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कॉलेज कैंपसों में आवारा कुत्ते रखने की छूट, लेकिन NALSAR को माननी होगी सुप्रीम कोर्ट की ये शर्त

Supreme Court On Stray Dogs: संस्थान ने सार्वजनिक सुरक्षा के हित में शैक्षणिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कैंपस में आवारा कुत्ते रखने की परमिशन मांगी थी. NALSAR की दलील जानें.

कॉलेज कैंपसों में आवारा कुत्ते रखने की छूट, लेकिन  NALSAR को माननी होगी सुप्रीम कोर्ट की ये शर्त
कॉलेज कैंपसों में ऐवारा कुत्ते रखने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला.
  • सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR को कॉलेज कैंपसों मेंआवारा कुत्तों को रखने की छूट शर्त के साथ दी है
  • अदालत ने कहा कि कुत्तों से मानव सुरक्षा प्राथमिकता है, काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
  • छात्र संगठन और पशु कल्याण समूह शैक्षणिक संस्थानों में कुत्तों की जिम्मेदारी कानूनी रूप से उठाएं
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर डॉग लवर्स की याचिकाएं मंगलवार को खारिज करते हुए नसबंदी, टीकाकरण, सार्वजनिक जगहों पर उन्हें खाना न खिलाने जैसे अपने आदेश को बरकरार रखा. अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि देशभर में कुत्ता काटने की घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता. इन घटनाओं में महिलाओं, बच्चों को बुरी तरह घायल किया गया है. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR को आवारा कुत्तों को कॉलेज कैंपसों में रखने की छूट दे दी है, लेकिन तब जब छात्र संगठन उनको रखने की जिम्मेदारी खुद उठाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशु कल्याण समूह और छात्र संगठन शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों में आवारा कुत्तों को अपनी जिम्मेदारी पर ही रखें या खाना दें. उनको इस बात तो स्वीकार करना होगा कि वहां कुत्ते के काटने की किसी भी घटना या उससे संबंधित नुकसान के लिए वे खुद कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगे. 

कुत्तों से पहले मानव सुरक्षा की जिम्मेदारी

आवारा कुत्तों को लेकर दिए अपने फैसले में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारी की बेंच ने कहा कि आवारा कुत्तों की सुरक्षा को मानव सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से अलग नहीं किया जा सकता. परिसर-आधारित किसी भी पशु कल्याण गतिविधि के लिए जवाबदेही की शर्त होगी. 

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छात्र संगठनों को लेनी होगी कैंपस में कुत्तों की जिम्मेदारी

कोर्ट ने कहा कि ऐसे जानवरों के अधिकार या हित, मानव जीवन और उनकी सुरक्षा की रक्षा से ऊपर नहीं हो सकते. अगर कोई छत्र संगठन या  पशु कल्याण समूह किसी ​​शैक्षणिक संस्थान कैंपस में आवारा कुत्तों को रखना चाहता है तो उसे पहले संबंधित संस्थान के प्रमुख को इसे लेकर हलफनामा देना होगा और अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करना होगा. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो फिर कैंपस में आवारा कुत्तों को पालने या खिलाने-पिलाने की परमिशन नहीं दी जा सकती. 

NALSAR को प्रायोगिक आधार पर कैंपस में कुत्ते रखने की अनुमति

बेंच ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस निर्देश का पालन नहीं करने पर संबंधित संस्थान के प्रमुख के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. कोर्ट ने NALSAR को प्रायोगिक आधार पर कैंपस में कुत्ते रखने की अनुमति दी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त कुत्ते रखने की परमिशन हैदराबाद स्थित NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी की ओर से पेश दलीलों पर विचार करते हुए दिया.

NALSAR ने मांगी थी आवारा कुत्ते कैंपस में पालने की परमिशन

संस्थान ने सार्वजनिक सुरक्षा के हित में शैक्षणिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कैंपस में आवारा कुत्ते रखने की परमिशन मांगी थी. NALSAR ने कहा कि उसने अपने पशु विधि केंद्र के माध्यम से मानवीय आवारा कुत्ता प्रबंधन को संस्थागत रूप दिया है, जो छात्रों और कर्मचारियों को शामिल करते हुए नसबंदी, टीकाकरण और जागरूकता कार्यक्रम चलाता है.

उसने तर्क दिया कि ऐसी पहल पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के अनुरूप सामाजिक प्रयोगों के रूप में काम कर सकती हैं, साथ ही जानवरों के प्रति सहानुभूति को बढ़ावा दे सकती हैं. उनकी इस दलील को सीमित अपवाद मानते हुए कोर्ट ने  NALSAR के कैप्चर-स्टेरिलाइज़-वैक्सीनेट-रिलीज़ (CSVR) मॉडल को प्रायोगिक आधार पर जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन सख्त जवाबदेही की शर्तें लागू करने के बाद ही. 

ये भी पढ़ें-कुत्ते के काटने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट इतना सख़्त क्यों? आंकड़ों से समझिए पूरी कहानी

लेखक के बारे में
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नूपुर डोगरा
Legal Correspondent
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