Karur Stampede Case: करूर भगदड़ मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता DMK पर टिप्पणी कि क्या आप सुप्रीम कोर्ट से चाहते हैं कि वो निर्देश दें कि सीएम को क्या करना चाहिए? DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके CM विजय और मंत्रियों की बयानबाजी रोकने की मांग की थी.साथ ही उन्होंने खुद को पक्षकार बनाने की भी मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि भगदड़ के पीड़ितों से मुलाकात गवाहों को प्रभावित करना कैसे मान सकते हैं. सख्त टिप्पणियां करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने द्रमुक ने करूर भगदड़ माले में गवाहों को विजय सरकार के मंत्रियों द्वारा प्रभावित करने के आरोप वाली याचिका वापस लेने कहा और ऐसा नहीं करने पर याचिका को खारिज करने की चेतावनी भी दी, जिसके बाद डीएमके ने याचिका वापस ले ली.
डीएमके ने याचिका में की थी ये मांग
गौरतलब है कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के आरएस भारती ने करूर भगदड़ केस में खुद को पक्षकार बनाने की मांग की थी. उन्होंने याचिका में कहा था कि तमिलनाडु के सीएम विजय और अन्य मंत्रियों को इस मामले में चल रही CBI जांच पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाना चाहिए और सीबीआई जांच पूरी होने तक वे इस मामले में कोई भी सार्वजनिक टिप्पणी न करें. इस याचिका में ये भी कहा गया है सीएम विजय का 10 जुलाई के करीब मृतकों और घायल परिवारों को सरकारी सहायता और अन्य लाभ देने का कार्यक्रम है. हमें पीड़ितों को सरकारी सहायता में आपत्ति नहीं है, लेकिन ये परिवार सीबीआई जांच में अहम गवाह भी हैं. ऐसे आरोपियों या राजनीतिक कार्यपालिका के सीधे संपर्क से केस की जांच पर प्रभाव पड़ सकता है. इस याचिका में ये भी उल्लेख किया गया है कि जब अक्टूबर 2025 में ये कोर्ट में लंबित था तब विजय ने पीड़ितों को 20 -20 लाख की आर्थिक सहायता दी थी. इसलिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय उपायों और सीबीआई को जानकारी के बाद ही ये सहायता दी जाए.
क्या है करूर भगदड़ मामला
बता दें कि 27 सितंबर 2025 को टीवीके यानी सीएम विजय की एक जनसभा के दौरान करूर में भगदड़ मच गई थी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और 142 लोग घायल हुए थे. सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इसकी जांच सीबीआई को सौंपी थी.
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