"पर्यटन संस्कृतियों के बीच एक सेतु, आर्थिक अवसरों को बढ़ाने और सॉफ्ट कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन है", उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने दिल्ली में ‘संकला फाउंडेशन' के सहयोग से ‘यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम' द्वारा आयोजित पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंगलवार को ये अहम बात कही. उपराष्ट्रपति ने कहा कि पर्यटन सिर्फ एक उद्योग नहीं है, बल्कि संस्कृतियों के बीच एक अहम ब्रिज है, जिसे निरंतर मजबूत करने पर फोकस होना चाहिए.
‘यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम' को सम्बोधित करते हुए सी पी राधाकृष्णन ने कहा,"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पर्यटन विजन 2029 की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य में सुदृढ़ अवसंरचना और वैश्विक आतिथ्य मानकों के साथ कम से कम एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल का विकास करना है. पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्बाध संपर्क, स्मार्ट सुविधाएं, सुरक्षा, सततता डिजिटल एकीकरण और समृद्ध आगंतुक अनुभवों सहित समग्र पर्यटन इको-सिस्टम पर केंद्रित है." भारत सरकार ने विकसित भारत के लक्ष्य के लिए जिन सेक्टरों को प्राथमिकता सूची में रखा है, उसमें पर्यटन उद्योग भी शामिल है.
उपराष्ट्रपति ने भारत में पर्यटन के विकास के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों (UNESCO World Heritage Sites) के बेहतर सरंक्षण और विश्व स्तरीय विकास पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया, जिसमें पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं हों, इंटरप्रिटेशन सेंटर हों, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (last-mile connectivity) और डिजिटल स्टोरी-टेलिंग की सुविधा भी हो.
पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन में भारत में पर्यटन उद्योग के सामने चुनौतियों पर विस्तार से मंथन किया गया. भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक (पर्यटन) सुमन बिल्ला ने #USISPFTourismSummit2026 में भारत के पर्यटन उद्योग के आपूर्ति पक्ष को मजबूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा,
"यदि आप संख्याओं को देखें, तो 20 मिलियन लोग भारत आते हैं और इससे हम 32 बिलियन विदेशी मुद्रा कमाते हैं. लेकिन 30 मिलियन लोग देश से बाहर जा रहे हैं, जो बाहर 35 बिलियन डॉलर खर्च कर रहे हैं। इसलिए आज पर्यटन देश के लिए एक net export loss वाला सेक्टर है".
नीति आयोग के पूर्व सीईओ और G20 इंडिया के पूर्व शेरपा रहे अमिताभ कांत ने कहा,"टूरिज्म की मार्केटिंग के लिए सरकार को एक पर्यटन बोर्ड बनाना चाहिए, जो सरकारी तंत्र के बाहर सेटअप हो, जिससे प्राइवेट सेक्टर बेहतर तरीके से भारत की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। इसे आंशिक रूप से सरकार द्वारा और आंशिक रूप से निजी क्षेत्र द्वारा फाइनेंस किया जाना चाहिए, जिससे पर्यटन बाजार में दीर्घकालिक स्थिरता बनी रहे".
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