नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने असम में नागरिकता से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए विदेशी ट्रिब्यूनल और गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द कर दिया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी मामलों को नए सिरे से विचार के लिए विदेशी ट्रिब्यूनल को वापस भेज दिया.
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें केवल मामूली तकनीकी त्रुटियों, जैसे पुराने मतदाता सूची में नाम की स्पेलिंग में छोटे-मोटे अंतर के आधार पर विदेशी घोषित कर दिया गया था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता या उनकी प्रमाणिकता पर कोई राय व्यक्त नहीं की है.
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कोर्ट ने कहा- मामले के तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाएगा
कोर्ट ने कहा कि उसका फैसला केवल सीमित दायरे में है और मामले के तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाएगा. पीठ ने कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट के संबंधित फैसलों और विदेशी ट्रिब्यूनल के आदेशों को निरस्त किया जाता है. सभी मामलों को नए सिरे से सुनवाई और कानून के अनुसार निर्णय के लिए विदेशी ट्रिब्यूनल को भेजा जाता है.
सालेहा खातून और सरभानु बेगम किया जाना था डिपोर्ट
गौरतलब है कि असम के फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित की गई दो महिलाओं सालेहा खातून और सरभानु बेगम को डिपोर्ट किया जाना था. 5 जून को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों महिलाओं को डिपोर्ट करने के आदेश पर रोक लगा दी थी. अदालत ने केंद्र सरकार, असम सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक इन महिलाओं का निर्वासन नहीं किया जाएगा.
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