राज्यों के बार काउंसिल में महिला वकीलों की भागीदारी काफी कम होने पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. मंगलवार को शीर्ष अदालत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अपने-अपने राज्य के बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को सह-नामित करने के निर्देश दिए. बेंच ने राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं की बेहद कम भागीदारी पर चिंता जताते हुए कहा कि कई बार काउंसिलें अब 'पुरुषों का क्लब' बनकर रह गई हैं. अदालत ने कहा कि वकालत के पेशे में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी राज्य बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को सह-नामित करें. इसके अलावा शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि हर राज्य बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों की नियुक्ति की जाए. इनमें से एक पूर्व हाई कोर्ट की महिला न्यायाधीश हो. इसके अलावा दूसरी वरिष्ठ और प्रतिष्ठित महिला वकील हो. ये दोनों सदस्य बार काउंसिल के चुनाव से जुड़े न हों, ताकि उनकी नियुक्ति निष्पक्ष रहे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना जरूरी है. बेंच ने टिप्पणी की कि इन संस्थाओं में लंबे समय से पुरुषों का वर्चस्व रहा है और अब इसे बदलने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति है कि बार काउंसिल पुरुषों का क्लब ही बनकर रह गए हैं. अदालत ने कहा कि यह आदेश बार काउंसिलों में 30% महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है. इसके तहत 20% सीटें चुनाव के माध्यम से महिलाओं को मिलेंगी. इसके बाद 10% सीटें सह-नामित महिला सदस्यों के जरिए भरी जाएंगी.
चुनाव हारने पर भी महिला को मिले बार काउंसिल में हिस्सेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला उम्मीदवार बार काउंसिल का चुनाव हार भी गई हो, तब भी उसे सह-नामित सदस्य के रूप में नियुक्त किया जा सकता है. यदि वह अन्य निर्धारित योग्यताओं को पूरा करती हो. बता दें कि बीते कुछ सालों से शीर्ष अदालत लैंगिक समानता के मुद्दों पर काफी सक्रिय रही है.
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