पश्चिम बंगाल की चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर हैं. बंगाल की हार के बाद ममता बनर्जी का यह पहला दिल्ली दौरा है. अपने दौरे के तीसरे दिन उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. दो दिन में ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की यह दूसरी मुलाकात है. इससे पहले सोमवार को इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में दोनों की मुलाकात हुई थी, जहां ममता बनर्जी सोनिया गांधी से गले मिली थीं.
सोनिया गांधी से यह मुलाकात तब हुई है, जब ममता बनर्जी सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही हैं. विधायकों के बाद सांसदों ने भी बगावत कर दी है. टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है.
ममता बनर्जी शनिवार को दिल्ली आई थीं. सबसे पहले उन्होंने दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी. ममता बनर्जी मंगलवार को करीब 5 साल बाद सोनिया गांधी के आवासा 10 जनपथ पहुंचीं. दोनों नेताओं की मुलाकात करीब एक घंटे तक चली.
आखिर चल क्या रहा है?
सोनिया गांधी से ममता बनर्जी की मुलाकात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि टीएमसी का कांग्रेस में विलय हो सकता है. हालांकि इसको लेकर दोनों दलों के नेता कोई टिप्पणी नहीं कर रहे. अहम बात यह है कि ममता-सोनिया की इस मुलाकात के दौरान राहुल गांधी संगठन से जुड़ी बैठकों के लिए कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में मौजूद थे. जाहिर है राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से 'विलय' से जुड़ी अटकलों में कोई दम नजर नहीं आता.
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इंडिया ब्लॉक की बैठक में गले मिली थीं दोनों
इंडिया गठबंधन की बैठक में सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को गले लगाया था. दोनों नेता अगल-बगल ही बैठे थे. बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने बंगाल विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और आने वाले दिनों के मद्देनजर इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर बल दिया.

बंगाल में एक-दूसरे खिलाफ लड़ी थीं दोनों पार्टी
बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने टीएमसी और ममता बनर्जी पर खुलकर हमला बोला था. हालांकि नतीजों के बाद टीएमसी और कांग्रेस नेतृत्व में नजदीकियां बढ़ी हैं. देखना होगा कि क्या कांग्रेस ममता बनर्जी के लिए संकट मोचक की भूमिका निभाएगी?
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28 साल पहले कांग्रेस से अलग हो गई थीं ममता
1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर ही तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी. दोनों दलों ने मिलकर 2011 में वाम मोर्चा की सरकार को हराया था. हालांकि बाद के सालों में ममता ने कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था. इसके बाद के दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने वाम दलों के साथ गठबंधन किया और बीते चुनाव में अकेले मैदान में उतरी. बंगाल में कमजोर होती टीएमसी से कांग्रेस को अपनी खोई जमीन फिर से हासिल करने मौका नजर आ रहा है.
अधीर रंजन क्या बोले?
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी में पड़ी फूट को लेकर NDTV से बात करते हुए कहा कि उनके साथ वही हो रहा है जैसा उन्होंने कांग्रेस के साथ किया था. अधीर रंजन ने कहा कि टीएमसी के आम कार्यकर्ताओं के लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले हुए हैं.
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