सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ड्रग माफिया के नेटवर्क पर रोक लगाने और एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने सरकार को नोटिस जारी किया है. यह याचिका वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है. उन्होंने अपनी याचिका में मांग की है कि एनडीपीएस मामलों में एफएसएल की रिपोर्ट, जांच और ट्रायल की समय-सीमा तय की जाए.सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्य कांत ने नशे की समस्या को एक गंभीर समस्या बताया.
याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई ने क्या कहा
इस मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि नशे की समस्या देशभर में फैल रही एक गंभीर समस्या है. उन्होंने कहा कि देखिए कि पंजाब में क्या हो रहा है. सीजेआई कहा कि हालात बेहद चिंताजनक हैं. इसलिए कानून-व्यवस्था से जुड़ी मशीनरी को इस पर ध्यान देना होगा.
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इस मामले के याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने अदालत के समक्ष कहा कि वह अंग्रेजी और हिंदी दोनों समाचार पत्र पढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि अखबारों में एक बात लगातार सामने आ रही है कि नशे के आदी लोग अपने माता-पिता या पिता की हत्या कर दे रहे हैं.
इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि ये सभी बातें बेहद प्रासंगिक हैं.
याचिकाकर्ता की दलील क्या है
उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लेख करते हुए गोल्डन क्रिसेंट क्षेत्र और बर्मा (म्यांमार) और अफगानिस्तान में नशीले पदार्थों से जुड़ी स्थिति का भी हवाला दिया. उपाध्याय ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हो रहा है? उन्होंने दो लाख अप्राकृतिक मौतों का हवाला दिया. उन्होंने नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रभाव और उससे होने वाली गंभीर सामाजिक समस्याओं की ओर भी अदालत का ध्यान आकर्षित किया.
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और इसके व्यापक सामाजिक प्रभावों को महत्वपूर्ण मुद्दा माना.
उपाध्याय ने अपनी याचिका में ड्रग माफिया के नेटवर्क पर रोक लगाने, एनडीपीएस से जुड़े मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की मांग की गई है. यह मांग भी की गई है कि एनडीपीएस से जुड़े मामलों में फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट, जांच और ट्रायल की समय-सीमा तय की जाए और तलाशी, जब्ती, सैंपलिंग और इन्वेंट्री की वीडियोग्राफी को अनिवार्य बनाया जाए. इसके अलावा ड्रग तस्करों के लिए विशेष अदालतें और कड़ी व उचित सजा की मांग भी इस याचिका में की गई है.
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