उत्तर प्रदेश की सड़कों पर कौतूहल बना 308 पहियों वाला बाहुबली ट्रक अब बनारस की सीमा में दाखिल हो चुका है. चंदौली से बनारस तक पहुंचने में इस ट्रक को कुछ परेशानियों का भी सामना करना है. रास्ते में कीचड़ वाली सड़क मिलने और दूसरी वजहों से इस ट्रक ने 48 घंटे में मात्र 48 किलोमीटर की दूरी ही तय की है. 200 टन वजनी विशालकाय मशीन को अपनी पीठ पर लादे इस महाकाय ट्रक को आगे बढ़ाने में NHAI के अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. बनारस में इसका सफर सुगम रहे इसकी तमाम तैयारियां मुकम्मल कर ली गई है.

308 Wheel Truck: इस ट्रक पर लदे इंडस्ट्रियल वेसल की ऊंचाई का अंदाजा आप इस तस्वीर से लगा सकते हैं.
एशिया के पहले बायो-प्लास्टिक प्लांट की है यह मशीन
अब तक अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में इसे किसी चीनी मिल का बॉयलर बताया जा रहा था, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा बड़ी और चौंकाने वाली है. 8 मीटर ऊंची और 7 मीटर चौड़ी यह भारी-भरकम मशीन कोई साधारण बॉयलर नहीं, बल्कि एक बेहद खास इंडस्ट्रियल वेसल (रिएक्टर) है. इसे लखीमपुर खीरी के कुंभी में बन रहे एशिया के पहले बायो-प्लास्टिक (बायो-पॉलीमर) प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है. बलरामपुर चीनी मिल ग्रुप द्वारा करीब 3000 करोड़ रुपये के निवेश से लगाए जा रहे इस ग्रीन प्रोजेक्ट में गन्ने से इको-फ्रेंडली प्लास्टिक तैयार होगी. इस प्लांट का शिलान्यास सीएम योगी साल 2024 में किया था. उसी मेगा फैक्ट्री की जान है यह 200 टन का वेसल, जिसे बेहद सावधानी से और धीमी गति से इसके गंतव्य तक भेजा जा रहा है.

308 Wheel Truck: इस ट्रक की रफ्तार काफी धीमी है लिहाजा इसके साथ चल रहे कर्मचारियों ने इसी पर अपना आशियाना जैसा बना लिया है.
Photo Credit: संतोष जायसवाल
चंदौली में रिंग रोड के पास थोड़ी देर के लिए थमे पहिये
दरअसल नौबतपुर बॉर्डर से यूपी की सीमा में दाखिल होने के बाद इस महाट्रक की असली परीक्षा शुरू हुई. चंदौली के पास रिंग रोड की सर्विस लेन पर लगातार हुई बारिश और 200 टन के भारी वजन की वजह से जमीन धंसने लगी और कच्चा रास्ता गहरे कीचड़ में तब्दील हो गया. इसी वजह से 308 पहियों के जाल के बावजूद इस विशाल वजन को आगे बढ़ाना नामुमकिन सा हो गया था.किसी भी बड़े हादसे या ट्रक के पलटने के खतरे को देखते हुए इंजीनियरों ने सूझबूझ दिखाई और बेहद सावधानी व संयम के साथ इसे धीरे-धीरे आगे बढ़ाया. असल में मुसीबत सिर्फ कीचड़ तक ही सीमित नहीं थी. रिंग रोड के पुल की ऊंचाई कम होने की वजह से यह 8 मीटर ऊंचा महाकाय ट्रक उसके नीचे से नहीं गुजर सकता था.इसके समाधान के लिए पुल के किनारे से एक अलग कच्चा बाईपास रास्ता तैयार किया गया, लेकिन बारिश ने वहां की मिट्टी को गीला और कमजोर कर दिया था. इसके बाद प्रशासन ने तुरंत क्रेन, पोकलेन और दर्जनों मजदूरों की फौज को काम पर लगाया. रास्ते पर भारी मात्रा में गिट्टी और पत्थर बिछाए गए, जिसके बाद ही यह 'बाहुबली' बिना धंसे सुरक्षित आगे बढ़ सका.

308 Wheel Truck: इस ट्रक पर लदे भारी वजन की वजह और रफ्तार काफी धीमी है. इसके टायरों की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है.
हर किलोमीटर पर इम्तिहान
हजारों मील दूर बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर उतरी यह मशीन जब से भारतीय सड़कों पर आई है, तब से प्रशासन का हर एक किलोमीटर पर इम्तिहान हो रहा है. इस विशालकाय मशीन को रास्ता देने के लिए रूट के बिजली के तार काटे जा रहे हैं, सड़क किनारे लगे ऊंचे साइन बोर्ड उखाड़े जा रहे हैं और कई जगहों पर क्रेन की मदद से फुट ओवरब्रिज को ऊपर उठाया जा रहा है. तमाम चुनौतियों के बावजूद यह बाहुबली धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है.
ये भी पढ़ें: हरदोई में इंद्रदेव पर 'एक्शन' की तैयारी ! युवक ने DM से कहा- भगवान को फोन लगाओ, बहुत बारिश करा रहे
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं