सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो.
नई दिल्ली:
- 157 साल पुराने व्यभिचार कानून को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं
- सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार कानून को बताया असंवैधानिक , कहा-चीन, जापान, ब्राजील में ये अपराध नहीं
- चीफ जस्टिस ने कहा-व्यभिचार कानून महिला के जीने के अधिकार पर असर डालता है.
- चीफ जस्टिस ने कहा-इसमें कोई संदेह नहीं कि व्यभिचार तलाक का आधार हो सकता है, मगर यह अपराध नहीं हो सकता
- CJI बोले- भारतीय संविधान की खूबसूरती ये है कि ये I, me and U को शामिल करता है
- प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने 157 साल पुराने व्यभिचार कानून को बताया मनमना
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा-जो भी सिस्टम महिला की गरिमा से विपरीत या भेदभाव करता है वो संविधान के wrath को आमंत्रित करता है. जो प्रावधान महिला के साथ गैरसमानता का बर्ताव करता है वो अंसवैंधानिक है
- पांच में से दो जज व्यभिचार कानून को रद्द करने को लेकर हुए एकमत. बहुमत से दिया फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा-यह पूर्णता निजता का मामला है, महिला को समाज की चाहत के हिसाब से सोचने को नहीं कहा जा सकता.
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Supreme Court, Supreme Court On Adultery, Aduletaration, Adultry, Adultry Law, Supreme Court Decisions, Supreme Court Decision On Adultery, CJI Deepak Mishra, Husband Is Not Woman's Master