- IIT दिल्ली में M.Sc छात्र की मौत के बाद छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला, डीन के इस्तीफे की मांग हुई.
- जामिया में एडमिशन में गड़बड़ी को लेकर 24 अगस्त से प्रोटेस्ट जारी है.
- पटना में सरकारी परीक्षा और पुणे में हॉस्टल के मसले पर आदिवासी छात्र विरोध कर रहे हैं.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद से देश के अलग-अलग हिस्सों से स्टूडेंट प्रोटेस्ट की खबरें आ रही हैं. 20 जुलाई 2026 के बाद हुए बड़े स्टूडेंट प्रोटेस्ट की बात करें तो झारखंड के रांची और बिहार पटना सहित कई इलाकों से प्रदर्शन की खबरें आईं. लेकिन मौजूदा वक्त में भी देश के कई हिस्सों में छात्रों के प्रदर्शन जारी हैं. इसमें दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और बिहार जैसे सूबे शामिल हैं.
आईआईटी दिल्ली
भारत के सबसे मशहूर शिक्षण संस्थानों में से एक, आईआईटी दिल्ली में एक छात्र की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हो रहा है. M.Sc. Physics के एक 31 साल के छात्र की शनिवार, 22 अगस्त की सुबह कैंपस की एक बिल्डिंग की छठी मंजिल से कूदकर कथित तौर पर मौत हो गई. इसके बाद से ही संस्थान के छात्रों में गुस्सा है और वे प्रोटेस्ट कर रहे हैं. छात्रों की मांग है कि स्टूडेंट वेलफेयर की एसोसिएट डीन प्रोफेसर श्रीदेवी उपाध्याउला इस्तीफा दें.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मंगलवार सुबह, 500 से ज्यादा छात्र लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में इकट्टा हुए, जबकि 2,000 और छात्र बाहर इकट्ठा हुए. छात्रों ने पूरी रात कैंडललाइट मार्च किया, कैंपस में घूमते रहे और सुबह तक अपना विरोध जारी रखा.
छात्रों ने डीन, एसोसिएट डीन (स्टूडेंट वेलफेयर), एसोसिएट डीन (हॉस्टल मैनेजमेंट) और फिजिक्स डिपार्टमेंट के हेड के इस्तीफे, छात्र की मौत की स्वतंत्र जांच और उनके परिवार के लिए करीब 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग की है. उनका कहना है कि 2023 के बाद से कैंपस में कुमार की मौत आठवीं आत्महत्या है.
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि सुबह करीब 8:33 बजे किशनगढ़ पुलिस स्टेशन को एक PCR कॉल मिली, जिसमें बताया गया कि IIT दिल्ली कैंपस में एक छात्र बिल्डिंग से कूद गया है.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया
दिल्ली के सबसे ज्यादा मशहूर और जाने-माने विश्वविद्यालयों में से एक जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) के एक छात्र पिछले कई दिनों से कैंपस में प्रोटेस्ट कर रहे हैं. छात्रों ने यूनिवर्सिटी के स्पॉट एडमिशन प्रोसेस में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि वेटिंग लिस्ट में नीचे वाले उम्मीदवारों को एडमिशन दे दिया गया, जबकि ऊंची रैंक वाले कैंडिडेट्स को छोड़ दिया गया. इसके अलावा, छात्रों ने मेरिट और वेटिंग लिस्ट जारी करने के तरीके और खाली सीटों को भरने के लिए अपनाए गए मानदंडों पर सवाल उठाए गए हैं.
जामिया में यह विरोध प्रदर्शन 24 अगस्त को यूनिवर्सिटी की सेंट्रल कैंटीन से शाम 5 बजे शुरू हुआ. छात्र मेरिट लिस्ट के नियमों के खिलाफ हुए JMI एडमिशन को रद्द करने, J&K के लिए आरक्षण बहाल करने और परीक्षा नियंत्रक (COE) के इस्तीफे जैसी मांगें कर रहे हैं.
