शास्त्री भवन जो सेंट्रल दिल्ली में बर्षों तक एक सत्ता का केंद्र बना रहा अब खाली किया जा रहा है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थित दो बड़ी इमारतें- जिसमें शास्त्री भवन और कृषि भवन है - को 30 सितंबर तक खाली कर दिया जाएगा और यहां पर 3,155 करोड़ की लागत से कर्तव्य भवन 4 और 5 का निर्माण कराया जाएगा.
एक पत्रकार होने के नाते हम सबकी यादें शास्त्री भवन से बहुत जुड़ी हुई हैं. यहीं पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय का कार्यालय भी होता था जहां से सभी मंत्रालय के बारे में जानकारी मिलती थी. अब यहां का सूचना प्रसारण मंत्रालय लोदी रोड के सूचना भवन में चला गया है.
वैसे शास्त्री भवन में 11 मंत्रालय थे जैसे सूचना प्रसारण, कोयला, कॉरपोरेट, शिक्षा, कानून, खनन, पेट्रोलियम, सामाजिक न्याय, जनजातीय मंत्रालय, महिला एवं बाल कल्याण और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय. सरकार के चार बड़े मंत्रालय गृह, वित्त, विदेश और रक्षा तो राष्ट्रपति भवन से लगे रायसीना हिल्स पर थे और उनके साथ प्रधानमंत्री कार्यालय.
उसी तरह रेल मंत्रालय और कृषि मंत्रालय अलग इमारत में था. कृषि भवन में कृषि के अलावा ग्रामीण विकास और पशुपालन मंत्रालय भी था. उसी तरह उद्योग भवन भी अलग जहां उससे जुड़े मंत्रालय थे. मगर सबके कामकाज की जानकारी देने का काम शास्त्री भवन में होता था क्योंकि भारत सरकार के जितने भी मंत्रालय हैं उन सब का सूचना विभाग का दफ्तर शास्त्री भवन में रहा और सब मंत्रालय की प्रमुख प्रेस कांफ्रेंस शास्त्री भवन में होती थी तब नेशनल मीडिया सेंटर नहीं बना था.

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कंधार हाईजैक की वो प्रेस कॉन्फ्रेंस
शास्त्री भवन में सबसे बड़ी कोई प्रेस कांफ्रेंस हुई है वो थी कंधार विमान अपहरण की जिसमें तत्कालीन उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के अलावा विदेश मंत्री जसवंत सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्रा जैसे तमाम दिग्गज मौजूद रहते थे.
यहीं पर इन्हीं दिनों हो रही एक प्रेस कांफ्रेंस में अपहृत विमान में मौजूद यात्रियों के परिवार के कुछ लोग घुस आए थे और खूब हंगामा किया था. ये भी कहा जाता है कि उस घटना ने तब के सरकार के फैसले को भी प्रभावित किया.
ये वही शास्त्री भवन है जहां कारगिल युद्ध के समय मीडिया को संबोधित करने सेना के तीनों अंगों के बड़े अफसर आते थे और उनकी वर्दी में किए गए प्रेस कांफ्रेंस की बड़ी चर्चा होती थी क्योंकि भारतीय मीडिया के जरिए लोगों ने पहली बार सेना के अफसरों को इस तरह से बात करते देखा था.

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कुछ ऐसा हुआ करता था शास्त्री भवन
एक तरह से शास्त्री भवन हम सब मीडियाकर्मियों के लिए एक ऐसी जगह जिसके हरेक कमरे में खबर होती थी. एक कोने में विदेश मंत्रालय. वहीं ऊपर के फ्लोर पर सूचना प्रसारण मंत्रालय. पत्रकारों के लिए एक वेटिंग लाउंज भी था जहां सोफे लगे थे. यही नहीं अशोका होटल का एक कैफेटेरिया भी था जहां तब 15 रुपए में कॉफी मिलती थी, फिश कटलेट मिलता था और 100 रुपए में थाली मिल जाती थी.
इसकी लोकेशन ही इतनी शानदार थी कि इसके दो कदम पर कृषि भवन, उसके आगे सड़क पार करके रेल भवन, वहां की सड़क पार किजिए तो संसद भवन, फिर वहां से आगे रायसीना हिल चढ़ लिजिए तो प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा गृह, वित्त, रक्षा और विदेश मंत्रालय. कृषि भवन के आगे दो सौ मीटर पर उद्योग भवन, निर्माण भवन.
कहने का मतलब है कि सब आपके नजदीक और सबसे मजेदार बात कि शास्त्री भवन के सामने ही प्रेस क्लब ऑफ इंडिया जहां चाय पर आप अपने साथी पत्रकार मित्रों के साथ गहन राजनीतिक चर्चा कर सकते थे. शास्त्री भवन में एक लाइब्रेरी भी थी जिसे सेंट्रल सेक्रेटिएट लाइब्रेरी भी कहते थे. यह भारत सरकार का दूसरा सबसे बड़ा पुस्तकालय भी था.

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'शास्त्री भवन की यादें धरोहर हैं'
सूचना प्रसारण मंत्रालय में काम करने वाले एक बड़े अधिकारी चैतन्य प्रसाद कहते हैं कि '1991 दिसंबर में मैंने सूचना प्रसारण मंत्रालय में आया. इस शास्त्री भवन में उस समय रखे गए उस पहले कदम से लेकर के रूप में जब मार्च 2026 में यहां से विदाई ली, बहुत सारी गहरी यादें दिल में बसी हैं. हम शास्त्री भवन के इसी परिवेश में पले-बढ़े. यादें अनगिनत हैं कई ऐतिहासिक पलें का मैं गवाह रहा जिस पर मुझे गर्व है. मैंने सूचना एवं प्रसारण (I&B) मंत्रालय में विभिन्न पदों पर काम किया और शास्त्री भवन की वो यादें मेरी धरोहर है.'
वह आगे कहते हैं, 'यहां के उस एसबीआई (SBI) बैंक को कैसे भूल सकता हूं जहां से मैंने अपनी सैलरी ली थी. हर वो कमरा जहां मैं बैठा, हर कोने से यादें आज भी जुड़ी हुई हैं. इस इमारत ने मुझे एक अधिकारी के रूप में मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. मैंने यहां के आपसी सौहार्द, यहां की जीवंतता और सरकारी संचार का केंद्र होने के उस गौरव को भरपूर जिया है जो एक सरकारी अधिकारी होने के नाते मुझे यहां मिला. गुड बाय शास्त्री भवन.'
शास्त्री भवन का निर्माण 1956 से 1968 के बीच हुआ था और इसका नाम भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखा गया था.
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