पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी किए जाने के फैसले का सुप्रीम कोर्ट परीक्षण करेगा.कोर्ट ने कहा कि केस की परिस्थितियों पर गहन विचार करना होगा.हम जानते हैं कि राज्य सरकार अपील में नहीं आएगी. बरी को चुनौती देने वाली अपील पर नवंबर में अंतिम सुनवाई होगी. कोर्ट ने मामले को 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने कहा कि किसी आरोपी के बरी होने के फैसले के खिलाफ अपील असाधारण परिस्थितियों में ही की जाती है.
CJI कोर्ट की पीठ की ओर से टिप्पणी करते हुए जस्टिस बागची ने कहा कि ये फैसले को पलटने का मामला है. हमें एक गवाह की गवाही की जांच से जुड़ी विशेष परिस्थितियों को देखना होगा. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार इस मामले में अपील लेकर नहीं आएगी, इसलिए अदालत को मामले के अन्य पहलुओं पर विचार करना होगा.
राम चंदर छत्रपति की हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम को निचली अदालत से बरी किए जाने के खिलाफ यह अपील दायर की गई है.अब सुप्रीम कोर्ट नवंबर में मामले के मेरिट पर विस्तार से सुनवाई करेगा. पंजाब -हरियाणा हाईकोर्ट से पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले मे बरी किए गए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था. छत्रपति के परिजनों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी है.
मार्च 2026 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के 2002 के पुराने मामले में बरी कर दिया था.अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए निचली अदालत के उम्रकैद के फैसले को पलट दिया, हालांकि इस मामले मे शामिल अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी गई थी. अक्टूबर 2002 में छत्रपति को उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी थी. इलाज के दौरान 21 नवंबर 2002 को उनकी मृत्यु हो गई थी.पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने जनवरी 2019 में राम रहीम और तीन अन्य (कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल) को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी.
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