विज्ञापन

त्रिकुटा पर्वत से आया फोन कॉल, माता वैष्णो देवी के दर्शन करने गए 4 भाइयों की रुला देने वाली कहानी

परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है. सवाल बस एक ही है कि आखिर उनकी क्या खता थी? जो आशीर्वाद लेने गए थे, उन्हें मौत क्यों मिली?

त्रिकुटा पर्वत से आया फोन कॉल, माता वैष्णो देवी के दर्शन करने गए 4 भाइयों की रुला देने वाली कहानी
  • माता वैष्णो देवी के त्रिकुटा पर्वत पर हुए हादसे में चौथे भाइयों सहित 34 लोगों की मौत हुई.
  • राजस्थान के नागौर और सुजानगढ़ के चार भाइयों अनिल, अरविंद, गजानन और संदीप की एक साथ मृत्यु हुई.
  • ये चारों भाई श्रीनगर की यात्रा के बाद माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गए थे.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

त्रिकुटा पर्वत पर माता वैष्णो देवी में हुए महाहादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है. इस तबाही में 34 जिंदगियां खामोश हो गईं, लेकिन तबाही के इन आंकड़ों के पीछे दबी है कई कहानियां. दर्द भरी अधूरी यात्रा की एक दास्तान. एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली कहानी है राजस्थान के नागौर और सुजानगढ़ की. जहां मां वैष्णो देवी में आया एक सैलाब ऐसा जख्म दे गया है, जो शायद कभी नहीं भरेगा. यहां एक ही झटके में एक ही चार भाई एक साथ दुनिया को छोड़ गए. यह कहानी है अनिल और अरविंद की, जो सगे भाई थे और उनके रिश्ते के भाई गजानन और संदीप की. 

क्या हुआ मंगलवार को

Latest and Breaking News on NDTV

7 दिन पहले यह सभी खुशियों भरा एक सफर शुरू कर श्रीनगर घूमने गए थे. श्रीनगर से लौटते हुए चारों भाई माता वैष्णो देवी का आशीर्वाद लेने पहुंचे. मंगलवार दोपहर हादसे से कुछ ही देर पहले उन्होंने घर पर फोन भी किया था. परिजनों से बात की थी. अपनी यात्रा के रोचक पल सुनाए थे. जल्द ही दर्शन कर लौटने का वादा किया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनकी अपने परिवार से आखिरी बातचीत थी. उस फोन कॉल के बाद अचानक पहाड़ों से मौत का मलबा उन पर आ गिरा और पलक झपकते ही सब कुछ खत्म हो गया.

हर तरफ पसरा सन्नाटा

Latest and Breaking News on NDTV

इस हादसे की खबर जैसे ही राजस्थान के सुजानगढ़ और नागौर पहुंची तो हर तरफ कोहराम मच गया. जिस घर में कुछ देर पहले बेटों से बातकर रौनक थी, अब वहीं मातम पसरा था.  परिवार अब उनके शव लेने के लिए जम्मू रवाना हो गया है. जिन बाजारों में अरविंद, अनिल, गजानन और संदीप की दुकानें थीं, वहां आज सन्नाटा पसरा है. जिन दुकानों के शटर रोज सुबह उम्मीद के साथ उठते थे, आज उन पर ताले लटक गए हैं. परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है. सवाल बस एक ही है कि आखिर उनकी क्या खता थी? जो आशीर्वाद लेने गए थे, उन्हें मौत क्यों मिली?
 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com