लेकर कोलकाता तक ED का हड़कंप! टोल प्लाजा में फर्जीवाड़े को लेकर छापेमारी

NHAI टोल प्लाजा पर फर्जी सॉफ्टवेयर को लेकर पर्दाफाश किया गया है. ED की कार्रवाई जारी है. अनऑथोराइज्ड सॉफ्टवेयर और फर्जी रसीदों की मदद से धोखाधड़ी की जा रही थी.

यूपी से लेकर कोलकाता तक ED का हड़कंप! टोल प्लाजा में फर्जीवाड़े को लेकर छापेमारी
सांकेतिक फोटो
ANI

NHAI के टोल प्लाजा में फर्जीवाड़े को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई की है. NHAI के कई टोल प्लाजा पर फर्जी टोल वसूली से जुड़े मामले सामने आने के बाद इस पर कार्रवाई शुरू की है. ED के लखनऊ जोनल ऑफिस ने आज 14 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की है. साथ ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता में भी छापे मारे जा रहे हैं. इस मामले में PMLA की धारा 17 के तहत कार्रवाई की जा रही है.

आरोप है कि अनऑथोराइज्ड सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी टोल रसीदें बनाई जा रही थी. इसके अलावा टोल से मिलने वाली रकम को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया जा रहा था. इससे काफी ज्यादा नुकसान हुआ है.

और सबूत जुटा रही ED

फॉरेंसिक जांच और NHAI के रिकॉर्ड में ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि भी हुई है. हालांकि, अभी ED की टीम डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटा रही है. इसके अलावा ईडी रकम के असली लाभार्थियों और मनी ट्रेल का पता लगाने की कोशिश भी कर रही है. 

आपको बता दें कि पिछले महीने भी ईडी ने कई टोल प्लाजा पर फर्जी टोल वसूली से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत 14 ठिकानों पर छापेमारी (सर्च ऑपरेशन) की थी. ये कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, एनसीआर (NCR) और कोलकाता में स्थित परिसरों पर की गई थी.

धोखाधड़ी से हासिल किया था इनपुट टैक्स क्रेडिट

शिकायतकर्ता एजेंसी ने फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया था. एजेंसी के अनुसार, आरोपी कंपनी और उसके डायरेक्टर्स ने किसी भी तरह के माल की वास्तविक खरीद-बिक्री किए बिना फर्जी इनवॉइस और जाली ई-वे बिल तैयार करके धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया और फिर उसे आगे ट्रांसफर कर दिया.

जांच में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े की वजह से सरकारी खजाने को कुल 27.02 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ.  कंपनी ने फर्जी आईटीसी क्लेम करने और टैक्स चोरी के मकसद से पहले से सुनियोजित साजिश के तहत जाली  ट्रांसपोर्ट रसीदें तैयार की थीं.

कंपनी ने फर्जी और शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए करीब 10.28 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया और आगे पास किया. इसके अलावा लाभार्थी फर्मों से मिलने वाले पैसे को उसी दिन दूसरी शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया जाता था. फिर कई बैंक खातों के जाल में घुमाने के बाद आखिरकार कैश के रूप में निकाल लिया जाता था.

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