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असम टूरिज्म का वो चेहरा जिसने काजीरंगा को दुनिया के नक्शे पर पहुंचाया

सेंट स्टीफंस से पढ़े अचिंत्य बरुआ ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में बड़ा योगदान दिया. उनका निधन हो गया है.

असम टूरिज्म का वो चेहरा जिसने काजीरंगा को दुनिया के नक्शे पर पहुंचाया
  • पूर्वोत्तर के वाइल्डलाइफ टूरिज्म की तस्वीर बदलने में योगदान देने वाले अचिंत्य बरुआ का निधन हो गया है.
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को के हेरिटेज वाइल्ड लाइफ डेस्टिनेशन में शामिल है.
  • पर्यटकों के मामले में काजीरंगा आज पेरियार और रणथंभौर के बाद तीसरे पायदान पर है.

टूरिज्म से थोड़ा भी कनेक्शन रखने वाले आज काजीरंगा का नाम जानते हैं. इसकी दुनिया के चर्चित वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन में गिनती होती है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब यहां पर्यटन सुविधाएं बेहद सीमित थीं. उस समय अचिंत्य बरुआ ने जो शुरुआत की, उसने आने वाले दशकों में असम टूरिज्म की दिशा बदल दी. असम के पर्यटन जगत से अचिंत्य बरुआ का नाम हमेशा जुड़ा रहेगा क्योंकि ये वो शख्स हैं जिन्होंने पूर्वोत्तर के वाइल्डलाइफ टूरिज्म की तस्वीर बदल दी. अचिंत्य बरुआ को लोग प्यार से मंजू दा भी कहते थे. अचिंत्य बरुआ का निधन हो गया है. 

अचिंत्य बरुआ के निधन के साथ असम टूरिज्म ने अपना एक बड़ा चेहरा खो दिया है. उन्हें उस शख्स के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने काजीरंगा को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. वाइल्ड ग्लास रिसॉर्ट की शुरुआत कर उन्होंने असम में इको टूरिज्म की मजबूत नींव रखी. उनकी कोशिशों से विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में काजीरंगा आने लगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिला और असम की अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचा. पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को साथ लेकर चलने वाले बरुआ को काजीरंगा टूरिज्म को नई राह दिखाने वाला असली हीरो माना जाता है.

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Photo Credit: Wild Grass Resort

जब काजीरंगा में पर्यटन की बुनियाद रखी जा रही थी

1990 के दशक में बरुआ ने वाइल्ड ग्रास रिसॉर्ट की स्थापना की. उस समय पूर्वोत्तर भारत में पर्यटन उद्योग आज जितना विकसित नहीं था. कई विदेशी पर्यटक काजीरंगा का नाम तक नहीं जानते थे और यहां ठहरने के विकल्प भी बहुत कम थे. लेकिन अचिंत्य बरुआ ने सिर्फ होटल बिजनेस नहीं देखा. उन्होंने काजीरंगा को जंगल अनुभव के तौर पर पेश किया. उनका रिसॉर्ट लक्जरी से ज्यादा प्रकृति, स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण के साथ जुड़ाव के लिए जाना गया. यही मॉडल बाद में असम के इको-टूरिज्म की पहचान बन गया. 

काजीरंगा बना ग्लोबल वाइल्ड लाइफ डेस्टिनेशन

आज काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को के हेरिटेज वाइल्ड लाइफ डेस्टिनेशन में शामिल है. इसकी वेबसाइट के मुताबिक 1 अक्तूबर से 18 मई 2025 तक काजीरंगा में करीब साढ़े चार लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें विदेशी पर्यटकों की संख्या हजारों में थी.  यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में करीब 35 फीसद इजाफा हुआ है. पर्यटकों की संख्या में मामले में यह भारत में वाइल्ड लाइफ टूरिज्म डेस्टिनेशन में पेरियार राष्ट्रीय उद्यान और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के बाद तीसरे पायदान पर है. पिछले एक दशक में ही यहां पर्यटकों की संख्या में करीब करीब चार गुना इजाफा हुआ है. जानकार मानते हैं कि काजीरंगा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में शुरुआती निजी पर्यटन उद्यमियों की बड़ी भूमिका रही, जिनमें अचिंत्य बरुआ सबसे प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. उनके रिसॉर्ट में दुनिया भर से वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर, रिसर्चर, बर्ड वाचर और विदेशी पर्यटक आने लगे. इससे काजीरंगा का नाम ग्लोबल ट्रैवल सर्किट से जुड़ गया. 

