- UAE के बरकाह न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमले से कोई रेडिएशन रिसाव या गंभीर नुकसान नहीं हुआ है
- परमाणु ऊर्जा संस्थान की अध्यक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे संघर्ष क्षेत्रों से दूर रखने की अपील की
- इंटरनेशनल न्यूक्लियर एनर्जी एजेंसी ने पुष्टि की कि सुरक्षा प्रणाली ठीक है, केवल एक बाहरी जनरेटर में आग लगी थी
संयुक्त अरब अमीरात के बरकाह न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, जिसकी वजह से इंटरनेशल न्यूक्लियर इंडस्ट्री संघर्ष के हालात में नागरिक रिएक्टरों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई है. रेडिएशन रिसाव की कोई रिपोर्ट नहीं होने के बावजूद एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह घटना दुनियाभर में सैन्य खतरों से परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा की तत्काल जरूरत को रेखांकित करती है. जानें एनडीटीवी के साइंड एडिटर से वाशिंगटन डीसी स्थित न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट की अध्यक्ष और परमाणु इंजीनियर मारिया कोर्सनिक ने इसे लेकर क्या कहा.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से खास अपील
एनडीटीवी को दिए एक खास इंटरव्यू में वाशिंगटन स्थित परमाणु ऊर्जा संस्थान की अध्यक्ष और सीईओ मारिया कोर्सनिक ने इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक खास अपील की. IAEA की तरफ से दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कोर्सनिक ने कहा कि हमारी जानकारी के मुताबिक, संयंत्र सही से काम कर रहे हैं और किसी भी सिक्योरिटी सिस्टम को कोई नुकसान नहीं हुआ है. सिर्फ एक बैकअप जनरेटर तक ही हमले का प्रभाव देखा गया. ये बात उन्होंने नई दिल्ली में भारत के विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ भारत के परमाणु क्षेत्र में निजी निवेश के अवसरों पर चर्चा के दौरान एनडीटीवी से कही.

बरकाह न्यूक्लियर प्लांट हमले में कोई नुकसान नहीं
बता दें कि एक ड्रोन ने अबू धाबी के अल धाफरा क्षेत्र में स्थित बरकाह न्यूक्लियर प्लांट के बिजली जनरेटर पर हमला किया, जिससे आग लग गई, हालांकि कोई घायल नहीं हुआ और न ही कोई रिसाव हुआ. UAE के अधिकारियों के मुताबिक, परमाणु संचालन पर इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी रिएक्टर इकाइयां सामान्य रूप से काम करती रहीं. बता दें कि यह घटना ईरान संघर्ष के दौरान सीजफायर के दौरान घटी. बता दें कि खाड़ी क्षेत्र में अहम ऊर्जा अवसंरचनाओं को ड्रोन हमलों से तेजी से निशाना बनाया जा रहा है.
सिर्फ बाहरी जनरेटर में आग लगी
वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल न्यूक्लियर एनर्जी (आईएईए), वियना, ऑस्ट्रिया ने पुष्टि की कि रिसाव का स्तर नॉर्मल था और सिक्योरिटी सिस्टम भी बिल्कुल सही था, हालांकि हमले की वजह से एक बाहरी जनरेटर में आग लगी और एक यूनिट को कुछ समय के लिए इमरजेंसी डीजल बिजली पर निर्भर रहना पड़ा. हालांकि कोर्सनिक ने परमाणु सुरक्षा प्रणालियों की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि यह एक गंभीर चिंता का विषय है. वाणिज्यिक परमाणु संयंत्रों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, उनको संघर्ष से दूर रखा जाना चाहिए.
संयंत्रों के आसपास ज्यादा संयम बरतने की जरूरत
बता दें कि कोर्सनिक की टिप्पणियां आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से मिलती-जुलती हैं. उन्होंने भी परमाणु सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि को अस्वीकार्य बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे संयंत्रों के आसपास ज्यादा से ज्यादा संयम बरता जाना चाहिए. ऐसे समय में जब भारत और अमेरिका नागरिक परमाणु सहयोग को और मजबूत करने में जुटे हैं और एक हाईलेवल अमेरिकी डेलिगेशन भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के तरीकों पर बातचीत कर रहा है,UAE के बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए भीषण ड्रोन हमले ने पूरी दुनिया का ध्यान संघर्ष क्षेत्रों में परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा की ओर एक बार फिर आकर्षित किया है.
ये भी पढ़ें-UAE में न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास ड्रोन हमले से लगी आग, शक के घेरे में ईरान और उसके प्रॉक्सी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं