देश की जिला और तालुका अदालतों में महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने महिला वकीलों की सुविधाओं से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा 'यह कल्पना कीजिए कि हमारी बेटियां कितनी खराब और दयनीय परिस्थितियों में काम कर रही हैं, उन्होंने अटॉर्नी जनरल से कहा कि सभी तालुका अदालतों में महिलाओं के लिए शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति की तत्काल रिपोर्ट प्राप्त की जाए. इतना ही नहीं सीजेआई ने कहा कि सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति का पता लगाएं और सुधार के लिए कदम उठाएं जाए.'
फंड का बहाना नहीं चलेगा: सुप्रीम कोर्ट
दरअसल, सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि कर्नाटक की कई तालुका अदालतों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल दो सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही राज्य सरकारों को प्रस्ताव भेजकर महिला वकीलों के लिए पानी और स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है. सीजेआई ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के चार सप्ताह के भीतर जहां भी महिला शौचालयों की आवश्यकता है, वहां निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए. इसके लिए लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि काम में देरी न हो. उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल फंड की कमी का हवाला देना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यह बुनियादी मानव अधिकारों से जुड़ा मामला है.
शराब-सिगरेट पर लगाए ज्यादा शुल्क
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने टिप्पणी की कि यदि आवश्यक हो तो सरकार संसाधन जुटाने के लिए शराब या सिगरेट जैसे उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने जैसे उपायों पर विचार कर सकती है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि वह सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल की बैठक बुलाने की योजना बना रहे हैं, जिसमें अदालतों में महिला वकीलों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की अदालतों में काम करने वाली महिला वकीलों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए और इस दिशा में तत्काल प्रभाव से कदम उठाए जाने चाहिए.'
जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
दरअसल, अदालतों में महिला वकीलों की सुविधाओं को लेकर अधिवक्ता सारिका त्यागी और देश के विभिन्न न्यायालयों में अभ्यास करने वाली महिला वकीलों के एक समूह ने एक जनहित याचिका लगाई थी. याचिकाकर्ताओं ने देश के अलग-अलग राज्यों में कई अदालतों का दौरा किया था. उसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की थी और उसी रिपोर्ट को 19 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था. इस याचिका का मुख्य उद्देश्य अदालतों में महिला वकीलों को सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है.
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