पटना में छात्रों का हल्लाबोल!
मंगलवार, 25 अगस्त को पटना में फिर से तनाव फैल गया, जब सैकड़ों प्रदर्शनकारी छात्र गांधी मैदान से बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास की ओर मार्च करने लगे. छात्रों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़े और डाक बंगला चौराहे पर सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी झड़प हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. कई छात्रों को हिरासत में लिया गया और झड़प में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि हंगामे के दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई.

प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों के घायल होने की भी खबरें आईं.
Photo Credit: PTI
25 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ यह मार्च, भर्ती परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों को लेकर गर्दनीबाग में चल रहे आंदोलन का ही एक हिस्सा था. छात्र प्रस्तावित चौथी शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) में बदलाव की मांग कर रहे हैं, जिसमें सिंगल-स्टेज PT-मेन्स परीक्षा, नेगेटिव मार्किंग को हटाना और 100 फीसदी डोमिसाइल-आधारित भर्ती शामिल है.
प्रदर्शनकारी छात्रों ने डाक बंगला की ओर बढ़ने से पहले जेपी गोलंबर पर बैरिकेड्स तोड़े, जहां मेटल शील्ड्स का सुरक्षा घेरा लगाया गया था. जैसे ही भीड़ आगे बढ़ने की कोशिश में बैरिकेड्स को हटाने लगी, डाक बंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हाथापाई हो गई.
अभी का विवाद मुख्य रूप से TRE-4 के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा घोषित परीक्षा पैटर्न को लेकर है. आयोग ने कहा है कि अब परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाएगी और ऑब्जेक्टिव एग्जामों में निगेटिव मार्किंग जारी रहेगी.
हालांकि, छात्र चाहते हैं कि TRE-4 बिना नेगेटिव मार्किंग के एक ही परीक्षा के तौर पर आयोजित हो. उन्होंने यह चिंता भी जताई है कि दो चरणों वाली प्रक्रिया से नॉर्मलाइजेशन की स्थिति बन सकती है, जिसे वे एक विवादित मुद्दा मानते हैं.
पुणे में आदिवासी छात्रों का धरना
महाराष्ट्र के पुणे में पिछले 12 दिनों से आदिवासी छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है. छात्र मांग कर रहे हैं कि आदिवासी हॉस्टलों के संबंध में महाराष्ट्र सरकार के सरकारी आदेश को वापस लिया जाए और एक संशोधित आदेश जारी किया जाए. रविवार को छात्रों ने पुणे में छात्राओं के लिए एक सुरक्षित और अच्छी सुविधाओं वाले केंद्रीय हॉस्टल भवन की मांग और हॉस्टलों में खाली पदों को तुरंत भरने की मांग को लेकर एक रैली आयोजित की. अन्य मांगों में हॉस्टल परिसर में सुरक्षा गार्ड और सफाई कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है.
विपक्षी नेताओं ने महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाया है कि 12 दिन गुजर जाने के बाद सरकार ने छात्रों पर ध्यान नहीं दिया है. राहुल गांधी के पुणे विजिट के वक्त एक छात्रा ने उनसे बात करते हुए प्रोटेस्ट के बारे में जानकारी दी थी. मंगलवार को राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अपील की. उन्होंने सीएम से कहा कि आप प्रदर्शनकारी आदिवासी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलें और उनकी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करें. इन समस्याओं में सरकारी हॉस्टल में रहने के लिए 30 साल की उम्र सीमा जैसी कठोर शर्तों में ढील देना भी शामिल है.
NCP (SP) विधायक रोहित पवार और वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश अंबेडकर के बेटे सुजात अंबेडकर सहित कई नेताओं ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और छात्रों को अपना समर्थन दिया. मंगलवार को NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले ने छात्रों से फोन पर बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार के साथ इस मामले पर चर्चा की जाएगी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं