- 2024- 25 बैच के नए एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कई नसीहत दी.
- उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होना आसान है, लेकिन लोकप्रियता और विश्वसनीयता एक नहीं होती.
- उन्होंने कहा कि सफलता का पैमाना सोशल मीडिया की प्रसिद्धि नहीं होना चाहिए.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 2024- 25 बैच के नए एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) के औपचारिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्हें कानूनी पेशे में उत्कृष्टता, ईमानदारी और निरंतर तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सलाह दी. सोशल मीडिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में वहां लोकप्रिय होना आसान है, लेकिन लोकप्रियता और विश्वसनीयता एक जैसी नहीं होती. उन्होंने कहा कि सफलता का पैमाना सोशल मीडिया की प्रसिद्धि नहीं होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि वकीलों का उद्देश्य अदालत, सहकर्मियों, मुवक्किलों और बार के बीच अपने ज्ञान, तैयारी और पेशेवर आचरण से सम्मान अर्जित करना होना चाहिए.
मुकदमों की पैरवी नहीं, न्याय प्रशासन की गरिमा बनाए रखना दायित्वः सीजेआई
मुख्य न्यायाधीश ने सभी नव-नामित 207 AOR को बधाई देते हुए कहा कि वे आज देश की न्यायिक व्यवस्था की सबसे प्रतिष्ठित पेशेवर संस्थाओं में से एक का हिस्सा बने हैं. उन्होंने कहा कि AOR का दायित्व केवल मुकदमों की पैरवी तक सीमित नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक परंपराओं और न्याय प्रशासन की गरिमा को बनाए रखना भी है.

कार्यक्रम में मंचासीन सीजेआई सूर्यकांत सहित अन्य न्यायिक अधिकारी.
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उपाधि या पद किसी व्यक्ति का करियर नहीं बनातेः सीजेआई
उन्होंने कहा कि केवल उपाधि या पद किसी व्यक्ति का करियर नहीं बनाते, बल्कि उसके काम की गुणवत्ता ही उसकी वास्तविक पहचान होती है. उन्होंने नए AOR से आग्रह किया कि वे इस बात की चिंता न करें कि लोग उनके नाम को कितनी जल्दी पहचानते हैं, बल्कि ऐसा काम करें कि जब भी किसी केस की फाइल पर उनका नाम आए, अदालत को पूरा विश्वास हो कि उसके सामने एक पूरी तैयारी के साथ पेश होने वाला वकील और सुव्यवस्थित ब्रीफ मौजूद होगा.
करियर के शुरुआती सालों में भटकाव से बचें वकील
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि असली पहचान और सम्मान निरंतर मेहनत तथा कानूनी कौशल को लगातार निखारने से मिलता है. उन्होंने युवा वकीलों को शुरुआती वर्षों में आने वाले आकर्षण और भटकाव से बचने की सलाह भी दी. इस दौरान जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने भी युवा वकीलों के साथ अपने विचार साझा किए.
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ( SCOARA) के अध्यक्ष देवव्रत, उपाध्यक्ष निखिल जैन और सेकेट्री युगांधरा पंवार झा ने भी इस मौके पर अपने विचार रखे.
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