कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जारी विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सत्तारूढ़ दल डीएमके ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी तुरंत छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि सुप्रीम Court के 2018 के फैसले के बावजूद राज्य को उसका पूरा हिस्सा नहीं मिल पाया है.
याचिका में कहा गया है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड (क्यूसेक) पानी छोड़ने का निर्देश दिया था. हालांकि कर्नाटक इस आदेश का पूरी तरह पालन करने में नाकाम रहा है. इसके कारण तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में खेती पर गंभीर असर पड़ा है.
डीएमके ने अदालत को बताया कि पानी की कमी से लाखों किसान मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. धान सहित कई फसलों की बुवाई और सिंचाई प्रभावित हुई है जिससे किसानों की आजीविका पर संकट गहरा गया है. पार्टी ने मांग की है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट अपने पहले के फैसले को सख्ती से लागू कराने का निर्देश दे.
याचिका में यह भी कहा गया है कि 26 जुलाई तक तमिलनाडु को 9.46 टीएमसी पानी मिल जाना चाहिए था, लेकिन निर्धारित मात्रा नहीं मिली. इस कमी को पूरा करने के लिए डीएमके ने कर्नाटक सरकार को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 7,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश देने की मांग की है.
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