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CWG 2026: सबसे बड़ी उम्मीद गुरिंदरवीर सिंह क्वालीफाइंग राउंड से ही बाहर, इन 4 बड़ी वजहों ने किया नुकसान

करीब दो महीने पहले ही गुरिंदरवीर सिंह रांची में 100 मी. फर्राटा में भारत के सबसे तेज एथलीट बने, तो वह वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गए, लेकिन ग्लास्गो में वह मेन राउंड के लिए ही क्वालीफाई नहीं कर सके

CWG 2026: सबसे बड़ी उम्मीद गुरिंदरवीर सिंह क्वालीफाइंग राउंड से ही बाहर, इन 4 बड़ी वजहों ने किया नुकसान
CWG 2026: गुरिंदरवीर का क्वालीफाई न करना भारतीयों को निराश कर गया
Source: scocial media

Why Gurindervir Singh couldn't qualify: करीब दो महीने पहले ही रांची में 100 मी. फर्राटा धावक गुरिंदरवीर सिंह ने इस वर्ग में भारत के इतिहास के सबसे तेज धावक बनने का तमगा हासिल किया, तो वह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए. और बनते भी क्यों न! गुरिवंदरवीर ने सौ मी में नया मानक स्थापित करते हुए 10.09 सेकेंड का समय निकाला. और वह इस रेस में 10.10 सेकेंड का बैरियर तोड़ने वाले पहले भारतीय धावक बने, लेकिन करीब दो महीने बाद ग्लास्गो में राष्ट्रकुल खेलों में सोमवार को वह करोड़ों उम्मीदों पर फिस्स हो गए और क्वालीफिकेशन राउंड में ही बाहर हो गए. और अगर ऐसा हुआ, तो इसके पीछे कई बड़ी वजह रहीं. चलिए बारी-बारी से वो कारण जानिए, जो भारतीय स्टार एथलीट के खिलाफ गए

1. असामान्य क्वालिफिकेशन फॉर्मेट

आमतौर पर होता यह है कि अपनी हीट में पहले या दूसरे नंबर पर रहने वाले धावक सीधे अगले दौर के लिए क्वालीफाई कर जाते हैं. लेकिन ग्लास्गो में 11 अलग-अलग हीट में कुल 76 धावक थे. और नियम यह था कि हीट में पोजीशन चाहे कुछ भी हो, लेकिन सबसे तेज समय निकालने वाले 17 एथलीट ही आगे जाएंगे. गुरिंदरवीर हीट में दूसरे नंबर पर रहे, लेकिन उनकी टाइमिंग (10.39) हीट्स के बाकी धावकों और रांची में निकाले समय से कहीं ज्यादा पीछे रह गई

2. अनुकूल हवा का फायदा न उठा पाना 

रेस के दौरान 1.5 मीटर/सेकंड की रफ्तार से अनुकूल हवा एथलीटों के पीछे से चल रही थी, जो धावक की गति बढ़ाने में मदद करती है. लेकिन इसके बावजूद गुरिंदरवीर इस प्राकृतिक मदद को एक बेहतर टाइमिंग में नहीं बदल सके और अपने नेशनल रिकॉर्ड (10.09s) से बहुत पीछे रह गए.

3.  अंतरराष्ट्रीय स्तर का मानसिक दबाव 

गुरिंदरवीर पहली बार इस स्तर की प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे. और उन पर उम्मीदों का दबाव भी बहुत ज्यादा था. निश्चित रूप से जमैका के रोहन वॉटसन जैसे विश्व स्तरीय धावकों के साथ दौड़ते समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो मानसिक दृढ़ता चाहिए होती है, उसमें वे थोड़े पीछे छूट गए. और शीर्ष 17 एथलीट में जगह बन बनाने के पीछे यह भी एक बड़ी वजह रही

4. फिनिशिंग और स्ट्राइड फ्रीक्वेंसी में कमी 

खेल विश्लेषकों ने गुरिंदरवीर की समीक्षा करते हुए पाया कि शुरुआती 40 मीटर तक गुरिंदरवीर की प्रतिक्रिया और रफ्तार अच्छी थी, लेकिन रेस के अंतिम हिस्से (60 से 100 मीटर के बीच) में जहां धावक को अपनी 'टॉप-एंड स्पीड' को बनाए रखना होता है, वहां उनके कदमों की रफ्तार धीमी पड़ गई. यह रफ्तार क्यों धीमी पड़ी, इसकी वजहों का भी अध्ययन करने की जरूरत है. और यह अब गुरिंदरवीर ही बताएंगे कि क्या वह आखिरी पलों में नर्वस हो गए. 


 

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