- रायसीना हिल्स पर बनी इमारत भारत का पावर सेंटर रही है
- साउथ और नॉर्थ ब्लॉक भारतीय राजनीति का पहचान केंद्र रहे हैं
- अब इस इमारत की जगह सेवा तीर्थ होगा प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता
रायसीना के टीले पर बलुआ पत्थरों से बनी यह आलीशान इमारत देश का सबसे शक्तिशाली पता मानी जाती रही है. देश की आजादी से पहले भी और आजादी के बाद भी. भारत के कार्यपालिका का सबसे महत्वपूर्ण स्थान जहां से देश की दशा और दिशा बदलने वाले फैसले होते आए हैं. इंडिया गेट से नाक की सीध में कर्तव्य पथ (पहले राजपथ) पर सीधे चलते जाएं तो रायसीना टीले पर चढ़ते समय बायें हाथ पर है साउथ ब्लॉक. इसके ठीक सामने है नॉर्थ ब्लॉक और सामने राष्ट्रपति भवन. टीले का यह चढ़ाई नई दिल्ली के वास्तुकारों एडवर्ड लुटियंस और हर्बर्ट बेकर के बीच मतभेद का कारण भी रही.
विकसित भारत की नींव
दरअसल, नई दिल्ली की डिजाइन करने वाले लुटियंस चाहते थे कि वायसराय भवन (अब राष्ट्रपति भवन) पहाड़ी की चोटी पर प्रमुखता से दिखे. जबकि बेकर द्वारा डिजाइन किए गए सचिवालय (North/South Block) ऊंचे होने के कारण राष्ट्रपति भवन के दृश्य को बाधित करते थे. अगर लुटियंस की चलती तो ढलान कम हो जाती और नॉर्थ ब्लॉक - साउथ ब्लॉक टीले पर न होकर विजय चौक पर ठीक उसी जगह बनते जहां आज सेवा तीर्थ बन कर तैयार है. इसीलिए सेवा तीर्थ का महत्व और बढ़ जाता है. यह स्वतंत्र भारत में ब्रिटिश राज के निशान मिटाने की कोशिश भर नहीं है. बल्कि विकसित भारत की नींव रखने का एक बड़ा माध्यम भी है.

साउथ और नॉर्थ ब्लॉक की तस्वीर
जवाहर लाल नेहरू ने की थी पहली मीटिंग
करीब तीन दशक से राजनीति के तमाम उतार-चढ़ाव को नजदीकी से देखने के कारण आज के दिन का ऐतिहासिक महत्व समझ आता है. यह विरासत को मिटाने का नहीं बल्कि इसे संजो कर रखने का दिन है. यह अतीत की सीख पर भविष्य की नींव रखने का दिन है. साउथ ब्लॉक स्वतंत्रता दिवस से ही भारत के प्रधानमंत्री का कार्यालय रहा है. 15 अगस्त 1947 को पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने यहां पहली कैबिनेट की अध्यक्षता की थी और आज 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस इमारत में आखिरी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं.
ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति यहां से बनी
इसी के साथ साउथ ब्लॉक में विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के कार्यालय भी रहे हैं. इसके सामने स्थित नॉर्थ ब्लॉक वित्त और गृह मंत्रालयों के कार्यालय थे. यानी रायसीना टीले पर कैबिनेट की सबसे ताकतवर समिति सीसीएस (कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति) के पांचों सदस्य बैठते आए हैं. साउथ ब्लॉक में बने वॉर रूम में स्वतंत्र भारत के सभी चार बड़े युद्धों की रणनीति बनी. इन्हीं वॉर रूम में पिछले एक दशक में सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे बड़े सैन्य अभियानों को अंजाम देने का काम हुआ है.
रायसीना हिल्स की विहंगम तस्वीर

