विज्ञापन

इस सुपरबग का हो सकता है खात्मा! गाय की आंत में भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा ये एंजाइम

भारत के वैज्ञानिक इस बैक्टीरिया को सीधे खत्म करने की तैयारी नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे इसी बैक्टीरिया की एक ताकत यानी बायोफिल्म को निशाना बनाना चाहते हैं.

इस सुपरबग का हो सकता है खात्मा! गाय की आंत में भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा ये एंजाइम
भारतीय वैज्ञानिकों की नई खोज
NDTV

क्या गायों से मिले एंजाइम से खतरनाक सुपरबग से असल में लड़ा जा सकता है? बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में इस सवाल का जवाब खोजा है. इन वैज्ञानिकों को गाय की आंत में एक ऐसा एंजाइम मिला है जो अस्पताल में होने वाले खतरनाक सुपरबग के खिलाफ असरदार साबित हो सकता है. बड़ी बात यह है कि यह खोज ऐसे समय में हुई है, जब कई बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर समय के साथ कम होता जा रहा है.

जानकार मानते हैं कि अभी यह रिसर्च बिल्कुल शुरुआती चरण में है. ऐसे में इसके पीछे के विज्ञान को समझने और इसे इलाज के रूप में इस्तेमाल करने में अभी कई साल लग सकते हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि इस रिसर्च के माध्यम से जिस बैक्टीरिया पर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं, उसका नाम Acinetobacter baumannii है. यह दुनिया के कई अस्पतालों में होने वाले गंभीर संक्रमण का एक बड़ा कारण माना जाता है. कभी-कभी इसी बैक्टीरिया को Iraqibacter भी कहा जाता है. असल में इराक युद्ध के दौरान घायल सैनिकों में यही संक्रमण पाया गया था. इसी वजह से इस बैक्टीरिया का एक नाम यह भी पड़ गया.

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) के मुताबिक, यह बैक्टीरिया मिट्टी और पानी में पाए जाते हैं, लेकिन इंसानों में होने वाला संक्रमण अस्पताल या दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े स्थानों में ज्यादा देखने को मिलता है. यह बैक्टीरिया फेफड़ों, घाव और यूरिनरी ट्रैक्ट में गंभीर संक्रमण करने की क्षमता रखता है.

चिंता की बात यह भी है कि कई एंटीबायोटिक दवाओं का असर इस बैक्टीरिया पर कम हो जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसे गंभीर चिंता वाले रोगाणुओं में शामिल किया है.

वैसे, भारत के वैज्ञानिक इस बैक्टीरिया को सीधे खत्म करने की तैयारी नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे इसी बैक्टीरिया की एक ताकत यानी बायोफिल्म को निशाना बनाना चाहते हैं. बायोफिल्म का मतलब होता है बैक्टीरिया का वह सुरक्षा कवच जो शुगर, प्रोटीन, फैट और DNA से बना होता है. यह परत बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक और शरीर के इम्यून सिस्टम से बचाने में मदद करती है.

अब IISc के एसोसिएट प्रोफेसर और इसी रिसर्च के प्रमुख वैज्ञानिक बताते हैं कि पॉलीसैकराइड यानी जटिल शुगर, बैक्टीरिया की बायोफिल्म के सबसे बड़े हिस्सों में से एक है. इसकी मात्रा बायोफिल्म में 45 से 95 फीसदी तक हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, यही शुगर बैक्टीरिया की सुरक्षा वाली परत को और ज्यादा मजबूत बनाने का काम करती है.

अब वैज्ञानिकों को अपनी रिसर्च में गाय से भी काफी मदद मिली है. असल में गाय के पेट का जो पहला हिस्सा होता है, उसे रूमेन कहते हैं. गाय घास और दूसरी वनस्पतियां खाती है. ऐसे में उसके पेट के रूमेन में लाखों-करोड़ों ऐसे सूक्ष्म जीव होते हैं जो इन पौधों को तोड़ने में मदद करते हैं.

अब वैज्ञानिक इन सूक्ष्म जीवों से जुड़े जीनोमिक डेटा का अध्ययन कर रहे थे. उन्हें इस अध्ययन में कुछ ऐसे एंजाइम मिले जो जटिल शुगर को तोड़ सकते हैं. इनमें एक एंजाइम सबसे ज्यादा असरदार दिखाई दिया. वैज्ञानिकों ने इस एंजाइम का नाम CRhAB रखा है.

ऐसा कहा जा रहा है कि गाय के रूमेन से मिला यह एंजाइम Acinetobacter baumannii बैक्टीरिया की बायोफिल्म को कमजोर करने की ताकत रखता है. लैब में जितने भी प्रयोग किए गए, उनमें गाय से मिले इसी एंजाइम ने बैक्टीरिया की नई बायोफिल्म बनने की क्षमता को काफी हद तक कम कर दिया. पहले से बनी बायोफिल्म को भी तोड़ने में इसने असरदार काम किया.

इस एंजाइम को लेकर बताया जा रहा है कि यह सीधे बैक्टीरिया पर हमला नहीं कर रहा है, बल्कि उसकी सुरक्षा की दीवार को कमजोर कर रहा है.

इसी रिसर्च की लेखिका रेशमा रामकृष्णन ने भी इस बारे में विस्तार से बताया है. उनके मुताबिक, बायोफिल्म की परत को रोकने या तोड़ने से यह बैक्टीरिया ज्यादा कमजोर हो जाता है. ऐसे में बैक्टीरिया को सीधे मारने की बजाय उसकी सुरक्षा को कमजोर करने पर जोर दिया जा रहा है.

वैसे, रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि गाय के रूमेन से मिलने वाला यह एंजाइम सिर्फ एक ही बैक्टीरिया के खिलाफ असरदार नहीं है, बल्कि इसका असर Klebsiella pneumoniae बैक्टीरिया के खिलाफ भी देखने को मिला है. यह बैक्टीरिया भी अस्पतालों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है.

इसी रिसर्च के बारे में IISc की प्रोफेसर दीपशिखा चक्रवर्ती कहती हैं कि अगर एक ही एंजाइम दो बड़े सुपरबग की बायोफिल्म पर इतना असर दिखा सकता है तो भविष्य में यह मेडिकल साइंस के लिए काफी अहम साबित हो सकता है.

वैसे वैज्ञानिकों ने सिर्फ गाय पर ही प्रयोग नहीं किया है. उनका एक प्रयोग चूहों पर भी हुआ है. इसमें बैक्टीरिया की संख्या को कम करने में इस एंजाइम ने अहम भूमिका निभाई और घाव भरने में भी मदद मिली. ऐसे में उम्मीद जगी है कि भविष्य में एंजाइम वाली ऐसी पट्टियां उन संक्रमणों में असरदार साबित हो सकती हैं, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक उतनी प्रभावी नहीं हो पातीं.

वैसे, अभी तक भारत में गाय के औषधीय महत्व को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा होती रही है, लेकिन यह रिसर्च उस चर्चा को एक कदम आगे ले जाती है. वैज्ञानिकों ने गाय के पेट में मौजूद माइक्रोब्स से एक खास एंजाइम खोजा है जिसकी मदद से खतरनाक बैक्टीरिया की सुरक्षा को कमजोर किया जा सकता है.

हालांकि, अभी के लिए CRhAB कोई दवा नहीं है और मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध नहीं है. इसे इंसानों के इलाज में इस्तेमाल करने से पहले कई तरह के ट्रायल से गुजरना होगा. 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Cow, Scientist
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com