अचिंत्य बरुआ

अचिंत्य बरुआ

सिर्फ पर्यटन नहीं प्राकृतिक संसाधनों के सुरक्षा को भी बढ़ावा

अचिंत्य बरुआ की सोच सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं थी. उनका पूरा मॉडल रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म यानी लोगों के रहने और घूमने के लिए बेहतर जगहें बनाने पर आधारित था. रिसॉर्ट में प्राकृतिक हरियाली को बचाया गया. स्थानीय पेड़-पौधों और जैव विविधता को संरक्षित रखा गया. पर्यटकों को राष्ट्रीय उद्यान के प्राकृतिक संसाधनों के बारे में जागरूक किया गया और स्थानीय युवाओं को पर्यटन और गाइडिंग से जोड़ा गया. उनके काम ने यह दिखाया कि पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं. 

स्थानीय लोगों की जिंदगी बदलने में योगदान

काजीरंगा के आसपास हजारों परिवार आज पर्यटन पर निर्भर हैं. होटल, होमस्टे, सफारी, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और स्थानीय बाजार, सभी को पर्यटन से बड़ा फायदा मिला है. अचिंत्य बरुआ उन शुरुआती लोगों में थे जिन्होंने स्थानीय समुदाय को टूरिज्म इकोसिस्टम का हिस्सा बनाया. बताया जाता है कि उन्होंने ड्राइवरों और गाइड्स के लिए अलग रहने और खाने की व्यवस्था शुरू की थी, जो उस समय बहुत अनोखी पहल मानी जाती थी. इससे टूरिज्म इंडस्ट्री में मानवीय और पेशेवर संस्कृति विकसित हुई. 

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असम की अर्थव्यवस्था को कैसे मिला फायदा?

काजीरंगा पार्क ने मौजूदा पर्यटन सीज़न के दौरान 10.9 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो 2023-24 के 8.8 करोड़ रुपये से एक उल्लेखनीय वृद्धि है. काजीरंगा सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं रहा, बल्कि असम की अर्थव्यवस्था में टूरिज्म का इंजन बन चुका है. आसपास के गांवों में होटल, दुकान, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट बिजनेस तेजी से बढ़े. हजारों डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार पैदा हुए. जानकारों का मानना है कि अगर शुरुआती दौर में अचिंत्य बरुआ जैसे लोगों ने बुनियादी ढांचों पर और भरोसा नहीं बनाया होता तो काजीरंगा आज इस स्तर तक नहीं पहुंच पाता.

असम टूरिज्म का बदलता चेहरा

आज असम सरकार इको-टूरिज्म, इलेक्ट्रिक सफारी व्हीकल, बर्ड सफारी, कम्युनिटी टूरिज्म जैसी चीजों पर जोर दे रही है. तो इन आधुनिक पहलों की बुनियाद उन लोगों ने रखी थी जिन्होंने दशकों पहले पूर्वोत्तर को पर्यटन मानचित्र पर लाने का सपना देखा था और अचिंत्य बरुआ उन्हीं लोगों में शामिल थे. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद कोई पुरस्कार नहीं, बल्कि यह है कि आज दुनिया भर के लोग काजीरंगा को जानते हैं, वहां पहुंचना चाहते हैं और असम को सिर्फ चाय या बाढ़ नहीं बल्कि वाइल्ड लाइफ, संस्कृति और टूरिज्म के लिए भी पहचानते हैं.

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