साउथ ब्लॉक सत्ता का सेंटर
साउथ ब्लॉक में मैंने कई प्रधानमंत्रियों को काम करते देखा है. पी वी नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, एच डी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, डॉ मनमोहन सिंह और अब नरेंद्र मोदी. हर प्रधानमंत्री का काम करने का अपना तरीका रहा है. कुछ लंबे समय तक साउथ ब्लॉक में रहे तो कुछ जल्दी ही विदा हो गए.देश-विदेश के बड़े घटनाक्रम हों या फिर राजनीतिक गतिविधियों और बड़े फैसलों के लिए बैठकों का दौर, साउथ ब्लॉक कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है. कारगिल युद्ध के दौरान सरकार के बड़े फैसले, अनुच्छेद 370 का इस्तेमाल कर राज्य सरकारों की बर्खास्तगी या देश में नोटबंदी लागू करना, सर्जिकल स्ट्राइक करना और एक देश, एक कर के लिए जीएसटी का बिल पारित होना, एक संवाददाता की हैसियत से साउथ ब्लॉक से कई बड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग की.

रायसीना हिल्स पर बनी विहंगम इमारत
जब मंत्री ने हंसते हुए कहा था- बंदर देगा जवाब!
एक वह भी दौर था जब सुरक्षा के अधिक तामझाम नहीं होते थे. अटल जी की सरकार के समय सहयोगी दलों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण थी. हम अपने कैमरे लिए साउथ ब्लॉक की सीढ़ियों पर ही खड़े होते थे. कैबिनेट की बैठक के लिए आते-जाते मंत्रियों से माइक लगा कर खबर पूछ लिया करते थे. फिर वह दौर भी आया जब पीएम के मीडिया एडवाइजर कैमरों पर बाइट देने लगे. कई बार मजाकिया दृश्य भी आते थे. लुटियन्स दिल्ली की अन्य इमारतों की ही तरह साउथ ब्लॉक में भी बहुत बंदर हैं. एक बार हम साउथ ब्लॉक के बार कैबिनेट की बैठक के कवरेज के लिए खड़े थे. तब वाजपेयी सरकार में रामकृष्ण हेगड़े वरिष्ठ मंत्री थे. वे सीढ़ियां चढ़ ही रहे थे कि अचानक एक बंदर उनके सामने आ गया. हमने हेगड़े जी से कर्नाटक को लेकर कोई राजनीतिक प्रश्न किया. इसका वे जवाब नहीं देना चाहते थे तो उन्होंने हंसते हुए बंदर की ओर इशारा कर दिया कि इस प्रश्न का जवाब वह देगा.
कारगिल और पोकरण की यादें
साउथ ब्लॉक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र से कई बार मिलने का अवसर मिला तो वहीं रक्षा मंत्रालय में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस का इंटरव्यू भी किया. कारगिल युद्ध के दौरान फर्नांडिस ने इन्हीं सीढ़ियों पर खड़े होकर घोषणा की थी कि भारत वायुसेना को भी तैनात कर रहा है. पोकरण परमाणु परीक्षण के बाद आर्थिक प्रतिबंध झेलते भारत ने अन्य देशों से अपनी ताकत के बूते इसी साउथ ब्लॉक में निगोशिएंस किए जिन्हें मैंने रिपोर्ट किया. अटल जी का निकलने का रास्ता दूसरा था जहां हमें जाने की इजाज़त नहीं थी. लेकिन कई बार आते-जाते वे कैमरों की ओर मुस्कराते हुए हाथ हिला कर जाते थे.
साउथ ब्लॉक बन जाएगा दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय
जसवंत सिंह विदेश मंत्री थे तब कंधार अपहरण कांड के दौरान हम घंटों समाचार की प्रतीक्षा में विदेश मंत्रालय के बाहर खड़े रहते थे. अरुण जेटली के रक्षा मंत्री रहते हुए प्रोटोकॉल की पाबंदियों और जकड़नों से दूर रक्षा मंत्रालय को गलियारों में चलते हुए सेनाओं के गौरवशाली इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलता था.यह संतोष की बात है कि आने वाली पीढ़ियों को भी साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक में जाने का मौका मिलेगा. इन इमारतों को सहेज कर रखा जा रहा है. युगे युगीन संग्रहालय के माध्यम से भारत के पांच हजार वर्षों के इतिहास की झलक देखने को मिलेगी. यह दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय होगा.
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