उत्तराखंड कैडर के IFS अफसर संजीव चतुर्वेदी इसलिए सुर्खियों में रहते हैं, क्योंकि उनसे जुड़े मामलों में जज खुद को सुनवाई से अलग कर लेते हैं. सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालत तक के जज खुद को अलग कर चुके हैं. अब तक 17 जज उनके मामलों पर सुनवाई करने से मना कर चुके हैं और खुद को अलग कर चुके हैं.
अब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की दिल्ली बेंच के जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा ने भी उनके मामले से खुद को अलग कर लिया है. जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा की बेंच IFS अफसरों की मूल्यांकन रिपोर्ट से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी.
जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा ने 21 सितंबर को एक आदेश में कहा कि उन्होंने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है. हालांकि, उन्होंने अपने आदेश में अलग होने की वजह नहीं बताई.
कितने जज हो चुके हैं सुनवाई से अलग?
अब तक कुल 17 जज खुद को सुनवाई से अलग कर चुके हैं. इनमें सुप्रीम कोर्ट के 2, नैनीताल हाई कोर्ट के 4, CAT के 9 और जिला अदालत के 2 जज शामिल हैं.
जजों के अलग होने की कहानी 2013 से शुरू हुई थी. नवंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस रंजन गोगोई ने खुद को अलग किया. फिर अगस्त 2016 में जस्टिस यूयू ललित भी अलग हो गए.
इसके बाद मई 2023 में नैनीताल हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश थपलियाल, फरवरी 2024 में जस्टिस मनोज तिवारी और सितंबर-अक्टूबर 2025 में जस्टिस आलोक वर्मा और जस्टिस रवींद्र मैठाणी ने खुद को अलग कर लिया था.
वहीं, मार्च 2019 से लेकर जनवरी 2025 तक CAT के 9 जज खुद को चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं.
इनके अलावा, अप्रैल 2018 में शिमला कोर्ट के जज और अप्रैल 2025 में ACJM नेहा कुशवाहा ने भी खुद को अलग कर लिया था.
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कौन हैं संजीव चतुर्वेदी?
संजीव चतुर्वेदी इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) के अधिकारी हैं. उनके मामलों पर सुनवाई से जज कुद को अलग क्यों कर लेते हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है.
वह उत्तराखंड कैडर के 2002 बैच के IFS अफसर हैं. वह 2005 से 2012 तक हरियाणा सरकार में कार्यरत थे. 2012 से 2014 तक वह दिल्ली AIIMS के चीफ विजिलांस ऑफिसर (CVO) के पद पर थे. उन्होंने AIIMS में कई गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. 2014 में उन्हें पद से हटा दिया गया था.
उनकी गिनती ईमानदार अफसरों में होती है. उनका दर्जनों बार ट्रांसफर हो चुका है. उनके खिलाफ जांच भी बैठी थी. जांच के बाद 2015 में उनका निलंबन रद्द कर दिया गया था.
ईमानदारी, साहस और भ्रष्टाचार के खिलाफ ख्त रुख के कारण 2015 में उन्हें एशिया के सबसे प्रतिष्ठित 'रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था. यह सम्मान पाने वाले वह किरण बेदी के बाद दूसरे सर्विंग ऑफिसर हैं.
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