- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कट मनी प्रथा को खत्म करने और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है
- शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बिना डिजिटल दस्तावेजों के रिश्वत लेने वालों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा
- उन्होंने ऐलान किया कि ममता बनर्जी सरकार में धर्म के आधार पर दी जाने वाली सरकारी मदद एक जून से बंद कर दी जाएगी
पश्चिम बंगाल में कट मनी का मुद्दा विधानसभा चुनाव के दौरान काफी चर्चा में रहा. टीएमसी पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि लोगों को सरकारी लाभ लेने के लिए ममता सरकार को कट मनी देनी पड़ती थी. बंगाल में बीजेपी की सरकार आने और सीएम बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी एक्शन मोड में हैं. सीएम शुभेंदु ने खुद ये आश्वासन दिया है कि अगर कट मनी के सबूत मिलते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. हालांकि बिना सबूत दिखाए गिफ्तारी नहीं होगी. उन्होंने भवानीपुर में जनता से जबरन वसूली और ‘कट मनी' प्रथा को खत्म करने का वादा किया.
रिश्वत लेते पकड़ा गया तो होगा एक्शन
सीएम शुभेंदु ने कहा कि अगर कोई सरकार की किसी भी योजना का लाभ उठाते समय रिश्वत देता है, तो डॉक्यूमेंट्स दिखाने पर ही एक्शन लिया जाएगा. इसके साथ ही आरोपी को भी तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन इसके लिए लेनदेन के डिजिटल दस्तावेज़ दिखाने होंगे. भारतीय दंड संहिता के तहत इन डॉक्यूमेंट्स को वैध माना जाएगा.
‘कट मनी' प्रथा को खत्म करने का वादा
शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि उनका सियासी करियर खत्म हो गया है. उन्होंने अपने गढ़ भवानीपुर में भी जनाधार खो दिया है.इसके साथ ही उन्होंने जबरन वसूली और ‘कट मनी' प्रथा को खत्म करने का वादा किया. शुभेंदु अधिकारी ने ये बात भवानीपुर के कैमक स्ट्रीट पर आयोजित एक धन्यवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही. शुभेंदु ने दावा किया कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से बांग्लादेश की जमात” (राजनीतिक दल बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी) की रातों की नींद उड़ गई है.
कट मनी क्या है?
कट मनी अनऑफिशियल तरीके से लिया जाने वाला कमीशन होता है. इसे गैरकानूनी तरीके से कमाया गया पैसा कहा जा सकता है. ममता सरकार के दौरान बंगाल के नेताओं पर आरोप लगते थे कि वे लोग अपने इलाके के काम के लिए सरकारी अनुदान में से कट मनी मांगते थे. यह पैसा पूरी तरह से कैश में लिया जाता था. इसके लेन-देन का कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद नहीं होता.
धर्म के आधार पर दी जाने वाली सरकारी मदद बंद
बता दें कि बंगाल सरकार ने धर्म के आधार पर दी जाने वाली सरकारी मदद को बंद करने का फैसला लिया है. ये फैसला 1 जून से लागू होगा. इसका मतलब हुआ कि 1 जून से बंगाल में इमामों-मुअज्जिनों को मिलने वाला भत्ता और पुजारियों का मानदेय बंद हो जाएगा. इन सारी योजनाओं को ममता बनर्जी सरकार में शुरू किया गया था. ममता सरकार इमामों को हर महीने 3,000 रुपये, मुअज्जिनों को 1,500 और 2,000 रुपये का भत्ता देती थी.
'ममता का सियासी सफर खत्म'
बंगाल सीएम ने कहा कि वह न तो डरते हैं और न ही उनके सामने झुकेंगे. उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह उस बूथ पर भी बढ़त हासिल करने में नाकाम रहीं, जहां उन्होंने अपना वोट डाला था. बंगाल की जनता ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है. उनका सियासी करियर खत्म हो गया है, टाटा, बाय-बाय. बता दें कि शुभेंदु ने भवानीपुर में ममता को 15 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया है.
मुख्यमंत्री शुभेंदु ने दावा किया कि बीजेपी ने मित्रा इंस्टीट्यूशन मतदान केंद्र के उन सभी चार बूथ पर बढ़त हासिल की, जहां ममता ने अपना वोट डाला था. उन्होंने पूर्व मंत्री फिरहाद हाकिम पर भी हमला बोलते हुए दावा किया कि चेतला गर्ल्स हाई स्कूल के पांच बूथ पर बीजेपी को बढ़त हासिल हुई, जहां हाकिम ने मतदान किया था.
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