- अब गांव के हर सड़क की होगी डिजिटल पहचान.
- मोदी सरकार ला रही है Unique QR Code सिस्टम.
- ग्राम पंचायतें सड़क पहचान और रिकॉर्ड अपडेट करने की जिम्मेदारी निभाएंगी.
केंद्र सरकार गांवों के भीतर मौजूद हर सड़क और गली को एक यूनिक कोड, डिजिटल पहचान और एक तय फॉर्मेट में उसे व्यवस्थित करने की तैयारी कर रही है. इस पहल का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रशासन, तेज आपातकालीन सेवाएं, सटीक नेविगेशन और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग सुनिश्चित करना है. दरअसल, केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने इंट्रा-विलेज रोड कोडिंग एंड ग्रेडिंग सिस्टम नाम से एक नया ढांचा तैयार किया है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया जाएगा. इसके तहत देश के सभी गांवों की सड़कों, गलियों यहां तक कि कनेक्ट करने वाले सभी रास्तों को नाम और उन्हें कोड दिया जाएगा और डिजिटल मैपिंग के जरिए उन्हें एक राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज किया जाएगा.
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के जरिए गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने का काम बड़े पैमाने पर हुआ है, लेकिन गांवों के भीतर की सड़कें और गलियां अब भी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं हैं. इसकी वजह से एम्बुलेंस, डाक सेवाओं, सरकारी एजेंसियों और डिजिटल नेविगेशन प्लेटफॉर्म्स को अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
प्रस्ताव के अनुसार गांवों के भीतर की सड़कों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा- मेन रोड, क्रॉस रोड और कनेक्टेड रोड. हर सड़क को एक विशेष अल्फान्यूमेरिक कोड दिया जाएगा, जो राज्य से लेकर गांव स्तर तक उसकी सटीक पहचान बताएगा.

भारत का पहला गांव
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QR कोड स्कैन करो और पहुंच जाओ गांव
सरकार इस नई व्यवस्था को पहले से मौजूद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की कोडिंग सिस्टम और लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी डेटाबेस के साथ जोड़ने की योजना बना रही है. इससे किसी सड़क को दो बार कोड मिलने जैसी समस्या नहीं होगी और सभी रिकॉर्ड एक साथ जुड़े हुए उपलब्ध रहेंगे.
इस परियोजना में आधुनिक डिजिटल तकनीकों का भी इस्तेमाल होगा. डाक विभाग के विकसित डिजिपिन और पंचायती राज मंत्रालय के जियोस्पेशियल प्लेटफॉर्म ग्राम मानचित्र को इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा. हर सड़क को जियो-टैग किया जाएगा और डिजिटल नक्शे पर दर्ज किया जाएगा.
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि गांवों में सड़क किनारे लगाए जाने वाले साइनबोर्ड पर QR कोड भी होंगे. कोई भी व्यक्ति QR कोड स्कैन करके सड़क की लोकेशन, रखरखाव का रिकॉर्ड और नेविगेशन संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेगा. साइनबोर्ड स्थानीय भाषा और अंग्रेजी दोनों में लगाए जाने का प्रस्ताव है ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी आगंतुकों, डिलीवरी एजेंटों और आपातकालीन सेवाओं को भी सुविधा मिल सके.

गांव के सड़कों की रियल टाइम जानकारी मिलना होगी आसान
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लास्ट-माइल नेविगेशन
इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका होगी. सड़क की पहचान, नामकरण और श्रेणी निर्धारण का काम पंचायतें करेंगी. साथ ही ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत हर साल इन सड़कों की समीक्षा और ऑडिट भी किया जाएगा.
सरकार इसे होल-ऑफ-गवर्नमेंट पहल बता रही है, जिसमें पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, डाक विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी, राज्य सरकारें और जियोस्पेशियल एजेंसियां मिलकर काम करेंगी.
अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी, सड़क निर्माण और रखरखाव में पारदर्शिता बढ़ेगी, अलग-अलग विभागों के कामों में दोहराव कम होगा और गांवों तक लास्ट-माइल नेविगेशन को मजबूती मिलेगी. साथ ही योजनाकारों और प्रशासकों को देशभर के ग्रामीण सड़क नेटवर्क की रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध हो सकेगी.
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