- सोमनाथ मंदिर पर विदेशी आक्रांताओं ने 1000 साल में कई बार हमला किया, मंदिर हर बार पुनर्निर्मित होकर भव्य हुआ
- PM मोदी सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन हैं और वे मंदिर के विभिन्न समारोहों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं
- सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रारंभ किया
सौराष्ट्र तट पर स्थित भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर का इतिहास गौरव और संघर्ष दोनों का गवाह है. विदेशी आक्रांताओं ने अपनी सत्ता और लूट की भूख मिटाने के लिए इस पवित्र धाम पर कई बार हमला किया, लेकिन हर बार यह मंदिर पहले से ज्यादा भव्यता के साथ खड़ा हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल (11 मई) सोमनाथ मंदिर जा रहे हैं. वह यहां आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव' में भाग लेंगे. यह समारोह भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है. पीएम मोदी इस अवसर पर 'विशेष महा पूजा', 'कुंभाभिषेक' और 'ध्वजारोहण' समारोह में भाग लेंगे. बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं.
1000 साल में कई बार विदेशी हमले, हर बार फिर खड़ा हुआ आस्था का प्रतीक
सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले को पूरे 1000 साल हो गए हैं. 6 जनवरी 1026 को महमूद गजनवी 30,000 सैनिकों के साथ सोमनाथ पहुंचा. तीन दिन की भीषण लड़ाई के बाद 8 जनवरी को उसकी सेना किले में घुस गई. मंदिर की रक्षा कर रहे 50,000 से ज्यादा निहत्थे भक्तों का नरसंहार किया गया. गजनवी ने मंदिर का सोना, चांदी और रत्न लूटे. करीब 6 टन सोना और 2 करोड़ दीनार की संपत्ति गजनी ले जाई गई. उसने शिवलिंग को तोड़कर टुकड़े गजनी की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवा दिए. इस हमले के 1000 साल पूरे होने पर 8-11 जनवरी 2026 तक 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया जा रहा है. गजनवी के हमले के बाद राजा भीमदेव और परमार राजा भोज ने मंदिर बनवाया था.
31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ मंदिर के पवित्र प्रांगण एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना. तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और एल.के. आडवाणी ने साथ मिलकर, सोमनाथ के पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ मनाई थी. BJP की पहली यात्रा जो अयोध्या में राम जन्मभूमि के इर्द-गिर्द केंद्रित थी, ‘राम रथ यात्रा' 25 सितंबर, 1990 को सोमनाथ से शुरू हुई थी.
सोमनाथ मंदिर में कब-कब गए PM मोदी
- 10-11 जनवरी 2026: प्रधानमंत्री मोदी ने 10-11 जनवरी को मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व समारोह में भाग लिया था.
- 2 मार्च 2025: PM मोदी ने गुजरात में श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर का दौरा किया, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और रुद्र अभिषेक किया था.
- 20 नवंबर 2022: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की.
- 20 अगस्त 2021: PM मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सोमनाथ में कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी.
- 18 जनवरी 2021: PM मोदी को सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त किया गया.
- 8 मार्च 2017: PM मोदी ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर का दौरा किया (उस समय UP में मतदान चल रहा था); PM के तौर पर मंदिर का यह उनका पहला दौरा था.
- 1 फरवरी 2014: तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 1 फरवरी 2014 को (प्रधानमंत्री बनने से पहले) सोमनाथ में श्री सोमनाथ मंदिर के पूर्ण हुए स्वर्ण शिखर का उद्घाटन किया.
पहला आदि ज्योतिर्लिंग
श्री सोमनाथ महादेव वह पवित्र भूमि माना जाता है, जहां चंद्रमा की तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उन्हें अंधेरे के श्राप से मुक्त किया. यह भी माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां भगवान श्री कृष्ण ने अपनी अंतिम यात्रा की थी. माना जाता है कि सोमनाथ का तट मंदिर 4 चरणों में बनाया गया था - भगवान सोम द्वारा सोने से, रवि द्वारा चांदी से, भगवान कृष्ण द्वारा लकड़ी से और राजा भीमदेव द्वारा पत्थर से मंदिर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप हैं, जिसका शिखर 155 फीट ऊंचा है. शिखर के ऊपर कलश का वजन 10 टन है और ध्वजदंड 27 फीट ऊंचा और 1 फुट परिधि का है. सातवां मौजूदा मंदिर कैलाश महामेरु प्रसाद शैली में बना है. महारानी अहिल्याबाई द्वारा जीर्णोद्धार किया गया मंदिर मुख्य मंदिर परिसर के पास है.
आज़ादी के सरदार पटेल ने शुरू कराया था सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण
11वीं से 18वीं शताब्दी ई. में मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा द्वारा छह बार मंदिर पर हमला करने का जिक्र है. लोगों की आस्था से हर बार मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया. आज़ादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का काम सरदार वल्लभभाई पटेल ने शुरू किया. 13 नवंबर 1947 को दिवाली के समय की एक यात्रा ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने घोषणा की कि मंदिर वहीं फिर से बनाया जाएगा. आधुनिक मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार पटेल के संकल्प से हुआ. भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति, स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को मौजूदा मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की. ऐसा कहा जाता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू इससे खुश नहीं थे. वह नहीं चाहते थे कि राष्ट्रपति और मंत्री इस कार्यक्रम से जुड़ें.
सोमनाथ मंदिर का स्वामी विवेकानंद से रहा खास जुड़ाव
1890 में स्वामी विवेकानंद सोमनाथ गए थे और उस अनुभव ने उन्हें बहुत प्रभावित किया. उन्होंने 1897 में चेन्नई में एक लेक्चर के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, "दक्षिण भारत के कुछ पुराने मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको बहुत कुछ सिखाएंगे. आपको किसी भी किताब से ज़्यादा जाति के इतिहास की गहरी समझ देंगे. देखिए कैसे ये मंदिर सौ हमलों और सौ बार फिर से बनने के निशान दिखाते हैं, लगातार नष्ट होते रहे और लगातार खंडहरों से फिर से उभरते रहे, पहले की तरह ही नए और मज़बूत! यही राष्ट्रीय सोच है, यही राष्ट्रीय जीवन-धारा है.
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