- सुप्रीम कोर्ट ने लापता लोगों की FIR मामले में राज्य सरकारों को सख्त चेतावनी दी है
- बच्चा हो या बड़ा, किसी भी लापता की सूचना मिलने पर तत्काल FIR दर्ज हो
- कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि कुछ राज्यों ने इस निर्देश को केवल बच्चों तक सीमित समझ लिया
सुप्रीम कोर्ट ने लापता लोगों के FIR मामले में राज्य सरकारों को सख्त चेतावनी दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने पर तत्काल FIR दर्ज करने का उसका निर्देश हर व्यक्ति पर लागू होगा, चाहे वह बच्चा हो या वयस्क, पुरुष हो या महिला. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने 5 अगस्त को पारित आदेश में कहा कि उसके पहले के आदेश में इस्तेमाल किया गया शब्द ‘व्यक्ति' उम्र या लिंग से सीमित नहीं है.
निर्देश केवल बच्चों तक सीमित नहीं
कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि कुछ राज्यों ने इस निर्देश को केवल बच्चों तक सीमित समझ लिया. बेंच ने कहा कि उसके पहले के आदेश की भाषा स्पष्ट और बिना किसी अस्पष्टता के थी. कोर्ट ने राज्यों की इस व्याख्या को गंभीरता से लेते हुए कहा कि निर्देश का पालन उसकी “वास्तविक भावना और शब्दों” के अनुरूप होना चाहिए.
लापता व्यक्ति की सूचना मिलने पर तुरंत दर्ज हो FIR
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने लापता व्यक्ति की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करने के निर्देश का पालन नहीं किया है, तो संबंधित मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को अवमानना नोटिस जारी किया जा सकता है.
FIR दर्ज नहीं हुई तो अवमानना नोटिस होगा जारी
अदालत ने कहा कि ऐसे अधिकारियों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कोर्ट के 22 मई के निर्देशों के बाद की गई कार्रवाई और स्थिति से संबंधित हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं, उनके संबंध में भी पीठ ने प्रथम दृष्टया अवमानना की स्थिति मानी है.
ये भी पढ़ें-नशे की बढ़ती समस्या से चिंतित है सुप्रीम कोर्ट, जानें CJI ने पंजाब का उदाहरण देते हुए क्या कहा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं