- सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में महिला के सास-ससुर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है
- कोर्ट ने कहा कि सास-ससुर के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं, इसलिए मुकदमा उचित नहीं है
- कोर्ट ने कहा कि केवल झगड़ा करना BNS की धारा 498A और दहेज निषेध अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जाएगा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दहेज उत्पीड़न के एक मामले में महिला के सास-ससुर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य, अस्पष्ट और एक जैसे हैं, इसलिए इनके आधार पर मुकदमा चलाना उचित नहीं है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि शिकायत में सास-ससुर के खिलाफ सिर्फ इतना आरोप है कि वे महिला से झगड़ा करते थे.
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'केवल झगड़ा करना अपराध नहीं'
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल झगड़ा करना अपने आप में भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (क्रूरता) या दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता. महिला ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया था कि उसके पति, सास-ससुर और ननद ने दहेज के लिए उसे प्रताड़ित किया. शिकायत में यह भी कहा गया कि उनसे BMW कार और अन्य कीमती सामान की मांग की गई थी.
पटना HC ने ननद के खिलाफ रद्द की थी कार्यवाही
मामला जब पटना हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने ननद के खिलाफ कार्यवाही यह कहते हुए रद्द कर दी कि उसके खिलाफ आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं. हालांकि, सास-ससुर को राहत देने से इनकार कर दिया गया. इसके बाद सास-ससुर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की.जस्टिस विक्रम नाथ द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि एफआईआर पढ़ने से साफ है कि ननद और सास-ससुर के खिलाफ आरोप लगभग एक जैसे हैं और किसी के खिलाफ कोई विशिष्ट या अलग भूमिका नहीं बताई गई है.
सुप्रीम कोर्ट से सास-ससुर को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में किसी विशेष घटना, तारीख या स्थान का उल्लेख नहीं है. सास-ससुर के खिलाफ अलग से केवल इतना आरोप है कि वे शिकायतकर्ता से झगड़ा करते थे. यह आरोप अपने-आप में धारा 341, 323, 498A और 34 IPC तथा दहेज निषेध अधिनियम के तहत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने समान परिस्थितियों वाले लोगों के साथ अलग-अलग मानदंड अपनाए, जो सही नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल सास-ससुर के खिलाफ कार्यवाही की वैधता तक सीमित है. पति के खिलाफ चल रहा मामला कानून के अनुसार जारी रहेगा.
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