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ग्रेटर नोएडा में स्लीपर बस में आग पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, बस नियमों का पालन कर रही थी या नहीं

यह घटना गौतम बुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर 23-24 सितंबर की रात हुई थी. इस घटना में नौ लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. बस दिल्ली से महोबा जा रही थी.

नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक चलती बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. सोमवार को सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र से जवाब मांगा है.सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने ग्रेटर नोएडा में स्लीपर बस में आग पर दाखिल अर्जी का हवाला दिया. यह घटना 23-24 सितंबर की रात की है. यह घटना ग्रेटर नोएडा को आगर से जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई थी. घटना की शिकार हुई बस दिल्ली से महोबा जा रही थी. 

अदालत ने क्या कहा है

ग्रेटर नोएडा में बीते बुधवार को एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग झुलस गए थे. इस मामले का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी  याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र से जवाब मांगा है. सड़क सुरक्षा मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने ग्रेटर नोएडा में स्लीपर बस में आग पर दाखिल अर्जी का हवाला दिया. सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि स्लीपर बस में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में नौ लोगों की मौत को देखते हुए अदालत ने इस मुद्दे को सुनवाई के लिए लिया है. 

पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, केंद्र सरकार और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को आवेदन पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. इस याचिका में पर्यटक बसों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं. 

इस मामले में अदालत ने अधिकारियों से जानना चाहा कि घटना के बाद बस के चालक और पंजीकृत मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है. जस्टिस पारदीवाला ने पूछा कि क्या चालक और बस के मालिक को गिरफ्तार किया गया है? पीठ ने यह भी जानना चाहा कि सड़क पर डबल-डेकर बस चलाने से पहले बस मालिक ने सभी आवश्यक नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं. 

कब और कहां लगी थी बस में आग

अदालत ने इस मामले उत्तर प्रदेश सरकार और  सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से हलफनामा दाखिल करने को कहा है. दरअसल अदालत यह जानना चाहती है कि घटना के बाद संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की और सार्वजनिक सड़कों पर पर्यटक एवं स्लीपर बसों, खासकर डबल-डेकर बसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. पीठ ने मामले में संबंधित अधिकारियों से बस के संचालन की अनुमति, नियमों के अनुपालन और हादसे के बाद की गई कार्रवाई का विवरण देने को कहा है.

दरअसल 23-24 सितंबर की रात दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस (BR32 PA8647) में यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण आग लग गई थी. इस हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य बुरी तरह झुलस गए थे. हादसे का शिकार हुई बस राज कल्पना ट्रैवल्स की थी.यह कंपनी यूपी, एमपी और बिहार के लिए बसें चलाती हैं. 

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