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दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं दी जमानत

दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं दी जमानत. कोर्ट ने हालांकि, पांच अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी.

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है
  • सुप्रीम कोर्ट ने मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान, शकील खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दी है
  • कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ आपराधिक साजिश और UAPA के तहत सबूत मौजूद हैं
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दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट में अपने लंबे फैसले में कई चीजों का जिक्र करते हुए दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके अलावा इस मामले में बाकी 5 आरोपियों को शीर्ष अदालत ने बेल दे दी. 

5 आरोपियों को सशर्त जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने मीरान हैदर ,गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान , मुहम्मद शकील खान और शादाब अहमद कई शर्तों के साथ जमानत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की स्थिति दिल्ली दंगों के मामले में अन्य आरोपियों की तुलना में अलग है.

यह भी पढ़ें, उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, अन्य 5 को SC ने दिया बेल

उमर और शरजील पर सुप्रीम कोर्ट की  टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों के खिलाफ पहली नजर में आपराधिक साजिश और UAPA को तहत सबूत मौजूद हैं. गौरतलब है कि 2020 दिल्ली दंगा मामले में उमर और शरजील पर लगे थे आरोप. अब इस फैसले के बाद जेल में ही रहेगा उमर खालिद और शरजील इमाम. गौरतलब है कि करीब 5 साल जेल में बिता चुका है खालिद उमर. शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले बरकरार रखा है. 

पढ़िए, सिब्बल-सिंघवी की जोरदार दलीलों के बावजूद उमर खालिद और शरजील इमाम को क्यों नहीं मिली जमानत?

दो जजों की बेंच का फैसला 

जस्टिस अवरिंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि उमर खालिद और इमाम के खिलाफ जो सबूत दिए गए हैं उससे अदालत सहमत है. कोर्ट ने कहा कि कार्यवाही के इस चरण में उनकी जमानत पर रिहाई उचित नहीं है. 

10 दिसंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था 

10 दिसंबर को, शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू, और आरोपियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिबल, अभिषेक सिंहवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की अलग-अलग याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
 

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