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This Article is From Dec 17, 2025

सुप्रीम कोर्ट मीडिया रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया प्रचार को लेकर नियम बनाने पर करेगा विचार, जानिए वजह

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के साथ मिलकर संयुक्त सुझाव पेश करेगी. 

सुप्रीम कोर्ट मीडिया रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया प्रचार को लेकर नियम बनाने पर करेगा विचार, जानिए वजह
  • SC न्यायपालिका से जुड़ी घटनाओं की मीडिया रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया प्रसार को लेकर नियम बनाने पर करेगी विचार
  • यह पहल मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की घटना के बाद उठाई गई और जनवरी में इस पर सुनवाई होगी
  • केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के साथ मिलकर ऐसे नियमों का प्रस्ताव तैयार करने की बात कही है
नई दिल्ली:

 सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पर न्यायपालिका से जुड़ी घटनाओं के प्रसार को लेकर नियम बनाने पर विचार करने का संकेत दिया है. यह कदम हाल ही में हुई उस घटना के बाद उठाया गया है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश (CJI) पर जूता फेंका गया था. अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर जनवरी में सुनवाई होगी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के साथ मिलकर संयुक्त सुझाव पेश करेगी. 

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि सरकार SCBA से परामर्श कर ऐसे नियमों का प्रस्ताव देगी, जिनसे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और यदि कोई घटना होती है तो उसकी रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पर प्रसार को कैसे विनियमित किया जाए, इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश हों.

यह सुनवाई SCBA की उस याचिका पर हो रही है, जिसमें राकेश किशोर के खिलाफ कार्रवाई और ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग को नियंत्रित करने की मांग की गई है. राकेश किशोर ने हाल ही में अदालत में अनुचित व्यवहार किया था. हालांकि, इससे पहले CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया था कि वह राकेश किशोर के खिलाफ कार्रवाई के पक्ष में नहीं है, क्योंकि पूर्व CJI जस्टिस गवई ने उन्हें क्षमा करने का निर्णय लिया था.

शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दंडित करना नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और उनकी रिपोर्टिंग को लेकर नियमन पर विचार करना है. अदालत ने कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर न्यायपालिका से जुड़ी घटनाओं के प्रसार को लेकर संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे.

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