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This Article is From Jun 14, 2024

6 की मौत... 1200 पर्यटक फंसे ... सिक्किम में बादल फटा और बाढ़ में बह गई जिंदगियां 

सिक्किम में बादल फटने के बाद मुख्‍य सचिव वीबी पाठक ने कहा है कि सड़को को बहाल करने में पांच से सात दिन लगेंगे. वहीं पर्यटकों को निकालने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्‍टर मांगे गए हैं.

6 की मौत... 1200 पर्यटक फंसे ... सिक्किम में बादल फटा और बाढ़ में बह गई जिंदगियां 
बादल फटने के कारण अचानक आई बाढ़ से सिक्किम में सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है.
गुवाहाटी :

सिक्किम (Sikkim) के मंगन जिले में बादल फटने के कारण आई बारिश और बाढ़ के कारण छह लोगों की मौत हो गई. यहां पर बुधवार रात को 220.1 मिमी से अधिक बारिश हुई थी. राज्य सरकार ने यह जानकारी दी है. राज्य के पर्यटन विभाग के अनुसार, 1,200 से अधिक घरेलू पर्यटक और 15 विदेशी नागरिक मंगन शहर से करीब 50 किमी दूरी पर स्थि‍त लाचुंग गांव में फंसे हुए हैं. विदेशी नागरिकों में 10 बांग्‍लादेश से, 3 नेपाल से और दो थाइलैंड से हैं. 

मुख्य सचिव वीबी पाठक ने मौसम साफ रहने पर फंसे पर्यटकों को हवाई मार्ग से निकालने के लिए केंद्र से बातचीत शुरू की है. वैकल्पिक रूप से उन्हें सड़क मार्ग से निकाला जाएगा. हालांकि कनेक्टिविटी बहाल करने में एक सप्ताह का समय लग सकता है. 

Sikkim

जल्‍द राहत राशि जारी करने के निर्देश 

पाठक ने कहा, "मंगन जिले में भूस्खलन से पक्षेप और अंभीथांग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और छह लोगों की मौत हो गई है. कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर है. पक्षेप में एक राहत शिविर बनाया गया है. राज्य ने पीड़ित परिवारों के लिए राहत की घोषणा की है. जल्‍द राहत राशि जारी करने के लिए मंगन जिला प्रशासन को सूचित कर दिया गया है. ” 

लाचुंग में फंसे पर्यटकों को निकालने को लेकर मुख्य सचिव ने कहा, "भूस्खलन के कारण सड़क पर हमें छह-सात स्थानों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन और राज्‍य के पीडब्‍ल्‍यूडी विभाग को निर्देश दिए गए हैं, सड़कों को बहाल करने में हमें लगभग पांच से सात दिन लगेंगे. इसलिए राज्य ने मौसम की स्थिति के आधार पर निकासी के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मांग की है."

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ग्‍लेशियर झीलों को कोई खतरा नहीं : पाठक 

पाठक ने आश्वासन दिया कि "ग्‍लेशियर झीलों को कोई खतरा नहीं है." उन्‍होंने कहा, "राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सिक्किम में 15 से अधिक ग्‍लेशियर झीलों का लगातार अवलोकन और निगरानी कर रहा है. ऐसा कोई खतरा नहीं है. राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर और सीडीएसी, राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और महत्वपूर्ण डेटा साझा कर रहे हैं. मानसून के दौरान ग्‍लेशियर झील के फटने से बाढ़ का कोई संभावित खतरा नहीं है.'' 

निचले इलाकों में तीस्ता नदी के बढ़ते स्तर के खतरे को देखते हुए पाठक ने कहा, "तीस्ता नदी में काफी तलछट हैं, जिसके कारण जलस्तर बढ़ रहा है. इसलिए नियमित मानसूनी बारिश में भी जलस्तर बढ़ रहा है, हम इन चिंताओं को संबंधित मंत्रालय के समक्ष उठा रहे हैं."

क्षतिग्रस्‍त राष्‍ट्रीय राजमार्ग जल्‍द खोलने का आश्‍वासन 

मंगन के पास के स्थानों से नुकसान की सूचना दी गई है, न कि लाचेन, लाचुंग या चुंगथांग से. मुख्य सचिव ने कहा, "दजोंगु के सांकलांग गांव में नदी के बढ़ते स्तर के कारण नवनिर्मित बैली सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया है. अगले कुछ दिनों में डिकचू शहर के माध्यम से दजोंगु से कनेक्टिविटी बहाल कर दी जाएगी."

उन्होंने बंगाल की तरफ क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय राजमार्ग को जल्द से जल्द खोलने पर जोर देते हुए आश्वासन दिया कि पर्याप्त खाद्य आपूर्ति है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से बातचीत चल रही है.

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