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2029 में महिला आरक्षण लागू करने के रास्ते अभी बंद नहीं, सरकार कर रही है विकल्पों पर विचार

सूत्रों के अनुसार 131वें संविधान संशोधन बिल के गिरने के बावजूद इसके साथ लाए गए केंद्र शासित प्रदेशों और परिसीमन से जुड़े दो बिलों को सरकार ने वापस नहीं लिया है और वे लोक सभा में लंबित हैं. उन्हें सरकार अपनी सुविधा के हिसाब से कभी भी मतदान के लिए आगे कर सकती है.

2029 में महिला आरक्षण लागू करने के रास्ते अभी बंद नहीं, सरकार कर रही है विकल्पों पर विचार
महिला आरक्षण बिल को पास कराने के लिए दूसरे विकल्पों पर हो रही चर्चा
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  • सरकार ने केंद्र शासित प्रदेशों और परिसीमन से जुड़े दो बिलों को वापस नहीं लिया है, वे लोकसभा में लंबित हैं
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पूरी तरह प्रभावी है, जिससे महिला आरक्षण के लिए रास्ता खुला हुआ है
  • जनगणना प्रक्रिया 2027 तक पूरी होने के बाद परिसीमन के माध्यम से 2029 चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो सकता है
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महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल लोक सभा में गिरने के बावजूद अब भी 2029 लोक सभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता खुला हुआ है. इसके लिए कई विकल्पों पर विचार चल रहा है. सरकार के आला सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है.इसे अगले लोक सभा चुनाव में लागू करने के लिए सभी दलों से चर्चा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर मॉनसून सत्र में फिर से विधेयक लाने पर भी विचार किया जा सकता है.

33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता बंद नहीं हुआ

सूत्रों के अनुसार 131वें संविधान संशोधन बिल के गिरने के बावजूद इसके साथ लाए गए केंद्र शासित प्रदेशों और परिसीमन से जुड़े दो बिलों को सरकार ने वापस नहीं लिया है और वे लोक सभा में लंबित हैं. उन्हें सरकार अपनी सुविधा के हिसाब से कभी भी मतदान के लिए आगे कर सकती है.
 सूत्रों के अनुसार इसी तरह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' (106वां संविधान संशोधन) पूरी तरह प्रभावी बना हुआ है. इसका मतलब यह है कि 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने का रास्ता बंद नहीं हुआ है.

गौरतलब है कि सरकार ने 131वें संविधान संशोधन पर चर्चा के दौरान ही गुरुवार रात को इसे अधिसूचित किया गया था. इस मूल कानून के तहत महिला आरक्षण को जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है.शुक्रवार को जो संविधान संशोधन विधेयक गिरा उसका मकसद 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 816 करना था ताकि महिला आरक्षण लागू करने में आसानी हो.

2029 के चुनाव में लागू हो सकता है महिला आरक्षण

हालांकि, इस विधेयक के गिरने से मूल बिल में दिए गए आरक्षण के कोटे पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है. वैसे भी 2023 का कानून तभी लागू होगा जब जनगणना पूरी होगी और उसके आधार पर लोक सभा सीटों का परिसीमन के जरिए नए सिरे से निर्धारण होगा. इन दिनों जनगणना की प्रक्रिया चल रही है जो 2027 तक पूरी होने की संभावना है. उसके तुरंत बाद अगर परिसीमन आयोग का गठन होकर काम पूरा हो तो 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो सकता है.जानकारों का मानना है कि सरकार के पास अब भी कुछ रास्ते हैं जिनके जरिए वह महिला आरक्षण को लागू कर सकती है. सरकार परिसीमन के माध्यम से सीटों की संख्या बढ़ा सकती है. हालांकि इसके लिए उसे संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी. वैसे विपक्षी दल जनसंख्या के आधार पर सीटों के परिसीमन पर आपत्ति कर रहे हैं. 131वें संविधान संशोधन बिल के विरोध का एक बड़ा कारण यह भी था.

समझिए सीटों को समीकरण

दूसरा वैकल्पिक रास्ता यह है कि सीटों की कुल संख्या (550 का कैप) को बढ़ाए बिना केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को बदला जाए. इस पर राजनीतिक सहमति बनाना तुलनात्मक रूप से आसान हो सकता है.सरकार के पास एक अन्य विकल्प भी है. इसके तहत अनुच्छेद 334A में संशोधन कर आरक्षण को परिसीमन की शर्त से अलग किया जा सकता है. ऐसा करने से वर्तमान 543 सीटों पर ही आरक्षण लागू हो सकेगा. यहां यह भी ध्यान देने की बात ही है कि परिसीमन पर 2026 तक फ्रीज लगा है. इस साल यह फ्रीज खत्म हो रहा है ऐसे में नए सिरे से सरकार को इस दिशा में भी सोचना होगा.

इन तमाम विकल्पों के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल राजनीतिक तौर पर विपक्ष पर हमलावर होने का फैसला किया है. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों के दौरान ही सरकार ने देश भर में विरोध प्रदर्शन कर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है. हालांकि महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक और तकनीकी पहलुओं पर सरकार के भीतर मंथन भी जारी है. आला सूत्रों के अनुसार सरकार के पास कई विकल्प हैं और विपक्षी दलों को फिर से चौंकाने की रणनीति भी है.

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