सर्पदंश की समस्या के “पूरे देश में” व्याप्त होने का उल्लेख करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह सभी राज्यों को साथ लेकर चिकित्सा सुविधाओं में सर्पदंश का उपचार उपलब्ध कराने के लिए “कुछ करे”.
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि सांप के काटने के इलाज में महत्वपूर्ण ‘विष रोधी' (एंटी-वेनम) की कमी के कारण देश एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है. पीठ ने केंद्र के वकील से कहा, “आप राज्यों को भी इसमें शामिल कर सकते हैं. समस्या पूरे देश में है.”
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इसमें आगे कहा गया, “आप सभी राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर कुछ करने का प्रयास कर सकते हैं. यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है.” केन्द्र के वकील ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर उठाए गए कदमों की जानकारी रिकार्ड में रखेगी.
पिछले साल 13 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था.
अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया कि विश्व में सर्पदंश से होने वाली मौतों की सबसे अधिक दर वाले देश भारत में हर साल लगभग 58,000 मौतें होती हैं. इसमें तर्क दिया गया कि, “इतनी अधिक मृत्यु दर के बावजूद, एंटीवेनम (पॉलीवेनम) की कमी है.”
इसलिए याचिका में सर्पदंश रोकथाम स्वास्थ्य मिशन चलाने और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु दर को कम करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया.
याचिका में सरकारी जिला अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों में मानक चिकित्सा मानदंडों के अनुसार विशेष प्रशिक्षित डॉक्टरों के साथ सर्पदंश उपचार और देखभाल इकाइयां स्थापित करने के निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है.
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