CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी वही छूट देने का आदेश दिया है, जो पहले से कक्षा 7 और बाकी क्लास के छात्रों को दी जा रही है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वो कक्षा 6 के छात्रों को इस नीति से छूट देने के पक्ष में नहीं है और करीब 99 प्रतिशत CBSE स्कूल नई भाषा नीति लागू करने के लिए तैयार हैं. हालांकि इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के मौजूदा बैच को भी इस दौरान छूट देने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर कई याचिकाएं दायर हुई थीं.
बीच सत्र में भाषा नीति बदलने पर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि जिन छात्रों ने पहले ही अपनी भाषाओं का चयन कर लिया है, उनके लिए बीच में नई भाषा व्यवस्था लागू करना उचित नहीं होगा. अदालत ने पहले केंद्र और CBSE से नई व्यवस्था को 2027 से ‘सॉफ्ट लॉन्च' करने पर विचार करने को कहा था, ताकि छात्रों को अचानक नए नियमों के अनुरूप बदलाव करने के लिए मजबूर न होना पड़े.
तीसरी भाषा पढ़ेंगे, लेकिन बोर्ड परीक्षा में नहीं होगी बाध्यता
इस दौरान छूट के तहत छात्रों को तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रखनी होगी, लेकिन उस भाषा में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देने की बाध्यता नहीं होगी. साथ ही, केवल तीसरी भाषा की परीक्षा या उसके रिजल्ट के आधार पर छात्र को कक्षा में रोका नहीं जाएगा. सुप्रीम कोर्ट का ये निर्देश उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने पहले से लागू व्यवस्था के तहत अपनी भाषाओं का चयन कर लिया है और अब CBSE की नई तीन भाषा नीति के बीच पढ़ाई कर रहे हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने ये अहम आदेश दिया.
कक्षा 10 में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को पहले ही छूट दी गई है. इसके तहत जब ये छात्र कक्षा 10 में पहुंचेंगे तो तीसरी भाषा में CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन के जरिए होगा और इसका कक्षा 10 के बोर्ड परिणाम में पास-फेल होने से कोई संबंध नहीं होगा. इसी व्यवस्था को अब सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों पर भी लागू करने का निर्देश दिया है.
केंद्र सरकार ने दिया ये तर्क
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार ने अदालत की पिछली टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की है. केंद्र की ओर से बताया गया कि 28,819 CBSE स्कूलों में से करीब 99 फीसदी स्कूलों में आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध है, जबकि करीब 1.2 फीसदी स्कूलों में अभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी बाकी हैं. सरकार ने यह भी कहा कि किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध हैं तथा छात्रों ने योजना के तहत भाषाओं का चयन किया है.
‘सॉफ्ट लॉन्च' का सुझाव
जस्टिस बागची ने कहा कि CBSE का पूरा तंत्र लगभग इस नीति को लागू करने की स्थिति में पहुंच चुका है. उन्होंने ये देखते हुए कि नीति मार्च में अधिसूचित हुई थी, कक्षा 6 के लिए ‘सॉफ्ट लॉन्च' का सुझाव दिया था, ताकि बीच में व्यवस्था बदलने से होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों से छात्रों को बचाया जा सके.
अंग्रेजी को ‘नॉन नेटिव लैंग्वेज' मानने पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान एक वकील ने अंग्रेजी को ‘नॉन नेटिव लैंग्वेज' के रूप में वर्गीकृत किए जाने का मुद्दा उठाया. दलील दी गई कि इससे छात्र पहले से पढ़ी जा रही कई विदेशी भाषाओं को चुनने से वंचित हो सकते हैं. वकील ने सवाल किया कि जब संविधान अंग्रेजी में लिखा गया है और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही भी अंग्रेजी में होती है, तो अंग्रेजी को ‘नॉन नेटिव' कैसे माना जा सकता है. जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर भी विचार करेगी.
CBSE को दिया गया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को निर्देश दिया कि वो एक अधिकारी नियुक्त करे, जो उन स्कूलों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का पता लगाए जहां अभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. जस्टिस बागची ने ये भी कहा कि अगर किसी स्कूल ने आंतरिक मूल्यांकन में किसी छात्र को कक्षा में रोकने की कार्रवाई की, तो अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करेगी. बेंच ने CBSE को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
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