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आवारा कुत्तों का क्‍या होगा? सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला, डॉग फीडर्स की जिम्‍मेदारी हो सकती है तय

Supreme Court hearing on stray dogs: आवारा कुत्तों के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि कुत्‍ते के काटने से मौत होने पर डॉग फीडर्स भी जिम्मेदार तय हो सकती है.

आवारा कुत्तों का क्‍या होगा? सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला, डॉग फीडर्स की जिम्‍मेदारी हो सकती है तय
  • सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट मामलों पर फैसला सुनाने वाला है
  • कोर्ट ने गैरआक्रामक और रेबीज मुक्त कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ने की अनुमति दी है
  • राज्यों और एनएचएआई को हाईवे, अस्पताल, स्कूल के आसपास से आवारा जानवर हटाने के निर्देश दिए गए हैं
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नई दिल्‍ली:

आवारा कुत्तों की देशभर में बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा. सुप्रीम इस मामले में डॉग लवर्स से लेकर याचिकाकर्ताओं तक की सभी दलीलें सुन चुका है. अब बस आवारा कुत्‍तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी, जिसका कई लोग बेसर्बी से इंतजार कर रहे हैं. जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने 29 जनवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस दौरान राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने अपनी दलीलें रखी थीं.

सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को दिये थे निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से पकड़ा गया था. बाद में मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया. 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में राज्यों और एनएचएआई  को हाईवे, अस्पताल, कॉलेज, स्कूल और दूसरे संस्थानों के आसपास से आवारा जानवर हटाने को कहा था.

कुत्‍ता काटे तो किसकी जिम्‍मेदारी? 
 

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो उस क्षेत्र के नगर निकाय के साथ ही कुत्‍तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय की जा सकती है. ऐसा नहीं हो सकता कि कोई शख्‍स किसी कुत्‍ते को रोजाना खाना खिलाए, लेकिन जब वो किसी शख्‍स को काट ले तो उसकी कोई जिम्‍मेदारी न हो. कोर्ट ने कहा था, "हम इस मामले में जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है." सुप्रीम कोर्ट ने असम में कुत्तों के काटने के आंकड़ों पर भी हैरानी जताई और कहा कि इन आंकड़ों को देखिए. ये चौंकाने वाले हैं. 2024 में 1.66 लाख घटनाएं हुईं और 2025 में (केवल जनवरी में ही) 20,900 घटनाएं दर्ज की गईं. ये बेहद भयावह है. कोर्ट ने अस्पष्ट बयान देने वाले राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी. 

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कब और कैसे शुरू हुआ मामला? 

आवारा कुत्‍तों से जुड़ा मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था. इस दौरान आवारा कुत्‍तों के काटने के कई वीडियो वायरल हो रहे थे. इन वीडियो में आवारा कुत्‍ते बच्‍चे, बुर्जुगों और महिलाओं पर हमला करते हुए नजर आ रहे हैं. 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में से 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था. इसके बाद देशभर के डॉग लवर्स ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिये थे. दिल्‍ली में इंडिया गेट के आसपास तक डॉग लवर्स विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए थे. इसके बाद 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया था. 

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