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बेंगलुरु में ट्रैफिक का बुरा हाल, स्कूल आने-जाने में 7 घंटे सड़क पर फंसे रहे बच्चे, 5 कमी. जाने में लग रहे 2 घंटे

इन्वेंचर एकेडमी की फाउंडर नूरेन फजल ने कहा कि वर्थुर-गुंजूर इलाके में कई बड़े स्कूल हैं. ट्रैफिक जाम की वजह से हजारों बच्चे, टीचर, माता-पिता, स्टाफ और दूसरे लोग हर दिन अपने घंटों बर्बाद कर रहे हैं.

बेंगलुरु में ट्रैफिक का बुरा हाल, स्कूल आने-जाने में 7 घंटे सड़क पर फंसे रहे बच्चे, 5 कमी. जाने में लग रहे 2 घंटे
बेंगलुरु में जाम की वजह से घंटों सड़क पर फंसे रहे स्कूली बच्चे.
  • बेंगलुरु के वर्थुर-गुंजुर इलाके में गुरुवार को स्कूल बसें जाम में दो घंटे से ज्यादा समय तक फंसी रहीं
  • माता-पिता ने सड़क की खराब हालत, गड्ढे, संकरी सड़कों और अधूरे निर्माण को ट्रैफिक जाम की मुख्य वजह बताया
  • इन्वेंचर एकेडमी फाउंडर ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की

बड़े शहरों में ट्रैफिक बड़ी समस्या बनता जा रहा है. लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं. गुरुवार को बेंगलुरु की सड़कों पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. स्कूल बसें जाम की वजह से करीब 2 घंटे से ज्यादा समय तक सड़कों पर फंसी रहीं. बेंगलुरु के वर्थुर-गुंजुर इलाके में स्कूल से सिर्फ 5-6 किलोमीटर तक जाने में छात्रों को ढाई घंटे का समय लगा. माता-पिता ने इस समस्या पर चिंता जताई है. 

मामला गुरुवार शाम का है. बच्चे वर्थुर और गुंजुर के आस-पास के स्कूलों से घर लौटते समय भारी ट्रैफिक जाम में फंस गए. माता-पिता के मुताबिक, कई छात्र सिर्फ 5-6 किमी. तक जाने के लिए दो घंटे से ज़्यादा समय तक जाम में फंसे रहे. 17 सितंबर को गुंजुर के पास SH-35 पर ट्रैफिक का यह हाल देखा गया. जाम में फंसी गाड़ियों में कई स्कूल बसें भी शामिल थीं.

2 घंटा जाम में फंसी रही CEO की बेटी

ज़्लुरी (Zluri) के CEO और को-फाउंडर रितेश रेड्डी, अपनी बेटी की स्कूल बस की GPS लोकेशन ट्रैक करने के बाद उसे खुद लेने निकल पड़े. उन्होंने भारी ट्रैफिक जाम का वीडियो बनाया, जिसमें दर्जनों स्कूल बसें सड़क पर फंसी दिखाई दीं. उन्होंने जाम के हालात को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बयां करते हुए कहा, ' 2 से ज्यादा घंटे, हर दिन. व्हाइटफील्ड बच्चे 5 किमी. जाने के लिए वर्तुर रोड पर इतने समय फंसे रहते हैं. यह पोस्ट करते समय उनकी बेटी भी फंसी हुई है. व्हाइटफील्ड इससे बेहतर का हकदार है.

रेसिडेंट्स ग्रुप में पेरेंट्स की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, 17 सितंबर को कई स्कूलों की बसों को कम दूरी तक जाने में दो घंटे से ज़्यादा का समय लगा.

17 सितंबर को स्कूल बस से घर आने में लगा समय 

- TISB से PLH: 6 km — 2 घंटे 15 मिनट
- Inventure से PLH: 6 km — 2 घंटे 30 मिनट
- Greenwood High: 5 km — 2 घंटे 30 मिनट
- United World Academy: 5 km — 2 घंटे

बच्चों के पेरेंट्स ने जताई चिंता

पेरेंट्स और स्थानीय लोगों ने वर्थुर मेन रोड की हालत पर चिंता जताई. उनका कहना है कि गड्ढे, सड़क का अधूरा और देरी से चल रहा काम और संकरी सड़कों की वजह से ट्रैफिक जाम लगता है.  एक स्थानीय निवासी ने कहा कि हजारों लोग और स्कूली बच्चे हर दिन इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. यह रूट कई रिहायशी इलाकों को व्हाइटफील्ड से जोड़ता है. यह सड़क सालों से खराब हालत में है. यहां गड्ढे, ढीली बजरी, धूल, टूटी हुई स्ट्रीटलाइट्स और खराब रखरखाव बड़ी परशानी है. बारिश में हालात और भी खराब हो जाती है. पानी से भरे गड्ढे और कीचड़ वाली सड़क पर चलना मुश्किल और खतरनाक हो जाता है.

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मुख्य सड़क का ऐसा हाल क्यों है?

अन्य स्थानीय ने सवाल उठाया कि हजारों लोगों के आने-जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मुख्य सड़क का ऐसा हाल क्यों है. उन्होंने सड़क की हालत, ट्रैफिक और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की. इस बीच, इन्वेंचर एकेडमी की फाउंडर नूरेन फजल ने बताया कि गुरुवार को बच्चे और टीचर स्कूल आने-जाने में सड़क पर सात घंटे तक फंसे रहे. उन्होंने कहा कि हमें सचमुच मदद की जरूरत है, यह कोई एक बार होने वाली घटना नहीं है.

इन्वेंचर एकेडमी की फाउंडर की मांग

उन्होंने कहा कि स्कूल के पीक आवर्स में मुख्य सड़कों पर भारी गाड़ियों को नहीं आने देना चाहिए. साथ ही गलत दिशा में गाड़ी चलाने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाना चाहिए. निजी गाड़ियों के बजाय स्कूल बसों और शेयर्ड ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना चाहिए. साथ ही उन्होंने सड़कों के गड्ढों, बंद नालियों और ट्रैफिक जाम वाली जगहों की तुरंत मरम्मत करने की भी मांग की.

उन्होंने कहा कि वर्तूर-गुंजूर इलाके में कई बड़े स्कूल हैं. ट्रैफिक जाम की वजह से हजारों बच्चे, टीचर, माता-पिता, स्टाफ और दूसरे लोग हर दिन अपने घंटों बर्बाद कर रहे हैं. इस परेशानी के समाधान के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है. वर्थुर-गुंजूर रूट पर ट्रैफिक की समस्या ने एक बार फिर शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और आवाजाही से जुड़ी चुनौतियों को उजागर कर दिया है. खासकर उन तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में, जहां रिहायशी बस्तियां, स्कूल और कमर्शियल गतिविधियां काफी बड़ गई हैं. 

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